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नीतियों से जमीनी स्तर तक जलवायु अनुकूलन का विस्तार

Lokesh Pal April 24, 2026 05:30 4 0

संदर्भ:

भारत विश्व का 9वां सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील देश है। वर्ष 1995 से 2024 के बीच, देश ने 430 चरम मौसम घटनाओं का सामना किया, जिससे 170 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ और 1.3 अरब लोग प्रभावित हुए।

मुख्य अवधारणाएँ

  • शमन (Mitigation): जलवायु परिवर्तन के मूल कारणों को कम करना (जैसे सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन)।
  • अनुकूलन (Adaptation): यह स्वीकार करना कि जलवायु परिवर्तन हो रहा है और उसके प्रभावों से निपटने की तैयारी करना (जैसे सूखा-प्रतिरोधी बीज, तटबंध निर्माण)।

NDCs क्या हैं?

  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान — पेरिस समझौते के तहत प्रत्येक देश की जलवायु प्रतिबद्धताएँ।

भारत के अद्यतन NDCs (2031–35)

  • जलवायु सहनशीलता को प्रत्येक नीति में मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जाएगा।
    • मुख्यधाराकरण (Mainstreaming): प्रत्येक विकास परियोजना में जलवायु से संबंधित पहलू को शामिल करना अनिवार्य होगा।
  • तटीय सहनशीलता, आपदा शमन और गर्मी से निपटने पर ध्यान केंद्रित करना।
  • जैव विविधता और सतत आजीविका को एकीकृत किया गया है।

वैश्विक लक्ष्य

  • वर्ष 2035 तक अनुकूलन वित्त को तीन गुना करना।
  • COP-30 में बेलेम अनुकूलन संकेतक (Belém Adaptation Indicators) को अपनाना

जलवायु वित्त संकट और टैक्सोनॉमी अंतर

वित्तीय समस्या

  • वित्त वर्ष 2022 में भारत ने अनुकूलन पर अपने GDP का केवल 5.6% व्यय किया।
  • केंद्रीय बजट 2026–27 शमन (जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा) की ओर अधिक झुका हुआ है।
  • UNEP अनुकूलन अंतर रिपोर्ट 2025: विकासशील देशों के लिए प्रति वर्ष 284–339 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक अंतर।

जलवायु वित्त टैक्सोनॉमी क्या है?

  • यह एक वर्गीकरण प्रणाली है जो यह तय करती है कि कौन-सी परियोजनाएँ “ग्रीन” हैं।
  • भारत द्वारा वर्ष 2025 में ड्राफ्ट क्लाइमेट फाइनेंस टैक्सोनॉमी जारी की गई है।

मुख्य कमी

  • केवल शमन (उत्सर्जन में कमी) पर केंद्रित।
  • अनुकूलन परियोजनाएँ इसमें शामिल नहीं हैं।

प्रमुख सरकारी पहल

  • NICRA (जलवायु-सहिष्णु कृषि में राष्ट्रीय नवाचार):
    • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा शुरू किया गया।
    • 651 जिलों में 151 संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई है।
    • मुख्य कार्य: सूखा-रोधी बीज उपलब्ध कराना, ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और किसानों की क्षमता निर्माण करना।
  • जलवायु सहनशील गाँव (CRV) – तमिलनाडु मॉडल
    • आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में रेखांकित किया गया, यह मॉडल वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) के सहयोग से 11 संवेदनशील जिलों को शामिल करता है।
    • चार स्तंभ: स्थानीय जल प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण तथा आजीविका सुरक्षा।
    • बॉटम-अप दृष्टिकोण: स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सीधे शामिल किया जाता है।
  • अद्यतन NDCs: भारत वर्ष 2035 तक अपने जलवायु अनुकूलन लक्ष्यों को तीन गुना करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें तटीय लचीलापन और आपदा तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

चुनौतियाँ

  • वित्तीय अंतर: वर्ष 2022 में, भारत ने अनुकूलन पर अपने GDP का केवल 5.6% व्यय किया। वैश्विक स्तर पर, विकासशील देशों को 284 से 339 अरब डॉलर के विशाल अनुकूलन वित्त अंतर का सामना करना पड़ रहा है।
  • शमन पक्षपात: अधिकांश सरकारी और निजी वित्तपोषण वर्त्तमान में शमन परियोजनाओं (जैसे हरित ऊर्जा) पर केंद्रित है, क्योंकि इन्हें “हरित” निवेश के रूप में वर्गीकृत करना आसान होता है, जिसके कारण अनुकूलन परियोजनाएँ कम वित्तपोषित रह जाती हैं।
  • केंद्रीकृत योजना: शीर्ष-से-नीचे नीतियाँ अक्सर स्थानीय विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने में विफल रहती हैं।
  • वैश्विक कमी: UNEP के अनुसार विकासशील देशों में अनुकूलन के लिए 284 से 339 अरब डॉलर का वित्तीय अंतर विद्यमान है।
  • संस्थागत अलगाव: राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय अनुकूलन योजनाएँ अक्सर केंद्रीकृत बनी रहती हैं और स्थानीय जमीनी पहलों के साथ एकीकरण का अभाव होता है।

आगे की राह

  • स्थानीय नेतृत्व वाला अनुकूलन (LLA): पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को जलवायु योजना का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाना, क्योंकि वे स्थानीय संवेदनशीलताओं को सबसे बेहतर समझते हैं।
  • संस्थागत परिवर्तन: प्रत्येक विभाग और जिला स्तर पर जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठों का गठन करना।
  • वित्तीय सुधार: निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करना और यह सुनिश्चित करना कि बजट पुनः आवंटन में अनुकूलन को प्राथमिकता दी जाए।
  • समेकित योजना: व्यापक लचीलापन ढाँचा बनाने के लिए केंद्रीकृत नीति (शीर्ष-से-नीचे) को विकेंद्रीकृत सामुदायिक भागीदारी (नीचे-से-ऊपर) के साथ संयोजित करना।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न: 

प्रश्न: “भारत के अद्यतन NDCs जलवायु अनुकूलन को मुख्यधारा में लाने पर बल देते हैं, फिर भी वित्तीय और संस्थागत ढाँचे अभी भी शमन-केंद्रित बने हुए हैं।” इस कथन का विश्लेषण कीजिए तथा स्थानीय नेतृत्व वाले अनुकूलन (LLA) के विस्तार हेतु उपाय सुझाइए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

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