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लूनर गवर्नेंस (चंद्रमा प्रशासन) में बहुपक्षवाद की आवश्यकता

Lokesh Pal April 22, 2026 05:00 5 0

संदर्भ:

आर्टेमिस II मिशन (Artemis II Mission) (2026), जिसे “मानवता की चंद्रमा पर वापसी” के रूप में प्रस्तुत किया गया है, एक ऐतिहासिक–आधुनिक विरोधाभास को दर्शाता है—यह वियतनाम युद्ध के दौरान अपोलो 8 मिशन (Apollo 8 Mission) के “अर्थराइज़ (Earthrise)” की गूंज जैसा है, जबकि आज के अनुष्ठान मध्य पूर्व के संघर्षों और कमजोर होती नियम-आधारित व्यवस्था के साथ एक साथ घटित हो रहे हैं।

नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का क्षरण

  • अमेरिकी दोहरे मापदंड की आलोचना: अंतरिक्ष मिशनों को “मानवता की उपलब्धि” के रूप में बढ़ावा देना, जबकि दूसरी ओर मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघन।
    • इन कार्रवाइयों में विधिक प्रक्रिया (Due Process) के बिना निर्वासन, वैश्विक संस्थानों को कमजोर करना, तथा व्यापक अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद सैन्य समर्थन जारी रखना शामिल है।
  • बहुपक्षीय संस्थानों का कमजोर होना: अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों अधिनियम के तहत लगाए गए शुल्क (टैरिफ) मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं।
    • विश्व व्यापार संगठन में अपीलीय निकाय के अवरुद्ध होने के कारण विवाद समाधान प्रणाली का ठहराव।
  • रणनीतिक स्व-हित की नीति: राष्ट्रीय हित का वैश्विक प्रतिबद्धताओं पर हावी होना, जिससे नेतृत्व की विश्वसनीयता में कमी आती है।

बहुपक्षीय शासन के पक्ष में तर्क

  • मानवता की साझा विरासत: UNCLOS (जिसका समर्थन अर्विड पार्डो (Arvid Pardo) ने किया था) के तहत अंतरराष्ट्रीय समुद्रों के शासन की तरह, चंद्रमा की सतह को एक “वैश्विक साझा संसाधन” के रूप में देखा जाना चाहिए और इसे निजी संपत्ति नहीं माना जाना चाहिए।
  • अंतरराष्ट्रीय संधियों का पुनर्जीवन: वर्ष 1967 की आउटर स्पेस संधि के सिद्धांतों (Outer Space Treaty) की ओर लौटने का आह्वान किया जा रहा है, जो अंतरिक्ष के राष्ट्रीय अधिग्रहण को निषिद्ध करती है, तथा वर्ष 1979 के मून एग्रीमेंट (Moon Agreement) को पुनर्जीवित करने का भी, ताकि संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
  • संयुक्त राष्ट्र को सशक्त बनाना: स्रोत सुझाव देता है कि संयुक्त राष्ट्र की बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोगों की समिति (COPUOS) को चंद्र गतिविधियों के शासन के लिए केंद्रीय निकाय होना चाहिए, ताकि अंतरिक्ष एक नए भू-राजनीतिक युद्धक्षेत्र में न बदल जाए।
  • विश्वास और पारदर्शिता: किसी एक देश के एकतरफा नियंत्रण की बजाय बहुपक्षवाद को प्राथमिकता दी जाती है; उदाहरण के लिए, अंतरिक्ष नीति में पारदर्शिता की कमी के कारण चीन को अमेरिका के एक अविश्वसनीय विकल्प के रूप में देखा जाता है।

विकसित होती अंतरिक्ष व्यवस्था में शासन संबंधी चुनौतियाँ

  • लूनर गोल्ड रश”: चंद्र संसाधनों (विशेष रूप से दक्षिणी ध्रुव पर विद्यमान जल-बर्फ, जो ईंधन और गहन अंतरिक्ष अभियानों के लिए उपयोगी है) के लिए बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा।
  • आर्टेमिस समझौतों से जुड़ी समस्याएँ: “सुरक्षा क्षेत्र” व्यवहार में वास्तविक बहिष्करण क्षेत्र बन सकते हैं।
    • दुर्लभ संसाधनों पर “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर नियंत्रण का जोखिम।
    • अंतरिक्ष संसाधन अधिकारों की अमेरिकी-केंद्रित व्याख्या का थोपना।
  • अंतरिक्ष एक भू-राजनीतिक युद्धक्षेत्र के रूप में: शीत युद्ध जैसी गतिशीलता के समान बढ़ती प्रतिद्वंद्विता।
    • पारदर्शिता को लेकर चिंताएँ (अमेरिका की) और उससे भी कम पारदर्शिता (चीन की), जिससे सहमति बनाना और जटिल हो जाता है।
  • बहुपक्षवाद को कमजोर करना: द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोगों की समिति (COPUOS) को दरकिनार करना।
    • चयनात्मक नियमों के बिना सार्वभौमिक सहमति के वैश्विक मानदंड बन जाने का जोखिम।

आगे की राह

  • बहुपक्षीय ढाँचे को बढ़ावा देना: अंतरिक्ष को “मानवता की साझा विरासत” के रूप में मानना, जो वैश्विक साझा संसाधन व्यवस्थाओं के समान हो, ताकि सामूहिक शासन सुनिश्चित किया जा सके।
  • वैश्विक संधियों को पुनर्जीवित करना: न्यायसंगत और नियम-आधारित शासन को सक्षम करने के लिए मून एग्रीमेंट (Moon Agreement) के साथ पुनः जुड़ाव स्थापित करना।
  • संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करना: अंतरिक्ष गतिविधियों के प्रभावी नियमन के लिए संयुक्त राष्ट्र की बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोगों की समिति (UNCOPUOS) को सशक्त बनाना।
  • समानता और समावेशिता सुनिश्चित करना: सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना तथा लाभों के न्यायसंगत वितरण संबंधी तंत्र स्थापित करना।
  • संसाधनों के एकाधिकार को रोकना: चंद्र संसाधनों को निजी या बहिष्करणीय क्षेत्रों में बदलने से बचना।
  • भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से बचना: सहयोगात्मक ढाँचों को बढ़ावा देना और प्रमुख शक्तियों (जैसे अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा) के प्रभुत्व को रोकना।
  • नेतृत्व को वैधता के साथ संरेखित करना: यह सुनिश्चित करना कि अंतरिक्ष संबंधी महत्वाकांक्षाएँ अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हों।

निष्कर्ष

अंतरिक्ष अन्वेषण अब भू-राजनीति बन चुका है, जहाँ आज के नियम मानवता के भविष्य को आकार दे रहे हैं। एक वैश्विक साझा संसाधन के रूप में, अंतरिक्ष को निजी संपत्ति नहीं बनना चाहिए। एक न्यायसंगत, समावेशी और बहुपक्षीय ढाँचा ही आगे बढ़ने का एकमात्र उचित और स्थायी मार्ग है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न: 

प्रश्न: बाह्य अंतरिक्ष का शासन वैज्ञानिक अन्वेषण के क्षेत्र से बदलकर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वाणिज्यिक संसाधन दोहन के मंच में परिवर्तित हो रहा है। इस संदर्भ में आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) जैसे द्विपक्षीय समझौतों की तुलना में एक व्यापक बहुपक्षीय ढाँचे की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

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