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Lokesh Pal
May 09, 2026 05:00
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रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती, जिसे ‘रवींद्र जयंती’ (पोचिशे बोइशाख) के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, तथा टैगोर को भारत की सभ्यतावादी आत्मा की एक शाश्वत आवाज (timeless voice of India’s civilisational soul) बताया।
गांधी-टैगोर विवाद स्वस्थ लोकतांत्रिक असहमति को समझने के लिए एक आधार प्रदान करता है, जहाँ वैचारिक मतभेद भारत की प्रगति के लिए आपसी सम्मान और रचनात्मक आलोचना के साथ सह-अस्तित्व में थे।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: “चरखे’ पर महात्मा गांधी और टैगोर के बीच वैचारिक मतभेद उपयोगितावादी जन राजनीति तथा बौद्धिक व्यक्तिवाद के बीच एक गहन चर्चा को दर्शाते हैं।” स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) |
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