Q. चर्चा कीजिए कि क्या वर्तमान कौशल विकास कार्यक्रम उद्योग और श्रम बाजारों की आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • बताइए कि वर्तमान कौशल कार्यक्रम किस सीमा तक उद्योग और श्रम बाजार की आवश्यकताओं को पूर्ण करते हैं।
  • चर्चा कीजिए कि वर्तमान कौशल कार्यक्रम किस सीमा तक उद्योग और श्रम बाजार की आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से पूर्ण नहीं करते हैं।

उत्तर

भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश उसकी श्रमशक्ति को उत्पादक संपत्ति में परिवर्तित करने का एक सीमित अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसे कौशल विकास कार्यक्रम प्रशिक्षण को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का प्रयास करते हैं। तथापि, वित्तपोषण, गुणवत्ता, रोजगार उपलब्धता और श्रम बाजार की माँग के प्रति उत्तरदायित्व से संबंधित चिंताएँ अभी भी बनी हुई हैं।

वर्तमान कौशल कार्यक्रम किस सीमा तक उद्योग और श्रम बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं

  • वृहद स्तर पर कौशल पहुँच का विस्तार: सरकारी योजनाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में अल्पकालिक प्रशिक्षण का विस्तार किया है, जिससे कमजोर वर्गों के युवाओं के लिए अवसर बढ़े हैं।
    • उदाहरण: कौशल भारत मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (2015–22) के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।
  • रोजगार-संलग्न प्रशिक्षण व्यवस्था: योजनाओं में प्रशिक्षुओं को नियोक्ताओं से जोड़ने हेतु रोजगार ट्रैकिंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की लेखा-परीक्षा के अनुसार लगभग 41% अल्पकालिक प्रशिक्षुओं को रोजगार प्राप्त हुआ।
  • सार्वजनिक–निजी भागीदारी मॉडल: निजी प्रशिक्षण भागीदारों की सहभागिता से बाज़ार-उन्मुख पाठ्यक्रम विकसित करने का प्रयास किया गया है।
  • उदीयमान क्षेत्रों पर ध्यान: हालिया नीतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल कौशल और हरित कौशल जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि भविष्य की श्रम माँग को पूरा किया जा सके।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उद्योग की बदलती आवश्यकताओं से जुड़े व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीवन अधिगम पर बल देती है।
  • माँग मानचित्रण हेतु संस्थागत ढाँचा: राष्ट्रीय कॅरियर सेवा (NCS) पोर्टल का उद्देश्य नियोक्ताओं और नौकरी तलाशने वालों को जोड़ना है।
    • उदाहरण: यह पोर्टल रोजगार अवसरों और श्रम बाजार से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है।

वर्तमान कौशल कार्यक्रम किस सीमा तक उद्योग और श्रम बाजार की आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से पूर्ण नहीं करते

  • व्यावसायिक शिक्षा में कम नामांकन: भारत में व्यावसायिक शिक्षा का प्रसार वैश्विक मानकों की तुलना में अत्यंत कम है।
    • उदाहरण: माध्यमिक स्तर पर केवल लगभग 1.3% छात्र व्यावसायिक शिक्षा में नामांकित हैं, जबकि यूरोपीय संघ और चीन में यह लगभग 50% है।
  • वित्तीय जवाबदेही की कमजोरी: गंभीर अनियमितताएँ कार्यक्रमों की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की लेखा-परीक्षा में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 94.5% बैंक खातों को अमान्य पाया गया तथा वित्तीय प्रतिवेदन में त्रुटियाँ उजागर हुईं।
  • आपूर्ति-आधारित दृष्टिकोण: कार्यक्रम अभी भी मुख्यतः सरकारी वित्तपोषण और लक्ष्य-आधारित ढाँचे पर आधारित हैं, न कि नियोक्ताओं द्वारा संचालित।
    • उदाहरण: उद्योग की सीमित भागीदारी; जबकि 90 से अधिक देशों में उद्योग उपकर जैसी व्यवस्थाएँ प्रचलित हैं, भारत में ऐसी प्रणाली का अभाव है।
  • निधियों के उपयोग में कमी: बजट घोषणाएँ प्रायः क्रियान्वयन के स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाती हैं।
    • उदाहरण: वित्त वर्ष 2026 की इंटर्नशिप योजना में आवंटित निधि का केवल लगभग 5% ही व्यय हुआ, जो योजना-निर्माण में कमियों को दर्शाता है।
  • वास्तविक समय श्रम बाजार आँकड़ों का अभाव: समय-समय पर किए जाने वाले कौशल-अंतराल अध्ययन श्रम बाजार की परिवर्तित माँग को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं कर पाते हैं।

निष्कर्ष

यद्यपि भारत के कौशल कार्यक्रमों ने पहुँच का विस्तार किया है, फिर भी वे खंडित, आपूर्ति-आधारित तथा वास्तविक समय की औद्योगिक माँग से कमजोर रूप से जुड़े हुए हैं। कौशल ऋण, वाउचर, उद्योग उपकर तथा आँकड़ा-आधारित योजना निर्माण के साथ-साथ अधिक सुदृढ़ जवाबदेही तंत्र अपनाने से इन्हें माँग-आधारित और नियोक्ता-प्रेरित प्रणालियों में परिवर्तित किया जा सकता है, ताकि वर्ष 2040 तक उपलब्ध जनसांख्यिकीय अवसर का प्रभावी उपयोग किया जा सके।

To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.