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संक्षेप में समाचार

Lokesh Pal May 11, 2026 03:54 14 0

जियोसेल 

सीएसआईआर–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और भारत पेट्रोलियम को अपशिष्ट प्लास्टिक द्वारा निर्मित तकनीक, टेक्सटाइल जियोसेल (Geocells) का उपयोग कर प्रथम सड़क अवरोध खंड के निर्माण हेतु स्वीकृति प्राप्त हुई है।

संबंधित तथ्य

  • यह परियोजना कठिन-प्रबंधन योग्य प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक पुनःउपयोग को सतत् सड़क अवसंरचना के रूप में प्रदर्शित करती है।
  • यह पहल चक्रीय अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थायी सड़क निर्माण के उद्देश्यों को समर्थन प्रदान करती है।

जियोसेल (Geocells) क्या हैं?

  • जियोसेल मधुमक्खी के छत्ते जैसी 3D कोशिकीय संरचनाएँ होती हैं, जिनका उपयोग मृदा को स्थिर करने तथा भूमि सतह को सुदृढ़ बनाने के लिए किया जाता है।
  • कार्य: ये मृदा, रेत अथवा एग्रीगेट्स को कोशिकाओं के भीतर सीमित रखती हैं, जिससे भार वितरण और संरचनात्मक स्थिरता में सुधार होता है।
  • उपयोग: सड़क निर्माण, ढाल संरक्षण, मृदा अपरदन नियंत्रण, तटबंधों तथा रिटेनिंग वॉल्स में व्यापक रूप से प्रयुक्त।
  • सामग्री: सामान्यतः उच्च घनत्व पॉलीएथिलीन (HDPE) अथवा पुनर्चक्रित प्लास्टिक जैसे पॉलिमरिक पदार्थों से निर्मित, जो सतत् अवसंरचना को बढ़ावा देते हैं।
  • लाभ: अधिक टिकाऊपन, कम मृदा अपरदन, न्यून रखरखाव लागत तथा सड़कों की आयु में वृद्धि सुनिश्चित करते हैं।

तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles) के बारे में

  • तकनीकी वस्त्र ऐसे विशेषीकृत कपड़े होते हैं, जिन्हें सौंदर्य के बजाय कार्यात्मक प्रदर्शन और औद्योगिक उपयोग के लिए विकसित किया जाता है।
  • उपयोग: अवसंरचना, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, रक्षा, परिवहन तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में प्रयुक्त।
  • विशेषताएँ: अत्यधिक मजबूती, स्थायित्त्व, लचीलापन, निस्पंदन, ऊष्मा एवं रसायन प्रतिरोध तथा इन्सुलेशन जैसी विशेषताओं से युक्त।
  • अवसंरचना में उपयोग: सड़कें, पुल, तटबंध, जियोसेल, जियोटेक्सटाइल तथा अपरदन नियंत्रण प्रणालियों में व्यापक उपयोग।
  • आर्थिक महत्त्व: इसे उच्च-विकास क्षेत्र माना जाता है, जो ‘मेक इन इंडिया’, सतत् अवसंरचना तथा उन्नत विनिर्माण को समर्थन प्रदान करता है।

रस्टी स्पॉटेड कैट 

दिल्ली-एनसीआर में पहली बार फरीदाबाद के अरावली क्षेत्र में एक ‘रस्टी स्पॉटेड कैट’ (Rusty-Spotted Cat) और उसके शावक की उपस्थिति दर्ज की गई है, जिससे संरक्षित क्षेत्रों के बाहर इसके प्रजनन की पुष्टि हुई है।

रस्टी स्पॉटेड कैट के बारे में

  • रस्टी स्पॉटेड कैट (Prionailurus Rubiginosus) विश्व की सबसे छोटी जंगली बिल्ली प्रजातियों में से एक है।
  • इसके अत्यंत छोटे आकार, फुर्ती और तीव्र गति के कारण इसे प्रायः बिल्लियों की हमिंगबर्ड’ कहा जाता है।
  • वितरण: यह भारत, नेपाल और श्रीलंका की मूल प्रजाति है।
    • इसकी वैश्विक आबादी का लगभग 80% भारत में पाया जाता है।
    • भारत में वितरण: यह प्रजाति तमिलनाडु से लेकर जम्मू-कश्मीर तक विस्तृत क्षेत्र में पाई जाती है, जिसमें मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं।
  • आवास: यह शुष्क पतझड़ी वनों, झाड़ीदार क्षेत्रों, चट्टानी भू-भाग, घासभूमियों तथा बढ़ते हुए मानव बस्तियों के निकट भी पाई जाती है।
  • भौतिक विशेषताएँ: इसका फर छोटा, लाल-धूसर रंग का होता है, जिस पर जंग जैसे धब्बे पाए जाते हैं। इसकी पूँछ घनी होती है।
  • व्यवहार: यह मुख्यतः निशाचर और अत्यंत संवेदनशील (शांत) स्वभाव की होती है। प्रायः संध्या और प्रातःकाल के समय सक्रिय रहती है।
    • छोटे आकार के बावजूद यह अत्यधिक फुर्तीली, आक्रामक शिकारी तथा उत्कृष्ट वृक्षारोही मानी जाती है।
  • संरक्षण स्थिति
    • IUCN रेड लिस्ट: निकट संकटग्रस्त (Near Threatened)
    • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I
    • CITES: परिशिष्ट-I (भारतीय आबादी) तथा परिशिष्ट-II (श्रीलंका एवं नेपाल की आबादी)।
  • खतरे: शहरीकरण, कृषि विस्तार, खनन तथा औद्योगिक विकास के कारण आवास विनाश इसका प्रमुख खतरा है।

TARA ग्लाइड वेपन सिस्टम

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) ने संयुक्त रूप से टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA) हथियार प्रणाली का पहला सफल परीक्षण किया है।

टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA) के बारे में

  • TARA भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जिसे रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद तथा अन्य DRDO प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है।
  • कार्य: यह पारंपरिक अनगाइडेड एरियल बमों को प्रिसिजन-गाइडेड वेपन में बदलता है, जिससे जमीनी लक्ष्यों पर सटीक हमला संभव होता है।
  • उद्देश्य: कम लागत वाले हवाई हथियारों की रेंज, सटीकता और मारक क्षमता को बढ़ाना, ताकि जमीनी लक्ष्यों पर अधिक प्रभावी हमला किया जा सके।
  • प्रौद्योगिकी: इसमें मॉड्यूलर रेंज-एक्सटेंशन किट का उपयोग किया जाता है, जो हथियार की रेंज, सटीकता और घातक क्षमता को बेहतर बनाती है।
    • मॉड्यूलर रेंज-एक्सटेंशन किट: यह एक ऐड-ऑन सिस्टम है, जिसे पारंपरिक बम, मिसाइल या आर्टिलरी के साथ जोड़ा जाता है, ताकि उसकी मारक दूरी बढ़ाई जा सके और सटीकता में सुधार हो।
  • महत्त्व: यह उन्नत हथियार प्रणालियों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है और कम लागत में सटीक हमले की क्षमता को बढ़ाता है।

ग्लाइड वेपन सिस्टम’ क्या है?

  • ‘ग्लाइड वेपन सिस्टम’ एक सटीक-निर्देशित हवाई हथियार है, जो किसी विमान से छोड़े जाने के बाद अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
  • पारंपरिक बमों के विपरीत, जो केवल गुरुत्वाकर्षण के कारण सीधे नीचे गिरते हैं, ग्लाइड वेपन लंबी दूरी तय कर सकते हैं और अधिक सटीकता के साथ लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं।
  • कार्यप्रणाली: इसमें मिसाइलों की तरह निरंतर प्रणोदन के बजाय पंखों, गाइडेंस सिस्टम और नेविगेशन तकनीक का उपयोग किया जाता है।
  • उपयोग: यह विमानों को अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश किए बिना, एक सुरक्षित दूरी से लक्ष्य पर सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करता है।

सोमनाथ अमृत पर्व 

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ अमृत पर्व के समापन समारोह में भाग लिया।

सोमनाथ अमृत पर्व के बारे में

  • सोमनाथ अमृत पर्व वर्ष 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष तथा 1026 ईसवी में महमूद गजनी के हिंसक और कुख्यात आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
  • स्थान: यह समारोह गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में आयोजित किया जा रहा है।
  • थीम एवं महत्त्व: यह पर्व आस्था, धैर्य, सांस्कृतिक निरंतरता और सभ्यतागत गौरव जैसे विषयों को प्रदर्शित करता है। यह भारत की विनाश से पुनर्निर्माण तक की यात्रा का प्रतीक माना जाता है।
  • मुख्य अनुष्ठान एवं कार्यक्रम: समारोहों में अतिरुद्र मंत्रोच्चार, महारुद्र यज्ञ, ओंकार जाप, शौर्य यात्रा, कुंभाभिषेक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष पूजाएँ शामिल हैं।
  • यह आयोजन विकास भी, विरासत भी’ की अवधारणा को भी बढ़ावा देता है, जिसका उद्देश्य विरासत संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना है।

सोमनाथ मंदिर के बारे में

  • स्थान: सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित प्रभास पाटन में स्थित है।
  • धार्मिक महत्त्व: यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसका उल्लेख शिव पुराण में मिलता है।
  • साहस और आस्था का प्रतीक: यह मंदिर सदियों में कई बार नष्ट और पुनर्निर्मित किया गया, जिसके कारण यह आस्था, सांस्कृतिक निरंतरता और सभ्यतागत धैर्य का प्रतीक बन गया।
    • पहला प्रमुख दर्ज आक्रमण 1026 ईसवी में महमूद गजनी द्वारा किया गया था, जिसके बाद मंदिर का कई बार पुनरुद्धार किया गया।
  • पुनर्निर्माण: स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसके पुनर्निर्माण की पहल की और वर्ष 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया।
  • वास्तुकला: मंदिर का निर्माण कैलाश महामेरु प्रसाद शैली में किया गया है। इसमें लगभग 150 फीट ऊँचा शिखर, अरब सागर की ओर मुख वाला ढाँचा तथा भव्य मंडप हैं।
    • कैलाश महामेरु प्रसाद शैली: यह एक विशिष्ट हिंदू मंदिर वास्तुकला शैली है, जो मुख्यतः गुजरात और पश्चिमी भारत में विकसित हुई चालुक्य/सोलंकी परंपरा से संबंधित है।
    • वास्तुशैली: यह उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की व्यापक नागर शैली का हिस्सा मानी जाती है।

बिलकान 1 (B1) पुल

ईरान का बिलकान 1 (B1) पुल, जो अप्रैल 2026 के हमलों में क्षतिग्रस्त हो गया था, आज ईरानी दृढ़ता और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की पहचान बन चुका है।

बिलकान 1 (B1) पुल के बारे में

  • स्थान: यह पुल ईरान के करज (Karaj) शहर में स्थित है, जो तेहरान से लगभग 35 किमी. दक्षिण-पश्चिम में है।
  • क्षेत्रीय महत्त्व: इसे फारस की खाड़ी क्षेत्र का सबसे ऊँचा पुल तथा एक प्रमुख परिवहन गलियारा माना जाता है।
    • यह तेहरान को उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से जोड़ता है, जहाँ बड़ी संख्या में अजेरी (Azeri) आबादी निवास करती है।
  • कनेक्टिविटी में भूमिका: यह पुल तेहरान को कजविन (Qazvin), तबरीज (Tabriz), कैस्पियन क्षेत्र तथा रूस और मध्य एशिया की ओर जाने वाले व्यापारिक मार्गों से जोड़ता है।
  • रणनीतिक महत्त्व: इसे उद्योग, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संपर्क को समर्थन देने वाले एक महत्त्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढाँचे के रूप में देखा जाता है।
  • प्रतीकात्मक महत्त्व: हमले के बाद यह पुल ईरान में राष्ट्रीय प्रतिरोध, धैर्य और पुनर्निर्माण का प्रतीक बन गया।
  • पुनर्निर्माण प्रयास: ईरानी अधिकारियों ने स्थानीय इंजीनियरों और स्वदेशी सामग्री की सहायता से इसके त्वरित पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया।

सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक

हाल ही में देश भर के स्मार्टफोनों पर तेज अलार्म और कंपन के साथ ‘अत्यंत गंभीर चेतावनी’ (Extremely Severe Alert) संदेश दिखाई दिया। यह सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के माध्यम से सचेत (SACHET) आपातकालीन अलर्ट प्रणाली के राष्ट्रव्यापी परीक्षण का हिस्सा था।

  • वर्तमान में भारत सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SMS आधारित आपदा चेतावनी प्रणाली संचालित करता है, जिसके माध्यम से 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में अब तक 134 अरब से अधिक अलर्ट जारी किए जा चुके हैं।

सचेत (SACHET) के बारे में

  • सचेत (SACHET) भारत की एकीकृत चेतावनी प्रणाली है, जिसे राष्ट्रीय आपदा चेतावनी मंच भी कहा जाता है। इसका उद्देश्य आपदाओं और आपात स्थितियों से संबंधित चेतावनियों का वास्तविक समय प्रसार करना है।

सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के बारे में

  • परिभाषा: सेल ब्रॉडकास्ट एक दूरसंचार तकनीक है, जिसका उपयोग किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में स्थित मोबाइल टॉवरों से जुड़े सभी मोबाइल फोनों पर एक साथ आपातकालीन संदेश भेजने के लिए किया जाता है।
  • नोडल मंत्रालय: संचार मंत्रालय (भारत सरकार)।
  • ऐतिहासिक विकास: इस तकनीक को 1990 के दशक की शुरुआत में यूरोपियन टेलीकम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स इंस्टिट्यूट (ETSI) द्वारा विकसित किया गया था। इसका पहला प्रदर्शन वर्ष 1997 में पेरिस में किया गया था।

सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक की प्रमुख विशेषताएँ

  • त्वरित और विश्वसनीय जनसंचार 
    • संदेश कुछ ही सेकंड में लाखों उपयोगकर्ताओं तक एक साथ पहुँच जाते हैं।
    • नेटवर्क पर अधिक दबाव होने की स्थिति में भी अलर्ट कार्य करते हैं, जिससे आपातकाल में संचार बाधित नहीं होता।
  • मजबूत दृश्यता और ध्यान आकर्षण प्रणाली
    • कई उपकरणों में अलर्ट, टोन और कंपन साइलेंट, लॉक्ड या डू नॉट डिस्टर्ब (Do-Not-Disturb) सेटिंग को भी ओवरराइड कर सकते हैं।
    • पॉप-अप सूचनाएँ तब तक स्क्रीन पर बने रहती हैं, जब तक उपयोगकर्ता उन्हें स्वीकार न कर ले।
    • अलर्ट चल रही गतिविधियों, यहाँ तक कि फोन कॉल्स को भी बाधित कर सकते हैं।
  • भौगोलिक और भाषायी लचीलापन
    • चेतावनियों को किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित किया जा सकता है या आवश्यकता पड़ने पर पूरे देश में जारी किया जा सकता है।
    • उपयोगकर्ता की भाषा प्राथमिकताओं के अनुसार अलर्ट कई भाषाओं में भेजे जा सकते हैं।
  • गोपनीयता-अनुकूल और सुलभ प्रणाली
    • इसमें किसी व्यक्तिगत डेटा, फोन नंबर या उपयोगकर्ता की लोकेशन जानकारी की आवश्यकता नहीं होती है।
    • अलर्ट प्राप्त करने के लिए किसी ऐप, पंजीकरण या सदस्यता की आवश्यकता नहीं होती है।
    • फोन चालू होने और आपातकालीन अलर्ट सक्षम होने पर संदेश स्वतः प्राप्त हो जाते हैं।
  • उच्च-जोखिम वाली आपात स्थितियों में उपयोग 
    • इसकी अत्यधिक प्रभावशाली प्रकृति के कारण इस प्रणाली का उपयोग मुख्यतः बड़ी आपदाओं में किया जाता है, जैसे: भूकंप, अचानक बाढ़, भूस्खलन, हिमनदीय झील विस्फोट तथा बाँध टूटना।

सेल ब्रॉडकास्ट और SMS अलर्ट के मध्य अंतर

  • संचार और वितरण तंत्र: CB एक ‘वन-टू-मेनी’ (एक-से-अनेक) तकनीक है जो विशिष्ट सेल टावरों से जुड़े सभी उपकरणों को एक साथ एक ही संदेश भेजती है।
    • SMS एक ऐसी प्रणाली है, जो विशिष्ट फोन नंबरों पर व्यक्तिगत संदेश भेजती है।
  • भौगोलिक लक्ष्यीकरण एवं गोपनीयता: सेल ब्रॉडकास्ट (CB), फोन नंबर या डिवाइस पंजीकरण की आवश्यकता के बिना, ग्राहक के स्थान और संबंधित टावर के आधार पर अलर्ट भेजता है, जो इसे SMS की तुलना में अधिक स्थान-विशिष्ट और गोपनीयता के अनुकूल बनाता है।
  • पहुँच और सुलभता: सेल ब्रॉडकास्ट कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक पहुँच सकता है, जिनमें प्रभावित क्षेत्र में मौजूद आगंतुक और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। यदि सक्षम हो, तो यह कई भाषाओं में अलर्ट भेज सकता है।
  • दृश्यता और तात्कालिकता: सामान्य SMS अलर्ट के विपरीत, सेल ब्रॉडकास्ट चेतावनियाँ तेज ध्वनि, कंपन और पॉप-अप नोटिफिकेशन के रूप में दिखाई देती हैं, जिससे उन्हें नजरअंदाज करना कठिन होता है।

सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक की कार्यप्रणाली 

  • नियमित ‘टॉवर-टू-फोन’ संचार: मोबाइल टॉवर अपने कवरेज क्षेत्र में मौजूद फोनों से लगातार संपर्क बनाए रखते हैं। इस दौरान वे नेटवर्क पहचान और कनेक्शन संबंधी तकनीकी जानकारी प्रसारित करते हैं, जो सामान्यतः उपयोगकर्ताओं को दिखाई नहीं देती हैं।
  • वन-वे सेल ब्रॉडकास्ट’ तकनीक: टॉवर से मोबाइल फोन तक होने वाले इस एक-तरफा संचार को सेल ब्रॉडकास्ट कहा जाता है। इसी तकनीक का उपयोग सरकारी एजेंसियाँ आपातकालीन चेतावनी जारी करने के लिए करती हैं।
  • एक साथ और क्षेत्र-विशिष्ट अलर्ट एक मोबाइल टॉवर से एक ही संदेश सभी जुड़े हुए फोनों पर एक साथ प्रसारित किया जाता है। इससे तेज, बिना नेटवर्क जाम के और क्षेत्र-विशिष्ट आपातकालीन चेतावनियाँ जारी करना संभव होता है।

सेल ब्रॉडकास्ट आधारित आपातकालीन चेतावनी प्रणाली का उपयोग करने वाले देश

  • जापान इस तकनीक को अपनाने वाले शुरुआती देशों में शामिल था। उसने वर्ष 2007 में J-Alert प्रणाली शुरू की, जिसका उपयोग भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट और मिसाइल खतरों के लिए किया जाता है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने वर्ष 2012 में तारविहीन आपातकालीन चेतावनी (WEA) प्रणाली शुरू की।
  • कई यूरोपीय संघ देशों ने वर्ष 2018 के निर्देश के बाद ईयू-चेतावनी ढाँचा के अंतर्गत सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली अपनाई, जिसमें वर्ष 2022 तक सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली अनिवार्य की गई थी।
  • दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, कनाडा, न्यूजीलैंड और चिली ने भी वनाग्नि, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रसारण-आधारित चेतावनी प्रणालियाँ लागू की हैं।

इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट 2.0

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (International Financial Services Centres Authority- IFSCA) और भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry- FICCI) के साथ मिलकर गुजरात के गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) में दूसरे इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट’ (IALFS 2.0) का आयोजन किया।

शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु

  • एविएशन फाइनेंस हब’ के रूप में भारत: भारत का लक्ष्य न केवल एक प्रमुख विमानन बाजार के रूप में उभरना है, बल्कि एक ग्लोबल एविएशन फाइनेंसिंग एंड लीजिंग हब’ के रूप में भी विकसित होना है।
  • वाणिज्यिक बेड़े का तेजी से विस्तार: भारत के वाणिज्यिक बेड़े के वर्ष 2027 तक 1,100 विमानों और वर्ष 2035 तक 2,250 से अधिक विमानों तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि भारतीय एयरलाइंस वर्तमान में 1,640 विमानों की डिलीवरी की प्रतीक्षा कर रही हैं।
  • लीजिंग बाजार का अवसर: बेड़े के अनुमानित विस्तार से अगले दशक में भारत के विमान लीजिंग पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अनुमानित 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर (USD) का अवसर उत्पन्न होगा।
  • विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण अधिनियम, 2025 (Protection of Interests in Aircraft Objects Act, 2025): इस अधिनियम को एक प्रमुख सुधार के रूप में रेखांकित किया गया।
    • PIAO को भारत के कानूनी ढाँचे को ‘केप टाउन कन्वेंशन’ के अनुरूप बनाने और पट्टादाताओं के विमान वापस लेने के अधिकारों को मजबूत करने के लिए अधिनियमित किया गया था।
    • वर्ष 2001 में अपनाया गया केप टाउन कन्वेंशन, एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य उच्च मूल्य वाली मोबाइल परिसंपत्तियों, विशेष रूप से विमानों की लीजिंग, वित्तपोषण और उनकी रिकवरी से संबंधित नियमों का मानकीकरण करना है।
  • सरकारी सहायता उपाय: सरकार ने एयरलाइंस के लिए कई सहायता उपायों की घोषणा की:-
    • एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में वृद्धि पर 25% की सीमा।
    • लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25% की कटौती।
    • एयरलाइन लिक्विडिटी का समर्थन करने के लिए ₹5,000 करोड़ की क्रेडिट लाइन गारंटी योजना।
  • GIFT IFSC पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना: गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (GIFT IFSC) को मजबूत करने के लिए टैक्स हॉलिडे विस्तार, सिंगल-विंडो सूचना प्रौद्योगिकी (IT) प्रणाली और विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) संरचनाओं जैसे सुधारों पर जोर दिया गया।
  • IFSCA और FICCI के बीच समझौता ज्ञापन: GIFT IFSC को एक ग्लोबल एविएशन फाइनेंसियल हब के रूप में बढ़ावा देने के लिए IFSCA और FICCI के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) के बारे में

  • गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) भारत की पहली परिचालन ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) है, जो गुजरात के गांधीनगर-अहमदाबाद में स्थित है।
    • गुजरात सरकार द्वारा विकसित इस परियोजना का उद्देश्य वित्तीय सेवाओं, फिनटेक और विमानन वित्त के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरना है।

GSVA संकलन दिशा-निर्देश

केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने भारत के राष्ट्रीय खातों के आधार वर्ष (Base Year) को वर्ष 2011-12 से बदलकर वर्ष 2022-23 करने के बाद, आधार वर्ष 2022-23 के साथ सकल राज्य मूल्य वर्द्धित (GSVA) अनुमानों के संकलन के लिए ‘यूनिफॉर्म गाइडलाइन’ जारी की है।

सकल राज्य मूल्य वर्द्धित (GSVA) के बारे में

  • सकल राज्य मूल्य वर्द्धित (GSVA) मध्यवर्ती उपभोग को घटाने के बाद किसी राज्य के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापता है।
    • यह सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का मुख्य घटक है।
    • GSDP = GSVA + उत्पादों पर शुद्ध कर

GSVA संकलन दिशा-निर्देशों पर मुख्य बिंदु

  • आधार वर्ष के संशोधन की आवश्यकता
    • डेटा एकीकरण का विस्तार: बेहतर कवरेज और विश्वसनीयता के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड, सर्वेक्षणों और क्षेत्रीय डेटाबेस का अधिक उपयोग।
    • कार्य प्रणाली में सुधार: उभरते सेवा क्षेत्रों और गैर-निगमित उद्यमों को शामिल करने के लिए अनुमान पद्धतियों को अपडेट करना।
    • राष्ट्रीय योगों के साथ संरेखण: राज्य और राष्ट्रीय आय अनुमानों के बीच निरंतरता सुनिश्चित करना।
    • प्रथाओं का मानकीकरण: राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपने GSDP अनुमानों को नए आधार वर्ष के साथ संरेखित करेंगे।
  • GSDP का महत्त्व
    • GSDP राज्यों के आर्थिक प्रदर्शन का प्राथमिक संकेतक है।
    • यह क्षेत्रक विकास (Sectoral Growth), औद्योगिक उत्पादन और क्षेत्रीय विकास (Regional Development) के आकलन में मदद करता है।
    • यह राजकोषीय योजना, बजट बनाने, कर संग्रह और प्रतिस्पर्द्धी संघवाद (Competitive Federalism) का समर्थन करता है।
  • GSDP संकलन का वर्तमान दायरा: वर्तमान में, लक्षद्वीप और दादर एवं नागर हवेली तथा दमन एवं दीव (DNH&DD) को छोड़कर, 34 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश, आधार वर्ष 2011-12 के साथ GSDP अनुमान संकलित कर रहे हैं।
  • वर्ष 2022-23 शृंखला में संक्रमण: MoSPI सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को नए आधार वर्ष 2022-23 की शृंखला के अंतर्गत लाने के प्रयास कर रहा है।

ISO अंतरराष्ट्रीय; उप-समिति बैठकें

भारत ने नई दिल्ली में पहली बार ‘अंतरिक्ष प्रणाली और संचालन’ (Space Systems and Operations) पर ISO TC 20/SC 14 की ‘35वीं प्लेनरी एंड वर्किंग ग्रुप्स’ की बैठकों की मेजबानी की।

  • इन बैठकों का आयोजन भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) द्वारा किया गया था।

ISO TC 20/SC 14 के बारे में

  • परिचय: ISO TC 20/SC 14 अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) के तहत एक उपसमिति है, जो अंतरिक्ष प्रणालियों और संचालन के मानकों से संबंधित है।
  • अधिदेश: यह अंतरिक्ष प्रणालियों के डिजाइन, परीक्षण, संचालन, अंतर-संचालनीयता और सुरक्षा के लिए वैश्विक तकनीकी मानक विकसित करती है।
  • सदस्यता संरचना: ISO के 177 सदस्य हैं, जिसमें प्रत्येक देश का प्रतिनिधित्व केवल एक राष्ट्रीय मानक निकाय करता है।

अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (International Organization for Standardization- ISO) के बारे में

  • अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय निकाय है, जो विश्व स्तर पर स्वीकृत मानक विकसित करता है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1947 में हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
  • ISO का उद्देश्य उद्योगों में निम्नलिखित सुनिश्चित करना है:
    • गुणवत्ता
    • सुरक्षा
    • दक्षता
    • अंतर-संचालनीयता (Interoperability)।
  • इसमें 160 से अधिक देशों के राष्ट्रीय मानक-निर्धारण निकाय शामिल हैं।
  • ISO मानक निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर करते हैं:-
    • प्रौद्योगिकी
    • विनिर्माण
    • स्वास्थ्य सेवा
    • खाद्य सुरक्षा
    • पर्यावरण प्रबंधन।
  • महत्त्वपूर्ण मानकों में शामिल हैं:-
    • ISO 9001 – गुणवत्ता प्रबंधन
    • ISO 14001 – पर्यावरण प्रबंधन
  • भारत में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ISO की गतिविधियों में देश का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत के लिए महत्त्व

  • बढ़ती वैश्विक भूमिका: यह वैश्विक अंतरिक्ष शासन और मानक-निर्धारण में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
  • निजी क्षेत्र को बढ़ावा: यह भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियों को वैश्विक मानकों के साथ सामंजस्य स्थापित करने में मदद करता है, जिससे नवाचार, प्रतिस्पर्द्धात्मकता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच में सुधार होता है।

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