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पारिस्थितिक विनाश (Ecocide) और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कानून

Lokesh Pal May 07, 2026 05:30 8 0

संदर्भ: 

युद्धों, औद्योगिक गतिविधियों और जलवायु संबंधी शोषण के कारण बढ़ते पर्यावरणीय विनाश ने “इकोसाइड (Ecocide)” (पर्यावरण विनाश) को एक अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता देने पर वैश्विक बहस को फिर से तेज कर दिया है।

इकोसाइड क्या है?

  • इकोसाइड का अर्थ है मानव गतिविधियों द्वारा पर्यावरण का बड़े पैमाने पर विनाश, विशेषकर तब जब यह विनाश गंभीर, दीर्घकालिक और अपरिवर्तनीय हो।
  • वर्ष 2021 में, स्टॉप इकोसाइड इंटरनेशनल (Stop Ecocide International) ने इकोसाइड को ऐसे गैरकानूनी या लापरवाह कृत्यों के रूप में परिभाषित किया, जो इस जानकारी के साथ किए जाते हैं कि वे व्यापक या दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति पहुँचा सकते हैं।
  • यह शब्द मूलतः “पर्यावरण की हत्या” का अर्थ देता है, ठीक उसी तरह जैसे “नरसंहार” (Genocide) मानव समूहों के बड़े पैमाने पर विनाश को संदर्भित करता है।

इकोसाइड की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • वियतनाम युद्ध और एजेंट ऑरेंज:  इकोसाइड के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक 1960 और 1970 के दशक के बीच हुए वियतनाम युद्ध के दौरान देखा गया था।
  • एजेंट ऑरेंज का उपयोग:
    • संयुक्त राज्य अमेरिका ने वियतनाम में एजेंट ऑरेंज नामक एक रासायनिक खरपतवारनाशक का उपयोग किया।
    • वनस्पति आवरण को समाप्त करने के लिए बड़े वन क्षेत्रों को नष्ट कर दिया गया।
    • कृषि भूमि लंबे समय तक बंजर हो गई।
    • विषैले रसायनों के संपर्क में आने से कई पीढ़ियों में आनुवंशिक परिवर्तन (Mutations) और जन्म दोष उत्पन्न हुए।
  • आर्थर गैल्स्टन की चिंता:  आर्थर गैल्स्टन, जिनके शोध ने अप्रत्यक्ष रूप से एजेंट ऑरेंज के विकास में योगदान दिया, ने बाद में इसके पर्यावरणीय और मानवीय परिणामों को लेकर गहरा खेद व्यक्त किया।

इकोसाइड का उद्भव

  • स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972:  इकोसाइड का मुद्दा 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने आया।
  • ओलोफ पाल्मे (Olof Palme) की भूमिका:  ओलोफ़ पाल्मे ने वियतनाम युद्ध के दौरान हुए पर्यावरणीय विनाश की कड़ी आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में “इकोसाइड” शब्द का प्रमुख रूप से उपयोग किया।
    • इस सम्मेलन के परिणामस्वरूप बाद में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना हुई।

इकोसाइड से संबंधित विकास

विकास महत्व
आर्थर गैल्स्टन द्वारा “इकोसाइड” शब्द का प्रतिपादन युद्धों के दौरान होने वाले पर्यावरणीय विनाश पर ध्यान आकर्षित किया
स्टॉकहोम सम्मेलन (1972) पर्यावरण संरक्षण को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली
वियतनाम में घरेलू कानून पर्यावरणीय विनाश के विरुद्ध कानूनी प्रतिक्रिया का प्रयास
स्टॉप इकोसाइड इंटरनेशनल द्वारा 2021 की परिभाषा एक औपचारिक कानूनी परिभाषा प्रदान की
यूरोप परिषद की पहल यूरोपीय कानून  में इकोसाइड की मान्यता का विस्तार
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में बढ़ती बहस इकोसाइड को अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और पारिस्थितिक विनाश (Ecocide)

  • अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की स्थापना रोम संविधि के तहत गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के अभियोजन के लिए की गई थी।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के अधिकार क्षेत्र में शामिल अपराध

वर्त्तमान में, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) चार प्रमुख अपराधों का अभियोजन करता है:

  • नरसंहार (Genocide)
  • मानवता के विरुद्ध अपराध (Crimes against humanity)
  • युद्ध अपराध (War crimes)
  • आक्रामकता का अपराध (Crime of aggression)

पाँचवें अपराध का प्रस्ताव

  • अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के ढाँचे के तहत इकोसाइड को पाँचवें अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में शामिल करने की मांग तेजी से बढ़ रही है।
  • समर्थकों का तर्क है कि बड़े पैमाने पर होने वाले पर्यावरणीय विनाश को नरसंहार या युद्ध अपराधों जितनी गंभीरता से देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और भावी पीढ़ियों के लिए खतरा उत्पन्न करता है।

सशस्त्र संघर्ष के दौरान पर्यावरण संरक्षण

  • जिनेवा कन्वेंशन्स: जिनेवा कन्वेंशन्स युद्ध के दौरान आचरण को नियंत्रित करते हैं और सशस्त्र संघर्षों के समय नागरिकों तथा पर्यावरण की सुरक्षा पर बल देते हैं।
    • ये सैन्य अभियानों के दौरान अनावश्यक पर्यावरणीय विनाश को हतोत्साहित करते हैं।
  • ENMOD कन्वेंशन, 1978: पर्यावरण संशोधन कन्वेंशन (ENMOD) युद्ध के दौरान पर्यावरण में परिवर्तन करने वाली तकनीकों के शत्रुतापूर्ण उपयोग को प्रतिबंधित करता है।
  • निषिद्ध गतिविधियाँ के उदाहरण:
    • दुश्मन क्षेत्र को नष्ट करने के लिए नदियों का मार्ग बदलना।
    • कृत्रिम सूखा या बाढ़ उत्पन्न करना।
    • क्लाउड सीडिंग जैसी तकनीकों से मौसम में हस्तक्षेप करना।

मानव-केंद्रित बनाम पर्यावरण-केंद्रित दृष्टिकोण:

  • मानव-केंद्रित दृष्टिकोण:  वर्त्तमान पर्यावरणीय कानून मुख्यतः मानव-केंद्रित हैं, अर्थात वे मुख्य रूप से मनुष्यों को होने वाले नुकसान पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
    • इस दृष्टिकोण के तहत, पर्यावरणीय विनाश कानूनी रूप से मुख्यतः तभी महत्वपूर्ण माना जाता है जब वह सीधे तौर पर मनुष्यों को नुकसान पहुँचाता है।
    • उदाहरण:   यदि कोई कारखाना किसी नदी में विषैले रसायन छोड़ता है और इससे मनुष्य मर जाते हैं या बीमार हो जाते हैं, तो इस कृत्य को अपराध माना जाता है। लेकिन यदि पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचता है, परंतु मनुष्यों को कोई प्रत्यक्ष हानि नहीं होती, तो कानूनी जवाबदेही अक्सर कमजोर रहती है।
  • पर्यावरण-केंद्रित दृष्टिकोण (Ecocentric):  पारिस्थितिकी-केंद्रित (Ecocentric) दृष्टिकोण प्रकृति को मानव हितों से स्वतंत्र, अपने आप में मूल्यवान मानता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार:
    • प्रकृति स्वयं संरक्षण की हकदार है।
    • मानव हानि के बिना भी पर्यावरणीय विनाश अपराध माना जाना चाहिए।
    • पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता, वन, नदियाँ और वन्यजीव स्वतंत्र पारिस्थितिक महत्व रखते हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाएँ

  • मानव-केंद्रित कानूनी ढाँचा:  अधिकांश मौजूदा कानून पर्यावरणीय विनाश की तुलना में मानव पीड़ा पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • केवल युद्धकालीन स्थिति तक सीमितता: यदि इकोसाइड को ICC के तहत मान्यता भी मिल जाती है, तो इसका प्रयोग मुख्यतः युद्ध से संबंधित पर्यावरणीय विनाश तक ही सीमित रह सकता है।
    • शांतिकाल में औद्योगिक गतिविधियों के कारण होने वाला पर्यावरणीय नुकसान फिर भी पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं हो पाता।
  • अधिकार-क्षेत्र और प्रवर्तन की चुनौतियाँ: सभी देश अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के सदस्य नहीं हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल जैसी प्रमुख शक्तियाँ ICC प्रणाली में पूर्ण भागीदार नहीं हैं।
    • इसके परिणामस्वरूप, शक्तिशाली देशों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय जवाबदेही लागू करना कठिन बना रहता है।
  • रोम संविधि में संशोधन की समस्या:  रोम संविधि में किसी भी संशोधन के लिए सदस्य देशों के दो-तिहाई की स्वीकृति आवश्यक होती है, जिससे कानूनी सुधार राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

हाल के सकारात्मक विकास

  • पर्यावरण संगठनों की मान्यता:  वर्ष 2025 में, इंटरनेशनल अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने इकोसाइड को एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चिंता के रूप में मान्यता दी, जिससे राज्यों पर नैतिक दबाव बढ़ गया।
  • यूरोप में कानूनी विकास:  यूरोप परिषद (Council of Europe) ने भी गंभीर पर्यावरणीय विनाश को दंडनीय अपराध के रूप में मान्यता देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
    • ये विकास मजबूत पर्यावरणीय जवाबदेही तंत्रों की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति को दर्शाते हैं।

इकोसाइड को मान्यता प्रदान करने के लाभ 

  • पर्यावरण संरक्षण: जंगलों, नदियों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत कर सकती है।
  • जलवायु न्याय: जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक पतन के लिए जवाबदेही सुनिश्चित होगी
  • पीढ़ीगत न्याय (Intergenerational Equity): इकोसाइड कानून अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षति को रोककर भावी पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद कर सकते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय शासन को मजबूत करना:  इकोसाइड की मान्यता से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है और कॉर्पोरेट तथा राज्य स्तर पर अधिक सख्त जवाबदेही सुनिश्चित हो सकती है।

आगे की राह

  • पारिस्थितिकी-केंद्रित विधिशास्त्र की ओर बदलाव: अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय कानून को धीरे-धीरे प्रकृति को एक ऐसे तत्व के रूप में मान्यता देनी चाहिए, जिसे स्वतंत्र कानूनी संरक्षण प्राप्त हो।
  • ICC अधिकार क्षेत्र का विस्तार:  इकोसाइड को ICC के तहत पाँचवें अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता देने के लिए वैश्विक सहमति विकसित की जानी चाहिए।
  • सख्त प्रवर्तन तंत्र: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि बड़े पैमाने पर होने वाले पर्यावरणीय विनाश के लिए जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
  • वैश्विक सहयोग:  देशों को समान पर्यावरणीय मानकों के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पारिस्थितिक शासन को बेहतर बनाने के लिए सहयोग करना चाहिए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न:  वर्त्तमान अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढाँचा मूलतः मानव-केंद्रित (Anthropocentric) है, जो संघर्षों के दौरान गंभीर पर्यावरणीय क्षति के अभियोजन में अपर्याप्त साबित होता है। रोम संविधि (Rome Statute) के तहत इकोसाइड को एक अलग अपराध के रूप में मान्यता देने के पक्ष में तर्कों का विश्लेषण कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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