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Lokesh Pal
May 08, 2026 05:01
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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने “केयर इकोनॉमी की पुनर्कल्पना: निजी बोझ से सामाजिक और आर्थिक अवसंरचना तक” (Re-imagining the Care Economy: From Private Burden to Social and Economic Infrastructure) शीर्षक वाले अपने कार्य-पत्र में भारत के देखभाल (केयर) क्षेत्र में एक बड़े नीतिगत परिवर्तन का आह्वान किया है।
भारत इस समय जनसांख्यिकीय और आर्थिक दृष्टि से एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। बुजुर्ग आबादी में वृद्धि, शहरों में लगातार कम होती जन्म दर और बढ़ता प्रजनन अंतर—इन सबके साथ-साथ महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी का स्थिर हो जाना—ये कोई अलग रुझान नहीं हैं। बल्कि, ये सभी ‘देखभाल की कमी’ (Care deficit) के कारण उत्पन्न आपस में जुड़े हुए लक्षण हैं; एक ऐसी कमी जिसे लंबे समय से राष्ट्रीय नीति की प्राथमिकता मानने के बजाय, केवल एक घरेलू समस्या के तौर पर ही देखा जाता रहा है।
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