प्रश्न की मुख्य माँग
- CAFE-III मानकों की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
- जलवायु व व्यापक आर्थिक संदर्भ में लचीले अनुपालन और इसके शिथिलीकरण के जोखिमों का वर्णन कीजिए।
- संक्रमण के व्यावहारिक साधन के रूप में लचीलापन संबंधी प्रतितर्क की चर्चा कीजिए।
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उत्तर
भारत के CAFE-III मानक वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य रखते हैं। हालाँकि, इनके लचीले अनुपालन ढाँचे से यह चिंता उत्पन्न होती है कि कहीं यह विद्युत गतिशीलता की ओर संक्रमण को कमजोर न कर दे, जिसका प्रभाव भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं, ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक व्यापक आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।
CAFE-III मानकों की प्रमुख विशेषताएँ
- सख्त लक्ष्य: सख्त उत्सर्जन मानक ‘फ्लीट’ औसत उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य रखते हैं।
- उदाहरण: ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के प्रस्ताव के अनुसार, उत्सर्जन लक्ष्य को लगभग 113 ग्राम CO₂/किमी (CAFE-II) से घटाकर 77 ग्राम CO₂/किमी (2031–32 तक) किया गया है।
- बहु-मार्गीय अनुपालन: विद्युत वाहनों के अलावा भी कई विकल्पों के माध्यम से अनुपालन की अनुमति है।
- उदाहरण: एथेनॉल मिश्रित वाहन (E20–E85) और स्टार्ट-स्टॉप प्रणाली जैसी दक्षता तकनीकों के लिए क्रेडिट।
- सुपर क्रेडिट: कुछ तकनीकों को अनुपालन में अधिक भारांक प्रदान किया जाता है।
- उदाहरण: एक विद्युत वाहन को तीन वाहनों के बराबर माना जाता है।
- क्रेडिट व्यापार: अतिरिक्त क्रेडिट को निर्माताओं के बीच खरीदा-बेचा जा सकता है, विशेषकर प्रारंभिक विद्युत वाहन अपनाने वालों द्वारा।
- खंड आधारित अनुपालन: प्रदर्शन का आकलन वार्षिक के स्थान पर बहुवर्षीय अवधि (जैसे तीन वर्ष) में किया जाता है।
लचीला अनुपालन और जलवायु व व्यापक आर्थिक संदर्भ में शिथिलीकरण का जोखिम
- क्रमिक सुधार का झुकाव: सीमांत सुधारों पर अधिक ध्यान देने से संरचनात्मक रूप से विद्युत वाहनों की ओर संक्रमण में देरी होती है।
- उदाहरण: टायर प्रेशर मॉनिटरिंग और रीजनरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीकों के बिना विद्युतीकरण संबंधी मानकों को पूरा किया जा सकता है।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता: एथेनॉल-आधारित विकल्प आंतरिक दहन इंजन (ICE) की निर्भरता को बनाए रखते हैं।
- उदाहरण: E85 अनुकूल वाहन अब भी दहन प्रक्रिया पर आधारित होते हैं, जिससे गहन कार्बन-उत्सर्जन में कमी सीमित रहती है।
- कमजोर संकेत: लचीली समय-सीमा नियामकीय तत्परता को कम करती है, जिससे परिवर्तन की गति धीमी होती है।
- उदाहरण: तीन-वर्षीय औसत के कारण अस्थायी अनुपालन की कमी पर त्वरित दंड आरोपित नहीं होता।
- क्रेडिट संबंधी खामियाँ: क्रेडिट व्यापार से पिछड़े निर्माता तकनीकी उन्नयन से बच सकते हैं।
- उदाहरण: कंपनियाँ विद्युत अवसंरचना में निवेश करने के स्थान पर क्रेडिट खरीद लेती हैं।
- जलवायु प्रभाव: विद्युत वाहनों को अपनाने में धीमापन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को प्रभावित करता है।
- उदाहरण: परिवहन क्षेत्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है, जिससे पेरिस समझौते के तहत प्रतिबद्धताएँ प्रभावित हो सकती हैं।
व्यावहारिक संक्रमण साधन के रूप में लचीलापन: प्रतितर्क
- संक्रमण में लचीलापन: क्रमिक परिवर्तन से उद्योग पर आर्थिक तनावों को कम किया जा सकता है।
- उदाहरण: ऑटो क्षेत्र जीडीपी में लगभग 7% योगदान देता है (भारी उद्योग मंत्रालय), इसलिए संतुलित संक्रमण आवश्यक है।
- लागत दक्षता: बहु-मार्गीय विकल्पों से निर्माताओं की अनुपालन लागत कम होती है।
- उदाहरण: क्रमिक तकनीकें तत्काल विद्युत संक्रमण की तुलना में सस्ती होती हैं।
- नवाचार को प्रोत्साहन: क्रेडिट व्यवस्था प्रारंभिक उपयोगकर्ताओं और नवाचार को बढ़ावा देती है।
- उदाहरण: विद्युत वाहनों में निवेश करने वाली कंपनियाँ व्यापार योग्य क्रेडिट अर्जित करती हैं, जिससे तकनीकी नेतृत्व को प्रोत्साहन मिलता है।
- ऊर्जा सुरक्षा: एथेनॉल मिश्रण से तेल आयात पर निर्भरता कम होती है।
- उदाहरण: भारत एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत 20% मिश्रण का लक्ष्य रखता है।
- बाजार संबंधी तैयारी: यह विद्युत वाहन पारिस्थितिकी तंत्र (चार्जिंग, आपूर्ति श्रृंखला) को विकसित होने का समय देता है।
- उदाहरण: FAME इंडिया योजना के तहत चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार क्रमिक उपयोग का समर्थन करता है।
निष्कर्ष
यद्यपि CAFE-III में लचीलापन तात्कालिक विद्युतीकरण की गति को कुछ सीमा तक कम कर सकता है, फिर भी यह एक व्यावहारिक संक्रमण मार्ग प्रदान करता है। नियामकीय कठोरता और आर्थिक वास्तविकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक होगा, ताकि भारत की जलवायु महत्वाकांक्षाओं को सतत औद्योगिक विकास के साथ समन्वित किया जा सके।