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चिकित्सा प्रशिक्षण में सहानुभूति एवं नैतिकता

Lokesh Pal June 18, 2026 05:15 11 0

संदर्भ:

एक चिकित्सक द्वारा शव (cadaver/चिकित्सा शिक्षा के लिए दान किया गया मानव शरीर) के बारे में असंवेदनशील टिप्पणी करने से जुड़े एक विवाद ने, चिकित्सा प्रशिक्षण में व्यावसायिक नैतिकता तथा सहानुभूति को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

  • चिकित्सा शिक्षा केवल नैदानिक ​​कौशल और वैज्ञानिक ज्ञान विकसित करने तक सीमित नहीं है; इसके लिए मानव गरिमा के प्रति सम्मान, करुणा तथा नैतिक उत्तरदायित्व की भी आवश्यकता होती है।
  • शवों (cadavers) को डॉक्टरों का पहला शिक्षक माना जाता है, क्योंकि व्यक्ति स्वेच्छा से शिक्षा के लिए अपने शरीर का दान करते हैं।

चिकित्सा पेशे में नीतिशास्त्र का महत्त्व

  • मानव गरिमा का सम्मान:
    • चिकित्सा की शुरुआत मानव जीवन और गरिमा के सम्मान से होती है।
    • किसी व्यक्ति की गरिमा मृत्यु के बाद भी बनी रहती है।
    • शवों के रख-रखाव के लिए कृतज्ञता, संवेदनशीलता तथा सम्मान की आवश्यकता होती है।
  • मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण:
    • डॉक्टरों को केवल बीमारी का ही नहीं, बल्कि मरीज का भी इलाज करना चाहिए।
    • सहानुभूति डॉक्टरों को मरीजों की भावनात्मक तथा मनोवैज्ञानिक पीड़ा को समझने में मदद करती है।
  • विश्वास बनाए रखना:
    • चिकित्सक-मरीज का संबंध विश्वास तथा गोपनीयता पर निर्भर करता है।
    • नैतिक आचरण स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में जनता के विश्वास को मजबूत करता है।

चिकित्सा नीतिशास्त्र के चार स्तंभ

  • स्वायत्तता और गरिमा :
    • व्यक्तियों की पसंद और गरिमा का सम्मान करना।
    • इसमें चिकित्सा शिक्षा के लिए स्वेच्छा से दान किए गए शवों का सम्मान करना भी शामिल है।
  • सहानुभूति और करुणा:
    • डॉक्टरों को मरीज की भावनाओं और पीड़ा को समझना चाहिए।
    • चिकित्सा पेशेवरों को बीमारी और मृत्यु के बार-बार संपर्क में आने के कारण भावनात्मक रूप से अलग (detached) होने से बचना चाहिए।
  • गैर-हानिकारक:
    • इसका अर्थ है “कोई नुकसान न पहुँचाना।”
    • एक डॉक्टर के कार्यों, जिसमें ऑनलाइन व्यवहार भी शामिल है, से मरीजों की गरिमा या विश्वास को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए।
  • परोपकार एवं न्याय :
    • डॉक्टरों को मरीजों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।
    • आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि से परे, स्वास्थ्य सेवा समानता एवं निष्पक्षता के साथ प्रदान की जानी चाहिए।

चिकित्सा सहानुभूति में कमी के कारण

  • अटेंशन इकोनॉमी (Attention Economy): सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अक्सर शॉक वैल्यू (चौंकाने वाली सामग्री) तथा विवादास्पद सामग्री को बढ़ावा देते हैं।
    • वायरल/प्रसिद्ध होने की इच्छा व्यावसायिक नैतिकता से समझौता कर सकती है।
  • चिकित्सा का व्यावसायीकरण:
    • मुनाफे पर अत्यधिक ध्यान देने से स्वास्थ्य सेवा का मानवीय पहलू कमजोर हो सकता है।
  • अकादमिक दबाव: चिकित्सा शिक्षा अक्सर अंकों, रटने और तकनीकी कौशल पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करती है।
    • मानवीय मूल्यों तथा नैतिक समझ पर कम ध्यान दिया जा सकता है।

चिकित्सा नीतिशास्त्र को बढ़ावा देने वाली पहलें

  • एटीकॉम (AETCOM – व्यवहार, नीतिशास्त्र और संचार) मॉड्यूल: चिकित्सा विद्यार्थियों के बीच सहानुभूतिपूर्ण और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा के लिए व्यावसायिक व्यवहार, संचार कौशल तथा नैतिक मूल्यों को विकसित करने हेतु, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा शुरू किया गया।
  • शव शपथ (Cadaveric Oath):
    • चिकित्सा छात्र शवों को अपने पहले शिक्षक के रूप में स्वीकार करते हैं।
    • यह कृतज्ञता और सम्मान को बढ़ावा देता है।
  • चिकित्सा मानविकी (Medical Humanities): चिकित्सा शिक्षा में साहित्य, मरीजों के अनुभवों और सामाजिक समझ को शामिल करना।

आगे की राह

  • विषय-आधारित नैतिक शिक्षा: छात्रों को केवल सैद्धांतिक व्याख्यानों की बजाय वास्तविक जीवन की नैतिक दुविधाओं के माध्यम से पढ़ाया जाए।
  • सहानुभूति का मूल्यांकन: नैदानिक ​​परीक्षाओं में संचार कौशल तथा मरीज के साथ वार्ता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
  • परामर्श : वरिष्ठ डॉक्टरों को नैतिक व्यावसायिक व्यवहार के लिए रोल मॉडल के रूप में कार्य करना चाहिए।
  • प्रौद्योगिकी का उत्तरदायी उपयोग: एआई (AI) को डॉक्टरों का समर्थन करना चाहिए, लेकिन यह मानवीय सहानुभूति तथा भावनात्मक समझ का स्थान नहीं ले सकता।

निष्कर्ष

एक अच्छे चिकित्सक के लिए वैज्ञानिक क्षमता और नैतिक संवेदनशीलता दोनों की आवश्यकता होती है। चिकित्सा शिक्षा को ऐसे पेशेवरों का निर्माण करना चाहिए, जो मानव गरिमा की रक्षा करने तथा स्वास्थ्य सेवा में विश्वास को मजबूत करने हेतु ज्ञान, करुणा तथा नैतिक उत्तरदायित्व को जोड़ते हों।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न. चिकित्सा प्रशिक्षण में मानव शवों (cadavers) के उपयोग से जुड़ी नैतिक चिंताएँ क्या हैं? चर्चा कीजिए, कि ‘साइलेंट मेंटर’ दर्शन को भारतीय चिकित्सा पाठ्यक्रम में किस प्रकार एकीकृत किया जा सकता है।

(10 अंक, 150 शब्द)

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