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Lokesh Pal
June 12, 2026 05:00
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विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और अन्य संस्थाओं द्वारा विदेशी धनराशि की प्राप्ति एवं उपयोग को विनियमित करता है। यह कानून मूल रूप से वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान लागू किया गया था, ताकि संगठनों को मिलने वाली बाह्य वित्तीय सहायता के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी प्रभाव को रोका जा सके।
सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए यह विधेयक प्रस्तुत किया है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि इससे नागरिक समाज संगठनों पर कार्यपालिका का नियंत्रण बढ़ता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: FCRA संशोधन विधेयक, 2026 भारत में नागरिक समाज के ‘विनियमन’ से ‘नियंत्रण’ की ओर एक प्रतिमान परिवर्तन को दर्शाता है। इसके संवैधानिक एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभावों के आलोक में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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