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Lokesh Pal
April 04, 2026 05:15
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सदियों तक, ‘चोक पॉइंट्स’ (choke points) केवल सैन्य रणनीति और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक ही सीमित थे। हालाँकि, 2025–26 के पश्चिम एशियाई संघर्षों ने इन्हें वैश्विक आर्थिक नीति के केंद्र में स्थापित कर दिया है; इससे यह स्पष्ट हुआ है कि आधुनिक शक्ति कुछ ऐसे संवेदनशील बिंदुओं पर निर्भर करती है, जहाँ उत्पन्न होने वाली कोई भी बाधा ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर विभिन्न समस्याएँ उत्पन्न कर सकती है।
| चोकपॉइंट | रणनीतिक भौगोलिक स्थिति | वैश्विक महत्व (2026) |
| होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) | फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। | वैश्विक तेल और LNG का 20% परिवहन करता है। यह वैश्विक ऊर्जा की “जीवन रेखा” है। |
| मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) | हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ता है। | विश्व का सबसे व्यस्त तेल मार्ग; वैश्विक शिपिंग का 1/3 हिस्सा यहाँ से गुजरता है और पूर्व एशिया के औद्योगिक केंद्रों को ऊर्जा प्रदान करता है। |
| बाब-अल-मंदेब (Bab-el-Mandeb) | लाल सागर का प्रवेश द्वार, जो स्वेज नहर से जुड़ा है। | यूरोप-एशिया व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण। यहाँ व्यवधान से मालभाड़ा दरें बढ़ती हैं और खाद्य सुरक्षा संबंधी खतरे उत्पन्न होता है। |
आधुनिक “चोकपॉइंट्स” अब केवल जल और भूमि से परिभाषित नहीं होते; वे औद्योगिक एकाग्रता और तकनीकी दुर्लभता से भी निर्धारित होते हैं।

रणनीतिक भेद्यता अब केवल मिसाइलों या समुद्री डकैती तक सीमित नहीं है; यह बढ़ते हुए पर्यावरणीय स्थिरता से भी जुड़ी हुई है।
ईरान युद्ध ने एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था को उजागर किया है जो संकीर्ण मार्गों और “जस्ट-इन-टाइम (Just-in-Time)” दक्षता पर आधारित है। लचीलापन बढ़ाने के लिए देश निम्नलिखित उपायों की ओर बढ़ रहे हैं:

डार्डनेल्स (प्रथम विश्व युद्ध) से लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ तक, यह तर्क लगातार प्रासंगिक है—भूगोल ही नियति है। आज, चोकपॉइंट्स केवल समुद्री मार्गों तक सीमित नहीं हैं; वे चिप फैब्रिकेशन (chip fabs) और समुद्र-तल केबल्स तक भी फैले हुए हैं, जहाँ विकल्पों की कमी उन्हें वैश्विक तनाव और वृद्धि के शक्तिशाली उत्प्रेरक बनाती है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: भौगोलिक चोकपॉइंट्स केवल वाणिज्यिक पारगमन मार्ग नहीं हैं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में महत्वपूर्ण रणनीतिक उपकरण भी हैं। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की बढ़ती उपस्थिति के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। भारत के संदर्भ में सक्रिय (proactive) उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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