//php print_r(get_the_ID()); ?>
Lokesh Pal
June 23, 2026 05:00
3
0
हालिया घटनाएँ, जैसे चीनी-लिंक्ड सॉफ्टवेयर के माध्यम से भारतीय सीसीटीवी (CCTV) नेटवर्क से कथित समझौता और यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिबंधों के कारण माइक्रोसॉफ्ट द्वारा नयारा एनर्जी (Nayara Energy) को डिजिटल एक्सेस (पहुँच) देने से इनकार करना, विदेशी-नियंत्रित डिजिटल बुनियादी ढाँचे पर भारत की निर्भरता को उजागर करती हैं। इसने तकनीकी सुरक्षा, आर्थिक अनुकूलन तथा रणनीतिक स्वायत्तता संबंधी गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं।
निष्कर्षतः डिजिटलीकरण अब केवल एक संकीर्ण प्रौद्योगिकी का मुद्दा ही नहीं रह गया है अपितु यह भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रणनीतिक स्वायत्तता का मुख्य केंद्र बन गया है। जैसे-जैसे वैश्विक शक्ति की राजनीति तेजी से प्रौद्योगिकी के माध्यम से संचालित होती जा रही है, भारत को अपने डिजिटल भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए स्वदेशी नवाचार, निजी क्षेत्र की भागीदारी, विश्वसनीय साझेदारी तथा उच्च दर वाले अनुसंधान और विकास (R&D) मे की जाने वाले व्यय को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न. सॉफ्टवेयर-परिभाषित युद्ध और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के युग में, डिजिटल संप्रभुता प्राप्त करना अब भारत के लिए एक विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है। संबंधित चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए, तथा भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे को सुरक्षित करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति का सुझाव प्रस्तुत कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
<div class="new-fform">
</div>

Latest Comments