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Lokesh Pal
July 27, 2026 05:15
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परीक्षा निष्पक्षता, लोकतांत्रिक जवाबदेही और संस्थागत उत्तरदायित्व को लेकर हुए सार्वजनिक विमर्श ने भारत की संवैधानिक लोकतंत्र, समावेशी विकास और नागरिक भागीदारी को सुदृढ़ करने से संबंधित चर्चाओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है, विशेषकर ऐसे समय में जब देश विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विकसित भारत 2047 बनने की भारत की आकांक्षा के लिए तकनीकी उत्कृष्टता को संवैधानिक मूल्यों, नैतिक नेतृत्व और समावेशी शासन के साथ संतुलित करना आवश्यक है। सतत राष्ट्रीय प्रगति केवल आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने, अवसरों का विस्तार करने तथा यह सुनिश्चित करने पर भी निर्भर करेगी कि विकास जन-केंद्रित और समतापूर्ण बना रहे।
सिविल सेवा मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न: संवैधानिक नैतिकता’ (Constitutional Morality) का भारतीय लोकतंत्र में क्या महत्त्व है? लोकतांत्रिक शासन में इसके समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।(250 शब्द) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न: भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों |
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