प्रश्न की मुख्य माँग
- हीटवेव के कारणों की चर्चा कीजिए।
- हीटवेव के प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
- हीट एक्शन प्लान (HAPs) की संरचनात्मक सीमाओं को रेखांकित कीजिए।
- संकट को कम करने के लिए व्यापक उपाय सुझाइए।
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उत्तर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जब मैदानी क्षेत्रों का तापमान 40°C से अधिक हो जाए या सामान्य से काफी अधिक विचलन प्रदर्शित करे, तो यह स्थिति हीटवेव कहलाती है। प्रतिष्ठित जर्नल लैंसेट के अनुसार, वर्ष 2024 में हीटवेव के कारण 247 अरब कार्यशील-घंटों की क्षति हुई, जो एक गहरे सामाजिक-आर्थिक संकट को दर्शाता है।
हीटवेव के कारण
- जलवायु संबंधी कारक: वैश्विक तापमान में वृद्धि और अल-नीनो जैसी घटनाएँ मानसून-पूर्व गर्मी की तीव्रता को बढ़ाती हैं।
- उदाहरण: अल नीनो के अनुगामी प्रभाव गर्मी की तीव्रता बढ़ाते हैं।
- मौसमी व्यवधान: तड़ितझंझा और संवहनीय गतिविधियों में कमी से प्राकृतिक शीतलन प्रभाव कम हो जाता है ।
- उदाहरण: मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ की कमी के कारण अप्रैल की शुरुआत में ही तापमान में तेज वृद्धि दर्ज की।
- शहरी प्रभाव: अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव शहरों में तापमान को और बढ़ा देता है।
- उदाहरण: तटीय शहरों में आर्द्रता और निर्माण-जनित ऊष्मा संचय के कारण अधिक असुविधा होती है।
हीटवेव के प्रभाव
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: लंबे समय तक गर्मी के संपर्क से मृत्यु दर और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ते हैं।
- आर्थिक हानि: विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों में उत्पादकता घटती है।
- उदाहरण: वर्ष 2024 में 247 अरब कार्य-घंटों की हानि हुई, जिससे कृषि और निर्माण क्षेत्र प्रभावित हुए।
- कृषि पर दबाव: अत्यधिक गर्मी फसलों की परिपक्वता को तेज कर देती है, जिससे उत्पादन घटता है और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।
- उदाहरण: रबी फसलें कटाई के दौरान प्रभावित होती हैं, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है।
हीट एक्शन प्लान (HAPs) की संरचनात्मक सीमाएँ
- प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण: HAPs मुख्यतः आपातकालीन प्रतिक्रिया पर केंद्रित हैं, न कि दीर्घकालिक सुदृढ़ता पर।
- उदाहरण: निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान समय में बदलाव अल्पकालिक समाधान को दर्शाता है, न कि संरचनात्मक अनुकूलन को।
- वित्तीय कमी: शीतलन अवसंरचना जैसे दीर्घकालिक उपायों के लिए पर्याप्त धन आवंटन नहीं है।
- उदाहरण: शहरी हरितीकरण के लिए संसाधनों की कमी।
- सीमित दायरा: असंगठित क्षेत्र और कमजोर वर्गों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
- उदाहरण: असंगठित श्रमिकों के लिए ताप-सुरक्षा कानूनों का अभाव।
- कमजोर एकीकरण: HAPs आवास और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मूलभूत कमजोरियों को दूर करने में विफल रहते हैं।
- स्थानीय विसंगति: योजनाओं में विकेंद्रीकृत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजना का अभाव है।
- उदाहरण: HAPs अक्सर स्थानीय जलवायु और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं होते हैं।
समग्र उपाय
- संरचनात्मक योजना: शहरी शीतलन के लिए हरित आवरण और परावर्तक सतहों में निवेश किया जाए।
- समर्पित वित्तपोषण: अनुकूलन अवसंरचना के लिए दीर्घकालिक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- उदाहरण: HAPs के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु बजटीय आवंटन को सुदृढ़ करना।
- श्रमिक सुरक्षा: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए हीट-सुरक्षा नियमों को लागू किया जाए।
- उदाहरण: निर्माण और कृषि क्षेत्रों में कार्य-घंटों के समायोजन को अनिवार्य बनाना।
- स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच: मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों और घर-घर सेवाओं का विस्तार कर हीट-संबंधित जोखिमों को कम किया जाए।
- वैश्विक सहयोग: अनुकूलन वित्त के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग किया जाए।
- उदाहरण: कोलंबिया-नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होकर जलवायु वित्त तक पहुँच बढ़ाना।
निष्कर्ष
भारत में हीटवेव केवल जलवायु समस्या नहीं, बल्कि व्यापक संरचनात्मक कमजोरियों को दर्शाती हैं। संरचनात्मक सुधार, समावेशी योजना और निरंतर वित्तपोषण के माध्यम से HAPs को सुदृढ़ करना आवश्यक है ताकि प्रतिक्रियात्मक उपायों से आगे बढ़कर एक सुदृढ़ अनुकूलन मॉडल की ओर अग्रसर हुआ जा सके, विशेषकर तेजी से गर्म होती जलवायु के संदर्भ में।