प्रश्न की मुख्य माँग
- डिजिटल बाधाएँ एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) संबंधी अंतराल।
- सामाजिक-आर्थिक विकास पर उनका प्रभाव।
- अन्य कारकों की भूमिका।
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उत्तर
परिचय
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम जैसी पहलों के बावजूद राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के अनुसार केवल लगभग 37% ग्रामीण परिवारों के पास इंटरनेट की पहुँच है। यह निरंतर बनी हुई डिजिटल निरक्षरता एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) संबंधी अंतराल को दर्शाता है, जो प्रभावी सेवा वितरण एवं समावेशी सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में बाधा उत्पन्न करते हैं।
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डिजिटल बाधाएँ एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) संबंधी अंतराल

- कम डिजिटल साक्षरता: सीमित डिजिटल कौशल के कारण लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एवं सेवाओं का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाते।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) के अंतर्गत 6 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ई-सेवाओं तक पहुँच के लिए बुनियादी डिजिटल प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ी।
- कमजोर कनेक्टिविटी: अपर्याप्त इंटरनेट अवसंरचना के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुँच सीमित रहती है।
- उदाहरण: भारतनेट परियोजना अभी भी अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में विलंब का सामना कर रही है।
- उपकरणों की कमी: किफायती स्मार्टफोन एवं कंप्यूटरों की अनुपलब्धता डिजिटल भागीदारी को सीमित करती है।
- उदाहरण: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), 75वें दौर के अनुसार केवल लगभग 24% ग्रामीण परिवारों के पास इंटरनेट की सुविधा है।
- लैंगिक डिजिटल विभाजन: सामाजिक एवं सांस्कृतिक बाधाओं के कारण महिलाओं का डिजिटल बहिष्करण अधिक है।
- उदाहरण: NFHS-5 के अनुसार, केवल लगभग 33% ग्रामीण महिलाएँ इंटरनेट का उपयोग करती हैं।
- भाषाई बाधाएँ: स्थानीय भाषाओं में सीमित डिजिटल सामग्री होने से डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग प्रभावित होता है।
- उदाहरण: सरकारी रिपोर्टों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय भाषाओं आधारित इंटरफेस की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
सामाजिक-आर्थिक विकास पर प्रभाव
- शिक्षा संबंधी बाधाएँ: डिजिटल अंतराल के कारण ऑनलाइन शिक्षा संसाधनों तक पहुँच सीमित हो जाती है।
- उदाहरण: पीएम ई-विद्या के अंतर्गत कोविड-19 महामारी के दौरान उपकरणों एवं इंटरनेट की कमी के कारण सभी विद्यार्थियों को समान रूप से लाभ नहीं मिल सका।
- स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच: डिजिटल बाधाओं के कारण टेलीमेडिसिन एवं डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।
- उदाहरण: ई-संजीवनी (eSanjeevani) का उपयोग डिजिटल रूप से वंचित क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम है।
- वित्तीय बहिष्करण: डिजिटल निरक्षरता के कारण ऑनलाइन बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान सेवाओं का उपयोग सीमित रहता है।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के कई खातों का डिजिटल कौशल के अभाव में पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता।
- आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव: डिजिटल बाजारों एवं रोजगार प्लेटफॉर्म तक सीमित पहुँच से आजीविका के अवसर कम हो जाते हैं।
- उदाहरण: ई-नाम (e-NAM) का उपयोग डिजिटल कौशल की कमी के कारण अनेक किसानों तक सीमित है।
- सेवा वितरण में बाधा: ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाई होती है।
- उदाहरण: कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) इन कमियों को दूर करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, किंतु कम डिजिटल साक्षरता के कारण इन पर निर्भरता बनी हुई है।
अन्य कारकों की भूमिका
- आय का स्तर: कम आय के कारण स्मार्टफोन, कंप्यूटर एवं इंटरनेट सेवाओं का वहन करना कठिन हो जाता है।
- उदाहरण: NSSO के उपभोग संबंधी आँकड़े दर्शाते हैं कि डिजिटल पहुँच का स्तर आय से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।
- जागरूकता का अभाव: सरकारी योजनाओं एवं डिजिटल सेवाओं के बारे में सीमित जानकारी के कारण उनका उपयोग कम होता है।
- सुशासन संबंधी चुनौतियाँ: क्रियान्वयन में विलंब के कारण डिजिटल अवसंरचना के विस्तार की गति प्रभावित होती है।
- उदाहरण: भारतनेट परियोजना के विभिन्न चरणों में विलंब की ओर CAG ने भी संकेत किया है।
- सामाजिक बाधाएँ: जाति, लिंग एवं क्षेत्रीय असमानताएँ डिजिटल पहुँच को प्रभावित करती हैं।
- उदाहरण: NFHS के आँकड़े डिजिटल पहुँच में इन सामाजिक विषमताओं को दर्शाते हैं।
- संस्थागत क्षमता: स्थानीय संस्थाओं की सीमित प्रशासनिक क्षमता के कारण डिजिटल सेवाओं का प्रभावी वितरण बाधित होता है।
- उदाहरण: कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का प्रदर्शन राज्यों में प्रशासनिक क्षमता के अनुसार भिन्न-भिन्न है।
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निष्कर्ष
तेजी से डिजिटल होते शासन-तंत्र में प्रौद्योगिकी से वंचित होना, अधिकारों से वंचित होने के समान होता जा रहा है। अंतिम छोर तक डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता तथा जवाबदेह शासन के माध्यम से डिजिटल अंतराल को कम करना आवश्यक है, ताकि समानता एवं अवसर की संवैधानिक गारंटियाँ वास्तव में प्रत्येक नागरिक तक पहुँच सकें।