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उत्तर:
दृष्टिकोण:
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परिचय:
भारतीय संघवाद, जिसकी विशेषता राज्यों को सौंपी गई कुछ शक्तियों के साथ एक मजबूत संघ सरकार है, को देश की विशाल विविधता को समायोजित करने के लिए विनिर्मित किया गया है। भारत में क्षेत्रवाद इसी विविधता से उभरता है, जो अक्सर राजनीतिक स्वायत्तता, आर्थिक विकास या सांस्कृतिक संरक्षण की मांग के रूप में प्रकट होता है।
मुख्य विषयवस्तु:
क्षेत्रवाद, एक शक्तिशाली और बहुआयामी अवधारणा है, जो विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की आकांक्षाओं और हितों को प्रतिबिंबित करती है, विशेषकर भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में। यह एक ऐसी भावना है जो लोगों को समान भाषा, संस्कृति, जातीयता या इतिहास के आधार पर एक सूत्र में बांधती है। हालांकि यह अवधारणा भारतीय संघवाद के ढांचे पर एकजुट और विभाजनकारी दोनों प्रभाव डाल सकती है।
संघवाद को सशक्त करना:
कमज़ोर होता संघवाद:
निष्कर्ष:
भारत में क्षेत्रवाद दोधारी तलवार है। हालांकि इसमें स्थानीय मुद्दों पर प्रतिनिधित्व और ध्यान सुनिश्चित करके संघवाद को सुदृढ़ करने की क्षमता है, किन्तु अगर इसे संतुलित दृष्टिकोण के साथ प्रबंधित नहीं किया गया तो यह राष्ट्रीय एकता और स्थिरता को भी चुनौती दे सकता है। कुल मिलाकर कुंजी क्षेत्रीय विविधता को एक ताकत के रूप में अपनाने, क्षेत्रीय आकांक्षाओं को राष्ट्रीय ढांचे के भीतर एकीकृत करने और सभी क्षेत्रों में समान विकास सुनिश्चित करने में निहित है। यह दृष्टिकोण न केवल संघीय ढांचे को संरक्षित करेगा बल्कि व्यापक राष्ट्रीय विकास के लिए भारत के विविध क्षेत्रों की क्षमता का भी उपयोग करेगा।
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