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मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) और भारत की व्यापार चुनौतियाँ

Lokesh Pal June 10, 2026 05:00 26 0

संदर्भ:

भारत ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के अपने नेटवर्क का विस्तार किया है। हाल ही में लागू भारत–ओमान FTA के साथ भारत के कुल FTAs की संख्या बढ़कर 15 समझौतों तक पहुँच गई है, जो 27 देशों को शामिल करते हैं। इसके अतिरिक्त, 42 देशों को शामिल करने वाले 9 अन्य FTAs पर चर्चा चल रही है। इनके लागू होने पर भारत का FTA नेटवर्क 69 देशों तक विस्तारित हो सकता है, जो भारत के लगभग 75% निर्यात को कवर करेगा।

मुक्त व्यापार समझौते का अर्थ

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA) देशों के बीच एक ऐसा समझौता होता है जिसके तहत वे वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले टैरिफ (सीमा शुल्क) को कम या समाप्त कर देते हैं, ताकि व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके।

भारत के समक्ष FTAs से संबंधित चुनौतियाँ

  • बढ़ता व्यापार घाटा: व्यापार घाटा: जब किसी देश से आयात, निर्यात से अधिक हो जाता है।
    • FTAs से यह अपेक्षा की गई थी कि भारतीय निर्यात में वृद्धि होगी, लेकिन कई मामलों में आयात की वृद्धि निर्यात की तुलना में अधिक तेज़ी से हुई।
    • उदाहरण:
      • आसियान के साथ FTA के बाद भारत का व्यापार घाटा काफी बढ़ गया।
      • जापान और दक्षिण कोरिया के साथ भी व्यापार घाटा बढ़ा।
      • EFTA समझौते के तहत भारत ने लगभग $48.6 बिलियन का निर्यात किया, जबकि लगभग $100 बिलियन का आयात किया, जिससे बड़ा घाटा हुआ।
  • हालाँकि कुछ दक्षिण एशियाई देशों के साथ भारत को व्यापार अधिशेष भी प्राप्त हुआ है।
  • समस्या: भारत विदेशी उत्पादों के लिए एक बड़ा बाज़ार बन गया है, लेकिन विदेशी बाज़ारों तक पहुँच से मिलने वाले लाभों का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं कर पाया है।

टैरिफ विषमता

  • अर्थ: विभिन्न देशों के बीच शुल्क (टैरिफ) दरों में अंतर; यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अंतर्गत सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) टैरिफ से संबंधित है।
  • भारत का MFN टैरिफ: लगभग 12.6%, जो कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है।
    • उदाहरण: यदि भारत किसी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत अपने टैरिफ को 12.6% से घटाकर 0% कर देता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदार देशों के टैरिफ पहले से ही कम हैं।
    • प्रभाव: भारत को अपेक्षाकृत अधिक टैरिफ रियायत देनी पड़ती है, जिसके परिणामस्वरूप उसका बाज़ार साझेदार देश की तुलना में अधिक खुल सकता है।

उत्पत्ति के नियम (RoO) और अनुपालन का बोझ

  • अर्थ: ऐसे नियम जो यह सुनिश्चित करते हैं कि FTA के लाभ प्राप्त करने वाले उत्पाद वास्तव में साझेदार देश में ही उत्पादित या पर्याप्त रूप से निर्मित किए गए हों।
  • उदाहरण: यह सुनिश्चित करने के लिए कि चीनी वस्तुएँ भारत में आकर केवल मामूली परिवर्तन के बाद भारत के FTA लाभों का उपयोग करके निर्यात न की जाएँ।
  • समस्या: जटिल दस्तावेज़ीकरण, उच्च अनुपालन लागत और कागजी कार्यवाही की तुलना में सीमित लाभों के कारण सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) अक्सर FTA का उपयोग करने से बचते हैं।
  • स्पेगेटी बाउल प्रभाव (Spaghetti Bowl Effect): अर्थशास्त्री जगदीश भगवती के अनुसार, विभिन्न व्यापार समझौतों के परस्पर अतिच्छादन नियम जटिलता उत्पन्न करते हैं, जिससे कंपनियाँ अक्सर FTA के लाभों का उपयोग करने से बचती हैं।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (Inverted Duty Structure)

  • अर्थ: कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क तथा तैयार उत्पादों पर कम शुल्क होने से घरेलू विनिर्माण हतोत्साहित होता है और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाती है।
  • उदाहरण:
    • स्टील/एल्यूमिनियम कच्चा माल → 10% आयात शुल्क
    • तैयार मशीनरी → 0% शुल्क

 “मेक इन ASEAN, सेल इन इंडिया”

  • कंपनियाँ सस्ते कच्चे माल (इनपुट्स) और FTA के लाभों के कारण अपना उत्पादन आसियान देशों में स्थानांतरित कर सकती हैं तथा वहाँ निर्मित तैयार माल को कम आयात शुल्क (टैरिफ) पर भारत में निर्यात कर सकती हैं।

आगे की राह

  • टैरिफ संरेखण: इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को सुधारने और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कच्चे माल एवं मध्यवर्ती वस्तुओं पर आयात शुल्क (टैरिफ) कम किए जाएँ।
  • मौजूदा FTA पर पुनर्विचार: भारत के लिए संतुलित व्यापारिक लाभ सुनिश्चित करने हेतु आसियान FTA जैसे समझौतों की समीक्षा और आवश्यकतानुसार पुनर्विचार की जाए।
  • MSME अनुपालन बोझ में कमी: उत्पत्ति के नियम (RoO) से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा छोटे निर्यातकों को FTA के लाभों तक आसानी से पहुँच प्रदान की जाए।
  • FTA को PLI योजना से जोड़ना: निर्यातोन्मुख विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के साथ समन्वित किया जाए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: “मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) ने ऐतिहासिक रूप से भारत के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के बजाय उसके व्यापार घाटे को बढ़ाया है।” इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर विशेष बल देते हुए इस प्रवृत्ति के लिए उत्तरदायी संरचनात्मक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, सुधारात्मक उपाय सुझाइए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

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