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Lokesh Pal
June 10, 2026 05:15
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लेख का तर्क है कि भारत आकांक्षाओं के संकट का नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता के संकट का सामना कर रहा है।
“यदि आप कड़ी मेहनत करेंगे, कौशल प्राप्त करेंगे और नियमों का पालन करेंगे, तो आपका जीवन आपके माता-पिता से बेहतर होगा।”
लेकिन पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण रोजगार न बनने के कारण युवाओं में निराशा बढ़ी।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: “सार्वजनिक परीक्षाओं में बार-बार होने वाली अनियमितताएँ और गुणवत्तापूर्ण रोजगार का अभाव केवल प्रशासनिक विफलताएँ नहीं हैं, बल्कि भारत के युवाओं के साथ हुए ‘सामाजिक अनुबंध’ के उल्लंघन का प्रतीक हैं।” इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा सुझाव दीजिए कि किस प्रकार इस गतिशीलता के संकट को जनसांख्यिकीय लाभांश में परिवर्तित किया जा सकता है। (15 अंक, 250 शब्द) |
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