Q. एक्ट ईस्ट पॉलिसी भारत के इंडो-पैसिफिक विजन के साथ तेजी से जुड़ रही है। हाल ही में भारत-मलेशिया की आर्थिक और रणनीतिक पहलों के माध्यम से इस संबंध का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • आर्थिक पहलों के माध्यम से संबंध विस्तार की चर्चा कीजिए।।
  • रणनीतिक पहलों के माध्यम से संबंध विस्तार का उल्लेख कीजिए।
  • भारत-मलेशिया के माध्यम से ‘एक्ट ईस्ट’-‘इंडो-पैसिफिक’ अभिसरण के विस्तार में चुनौतियों का उल्लेख कीजिए। 

उत्तर

भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (AEP) और ‘हिंद-प्रशांत दृष्टि’ रणनीतिक प्रयासों के रूप में तेजी से एक-दूसरे के समीप आ रहे हैं। मलेशिया के साथ हालिया आर्थिक और सुरक्षा सहयोग इस बात का उदाहरण है कि कैसे दक्षिण-पूर्व एशिया, भारत के क्षेत्रीय संबंधों और उसके व्यापक हिंद-प्रशांत दृष्टि दोनों के केंद्र में है।

मुख्य भाग

आर्थिक पहलों के माध्यम से संबंध विस्तार

  • डिजिटल और तकनीकी एकीकरण: आर्थिक सहयोग में अब डिजिटल बुनियादी ढाँचा और सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन शामिल हैं, जो आपसी निर्भरता में वृद्धि करते हैं।
    • उदाहरण: मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद और सेमीकंडक्टर सहयोग मलेशिया की ‘पैकेजिंग’ विशेषज्ञता को भारत के ‘डिजाइन’ इकोसिस्टम के साथ जोड़ते हैं।
  • वित्तीय कनेक्टिविटी और लचीलापन: INR-MYR (रुपया-रिंगिट) व्यापार और सीमा पार डिजिटल भुगतान को सक्षम करने के प्रयास पारंपरिक प्रेषण चैनलों पर निर्भरता कम करते हैं।
    • उदाहरण: मलेशिया के PayNet के साथ UPI का एकीकरण निर्बाध भुगतान की सुविधा प्रदान करता है, जिससे आर्थिक संबंध मजबूत होते हैं।
  • साझा प्रतिभा विकास: कार्यबल विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ना, दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग का बढ़ावा देता है।
    • उदाहरण: एडवांस्ड सेमीकंडक्टर एकेडमी (मलेशिया) और आईआईटी-मद्रास ग्लोबल के बीच सहयोग एक साझा प्रतिभा-भंडार (talent pool) के निर्माण को प्रोत्साहित करता है।
  • SME प्रतिस्पर्धात्मकता: स्थानीय मुद्रा में व्यापार लागत को कम कर सकता है और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए बाजार तक पहुँच बढ़ा सकता है।
    • उदाहरण: भारतीय वस्त्र मलेशिया में अधिक किफायती होते हैं, जिससे व्यापक व्यावसायिक एकीकरण होता है।
  • पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क: बेहतर विमान कनेक्टिविटी और छात्रवृत्तियाँ निरंतर सामाजिक-आर्थिक संबंधों का निर्माण करती हैं।

रणनीतिक पहलों के माध्यम से संबंध निर्माण

  • रक्षा सहयोग और संयुक्त अभ्यास: समुद्री तैनाती और अभ्यास साझा हिंद-प्रशांत सुरक्षा हितों की पुष्टि करते हैं।
    • उदाहरण: ‘हरिमऊ शक्ति’ अभ्यास मलक्का जलडमरूमध्य में रक्षा सहयोग को रेखांकित करता है।
  • रणनीतिक मामला कार्य समूह (Strategic Affairs Working Group): संस्थागत तंत्र रणनीतिक संवाद और परिचालन संरेखण को बढ़ावा देते हैं।
  • Su-30 फोरम: रखरखाव और इंटरऑपरेबिलिटी (अंतःक्रियाशीलता) के लिए साझा मंच रक्षा संबंधों को मजबूत करते हैं।
    • उदाहरण: रूसी मूल के सुखोई जेट विमानों के लिए समर्पित फोरम।
  • समुद्री सुरक्षा संकेत: हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा में भागीदारी साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है।
    • उदाहरण: संयुक्त गश्त प्रणाली महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों की साझा सुरक्षा प्रदर्शित करती है।
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग: मलेशिया द्वारा आतंकवाद पर कार्य समूहों की मेजबानी क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना को संरेखित करती है।

भारत-मलेशिया के माध्यम से ‘एक्ट ईस्ट’-’इंडो पैसिफिक’ अभिसरण के विस्तार में चुनौतियाँ

  • आसियान (ASEAN) देशों द्वारा रणनीतिक संतुलन-नीति: मलेशिया सहित आसियान देश महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता के बीच अपनी स्वायत्तता बनाए रखने के लिए, किसी एक पक्ष के साथ सीधे जुड़ाव से बचते हैं।
  • आर्थिक विषमता और असमान क्षमताएँ: औद्योगिक गहनता और बुनियादी ढाँचागत अंतराल पूर्ण पैमाने पर आर्थिक एकीकरण को सीमित करते हैं।
  • आसियान केंद्रीयता बनाम इंडो-पैसिफिक मिनीलेटरलिज्म: भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति तेजी से ‘मिनीलेटरल्स’ (जैसे- Quad) का उपयोग करती है, जो आसियान-नेतृत्व वाले तंत्र को कमजोर कर सकती है।
  • समुद्री सुरक्षा संवेदनशीलता: विस्तारित रक्षा सहयोग क्षेत्रीय समुद्री मार्गों के सैन्यीकरण की चिंता उत्पन्न कर सकता है।
  • कार्यान्वयन और संस्थागत विलंब: कई संवाद मौजूद हैं, लेकिन नौकरशाही शिथिलता के कारण उन्हें परिणामों में बदलने की गति धीमी है।

निष्कर्ष

भारत-मलेशिया साझेदारी दर्शाती है कि कैसे ‘एक्ट ईस्ट नीति’ परस्पर आर्थिक और सुरक्षा पहलों के माध्यम से भारत के ‘हिंद-प्रशांत दृष्टि’ के एक आधारभूत स्तंभ के रूप में विकसित हो रही है। इस अभिसरण को बनाए रखने के लिए, भारत को आसियान ढाँचे के भीतर बहुपक्षीय संबंधों को गहरा करना चाहिए, आपूर्ति-शृंखला लचीलेपन में वृद्धि तथा एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत के लिए आर्थिक एवं रक्षा सहयोग को संस्थागत बनाना चाहिए।

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