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Lokesh Pal
June 05, 2026 05:00
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चक्रवात दाना के दौरान ओडिशा के मैंग्रोव वनों ने सुरक्षा प्रदान करने में महंगे बुनियादी ढाँचों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। इससे यह तथ्य उजागर हुआ कि भारत के महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी मुख्यधारा की जलवायु अनुकूलन नीतियों और वित्तीय व्यवस्थाओं में पर्याप्त रूप से न तो उपयोग किए जा रहे हैं और न ही उन्हें उचित मान्यता मिल रही है।
चुनौती अब यह नहीं है कि पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) प्रभावी है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हमारे नीतिगत ढाँचे इसे पहचानने, मापने और व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए तैयार हैं। बिखरी हुई और अलग-अलग परियोजनाओं से आगे बढ़कर एक समन्वित राष्ट्रीय रणनीति अपनाने से भारत अपनी प्राकृतिक पूँजी को जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध सबसे अधिक लचीली, लागत-प्रभावी और न्यायसंगत सुरक्षा-पंक्ति के रूप में स्थापित कर सकेगा।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: लागत-प्रभावी एवं सामाजिक रूप से लाभकारी रणनीति होने के बावजूद, पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन ( EbA) भारत की तटीय प्रबंधन नीतियों में अभी भी हाशिये पर बना हुआ है। इसके पीछे के कारणों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा आगे की राह सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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