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Lokesh Pal
June 05, 2026 05:15
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भारत के समक्ष जलवायु वित्तपोषण संबंधी एक विशाल चुनौती विद्यमान है। अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) को वर्ष 2030 तक पूरा करने के लिए भारत को ₹162.5 ट्रिलियन (2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) की आवश्यकता होगी, जबकि वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए लगभग 10.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जरूरत पड़ेगी।
भारत की जलवायु-वित्त संबंधी बाधा धन की पूर्ण कमी का नहीं, बल्कि संस्थागत क्षमता की कमी का प्रश्न है। यदि आगामी बजटों में नियामकीय साधनों को अधिक प्रभावी बनाया जाए, तो भारत अपनी प्राकृतिक पूँजी को जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध सबसे अधिक लचीली, समावेशी और न्यायसंगत आर्थिक सुरक्षा-पंक्ति में परिवर्तित कर सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: “भारत के जलवायु अनुकूलन एवं शमन लक्ष्यों की प्राप्ति में चुनौती केवल वित्तीय साधनों की उपलब्धता नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर पूँजी जुटाने की है”। हाल की RBI पहलों तथा व्यापक जलवायु-वित्त वर्गीकरण की आवश्यकता के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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