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Lokesh Pal
June 18, 2026 05:00
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भूमि क्षरण एक प्रमुख पर्यावरणीय चुनौती के रूप में उभरा है, जो मृदा की उर्वरता, कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा एवं आजीविका को प्रभावित कर रहा है।
ये कारक आर्द्रता की कमी को बढ़ाते हैं तथा भूमि क्षरण को तीव्र करते हैं।
भूमि क्षरण केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है बल्कि आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा तथा ग्रामीण आजीविका को प्रभावित करने वाली एक चुनौती है। एक लचीले और सतत भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामुदायिक भागीदारी, प्रौद्योगिकी तथा पारिस्थितिक बहाली के माध्यम से सतत भूमि प्रबंधन आवश्यक है।
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