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Lokesh Pal
June 12, 2026 05:04
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भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हाल के वर्षों में तीव्र रूप से घटा है, जिससे इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह निवेशकों के कम विश्वास को दर्शाता है या फिर वैश्विक पूँजी प्रवाह के बदलते रुझानों को प्रतिबिंबित करता है।

भारत के FDI परिदृश्य का मूल्यांकन केवल सकल अंतःप्रवाह या घटते शुद्ध प्रवाह के आधार पर नहीं किया जा सकता है। वास्तविक चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी निवेश प्रौद्योगिकी सृजन, विनिर्माण विकास, रोजगार सृजन और सतत् बाह्य संतुलन में योगदान दे। भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति के लिए FDI की मात्रा से FDI की गुणवत्ता की ओर परिवर्तन आवश्यक है।
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