Q. क्या सार्वभौमिक बुनियादी आय नागरिकों को वित्तीय स्वायत्तता सुनिश्चित करके सशक्त बनाएगी, या इससे वित्तीय तनाव और निर्भरता बढ़ेगी? अपने विचारों की पुष्टि कीजिए? (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • UBI नागरिकों को सशक्त बना रहा है, वित्तीय स्वायत्तता सुनिश्चित कर रहा है।
  • इससे राजकोषीय तनाव किस प्रकार बढ़ता है?

उत्तर

सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें प्रत्येक नागरिक को नियमित रूप से बिना किसी शर्त के नकद सहायता दी जाती है ताकि उसे आर्थिक सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित हो सके। भारत जैसे देश में, जहाँ कल्याणकारी योजनाएँ बिखरी हुई हैं और आर्थिक असमानता बढ़ रही है, UBI एक सरल, अधिकार-आधारित सामाजिक सुरक्षा मॉडल प्रस्तुत करता है। हालाँकि यह नागरिक सशक्तिकरण का वादा करता है, लेकिन इससे राजकोषीय बोझ और संरचनात्मक चुनौतियाँ भी उत्पन्न होती हैं।

UBI से नागरिकों को वित्तीय स्वायत्तता और सशक्तिकरण के माध्यम से मिलने वाले लाभ

  • गरीबी और असमानता में कमी: UBI प्रत्येक नागरिक को स्थायी आय का आधार प्रदान करता है, जिससे संपत्ति और आय की असमानता घटती है।
    • उदाहरण: वर्ल्ड इनइक्वालिटी डेटाबेस (वर्ष 2023) के अनुसार भारत की संपत्ति गिनी असमानता 75 है, जहाँ शीर्ष 1% के पास 40% धन है।
  • आर्थिक सुरक्षा और गरिमा का संवर्धन: प्रत्यक्ष नकद अंतरण नौकरशाही बाधाओं को हटाकर नागरिकों को वित्तीय स्थिरता और आत्मसम्मान प्रदान करता है।
    • उदाहरण: मध्य प्रदेश में सेवा (SEWA) के UBI पायलट (वर्ष 2011–13) ने पोषण, शिक्षा और आय स्तरों में सुधार दिखाया।
  • असंगठित और गिग कार्यबल के लिए सहारा: UBI स्वचालन और अनियमित आय से होने वाले झटकों से आय की निरंतरता प्रदान करता है।
    • उदाहरण: गिग वर्कर कम मांग के समय भी आवश्यक वस्तुएँ खरीदने में सक्षम रहेंगे।
  • महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा: UBI बिना शर्त नकद हस्तांतरण के माध्यम से महिलाओं को निर्णय लेने की स्वतंत्रता देता है और अवैतनिक देखभाल कार्य को मान्यता देता है।
    • उदाहरण: SEWA के अध्ययन में पाया गया कि महिलाओं ने आय मिलने पर बच्चों की शिक्षा और पोषण पर अधिक खर्च किया।
  • लोकतंत्र और जवाबदेही को मज़बूत करता है: UBI राजनीतिक “फ्रीबी संस्कृति” को कम कर अधिकार-आधारित शासन की दिशा में बदलाव लाता है।
    • उदाहरण: यह “लाभ के बदले वोट” की मानसिकता को “अच्छे शासन की माँग” में बदल सकता है।

UBI से उत्पन्न राजकोषीय और संरचनात्मक चिंताएँ 

  • उच्च राजकोषीय बोझ: सभी नागरिकों को शामिल करने पर इसकी लागत भारत के GDP का लगभग 5% हो सकती है।
    • उदाहरण: यदि प्रति व्यक्ति ₹7,620 वार्षिक दिया जाए तो सरकार को बड़े पैमाने पर वित्तीय पुनर्विन्यास करना पड़ेगा।
  • संभावित मुद्रास्फीति का खतरा: उत्पादन बढ़ाए बिना अधिक नकद प्रवाह से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
    • उदाहरण: विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय मुद्रास्फीति की संभावना बढ़ जाती है।
  • श्रम प्रोत्साहन में कमी: नियमित आय मिलने से कुछ लोगों में काम करने की प्रवृत्ति घट सकती है।
    • उदाहरण: युवा वर्ग निम्न-वेतन नौकरियों से दूर रह सकता है यदि निश्चित आय सुनिश्चित हो।
  • संसाधनों का गलत आवंटन: UBI की सार्वभौमिकता के कारण धनी वर्ग भी लाभान्वित होगा, जिससे पुनर्वितरण की क्षमता घटेगी।
    • उदाहरण: अमीर परिवारों को भी यह राशि मिलने से वित्तीय दक्षता प्रभावित होगी।
  • प्रशासनिक और तकनीकी बाधाएँ: डिजिटल अवसंरचना की कमी के कारण दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में लाभ पहुँचाना चुनौतीपूर्ण होगा।

निष्कर्ष

UBI नागरिकों को वित्तीय स्वायत्तता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है, यदि इसे राजकोषीय विवेक और चरणबद्ध रणनीति के साथ लागू किया जाए। प्रारंभिक चरण में इसे महिलाओं, वृद्धों और असंगठित श्रमिकों के लिए शुरू किया जा सकता है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश के साथ जोड़े जाने पर UBI स्वायत्तता और जवाबदेही का संतुलन बनाकर समावेशी कल्याण की दिशा में एक आधुनिक कदम सिद्ध हो सकता है।

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