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Lokesh Pal
May 08, 2026 05:00
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हाल ही में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि वे एसिड हमले के पीड़ित, जिन्हें जबरन एसिड पिलाया गया और जिनके शरीर में बिना किसी बाहरी निशान के आंतरिक चोटें हुईं, उन्हें भी दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with Disabilities Act – RPwD Act), 2016 के तहत एसिड अटैक पीड़ित माना जाएगा।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘एसिड अटैक पीड़ित’ की परिभाषा का विस्तार भारत में कल्याणकारी कानूनों की उद्देश्यपूर्ण व्याख्या (Purposive Interpretation) की निरंतर आवश्यकता को उजागर करता है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 तथा ऐसे मामलों में वर्त्तमान न्यायिक लंबितता (Judicial Backlog) के संदर्भ में इस कथन की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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