UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. राज्यपाल द्वारा विधायी शक्तियों के प्रयोग के लिए आवश्यक शर्तों पर चर्चा कीजिए। विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए बिना, राज्यपाल द्वारा अध्यादेशों को पुनः प्रख्यापित किए जाने की वैधता पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

April 23, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • राज्यपाल द्वारा विधायी शक्तियों के प्रयोग के लिए आवश्यक शर्तों का उल्लेख कीजिए। 
  • विधानमंडल के समक्ष रखे बिना राज्यपाल द्वारा अध्यादेशों को पुनः जारी करने की वैधता की चर्चा कीजिए। 

उत्तर

भारत के संविधान के अनुच्छेद-213 के अंतर्गत राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति एक आपातकालीन विधायी तंत्र है, जिसका उद्देश्य तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता वाली स्थितियों से निपटना है। हालाँकि, संवैधानिक सुरक्षा उपाय और न्यायिक व्याख्या यह सुनिश्चित करते हैं कि इस शक्ति का प्रयोग केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही किया जाए और अध्यादेशों को बार-बार पुनः जारी करके इसका दुरुपयोग न किया जाए।

Legislative Powers by the Governor

मुख्य भाग

राज्यपाल द्वारा विधायी शक्तियों के प्रयोग की आवश्यक शर्तें

  • तत्काल विधायी कार्रवाई की आवश्यकता: राज्यपाल को यह संतुष्टि होनी चाहिए कि परिस्थितियाँ ऐसी हैं, जिनमें तत्काल विधायी हस्तक्षेप आवश्यक है और इसे विधानसभा के पुनः आह्वान तक टाला नहीं जा सकता है।
  • मंत्रिपरिषद की सलाह और सहयोग: राज्यपाल अध्यादेश शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता पर करता है, जो संसदीय प्रणाली को दर्शाता है।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-163 के अनुसार, राज्यपाल को अधिकांश कार्यों में मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना होता है।
  • राज्य सूची के अंतर्गत विषय: अध्यादेश केवल उन विषयों पर जारी किया जा सकता है, जो राज्य विधानमंडल की विधायी क्षमता के अंतर्गत आते हैं।
    • उदाहरण: संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य सूची और समवर्ती सूची में शक्तियों का वितरण।
  • विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करना: प्रत्येक अध्यादेश को पुनः सत्र प्रारंभ होने पर विधानमंडल के समक्ष रखना अनिवार्य है।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-213(2) के अनुसार, पुनः सत्र प्रारंभ होने के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदन न मिलने पर अध्यादेश समाप्त हो जाता है।

विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए बिना अध्यादेशों के पुनःप्रख्यापन की वैधता

  • संवैधानिक धोखाधड़ी सिद्धांत: बिना विधायी परीक्षण के बार-बार अध्यादेश जारी करना संविधान के साथ धोखाधड़ी माना जाता है, क्योंकि यह विधायिका की भूमिका को दरकिनार करता है।
    • उदाहरण: डी. सी. बधवा बनाम बिहार राज्य में सर्वोच्च न्यायालय ने निरंतर अध्यादेश पुनःप्रख्यापन की प्रथा की निंदा की।
  • विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य: अध्यादेश को विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत न करना विधायी निगरानी के संवैधानिक दायित्व का उल्लंघन है।
  • अध्यादेश की अस्थायी प्रकृति: अध्यादेश एक अस्थायी उपाय है और इसे नियमित कानून निर्माण का विकल्प नहीं बनाया जा सकता है।
    • उदाहरण: कृष्ण कुमार सिंह बनाम बिहार राज्य में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अध्यादेश समानांतर विधायी तंत्र नहीं बन सकते।
  • सीमित अपवाद: पुनःप्रख्यापन केवल असाधारण परिस्थितियों में ही उचित हो सकता है, जब पुनः तत्काल विधायी कार्रवाई आवश्यक हो।
    • उदाहरण: आर. के. गर्ग बनाम भारत संघ में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अध्यादेश शक्ति एक आपातकालीन उपाय है, जो नियमित कानून निर्माण का स्थान नहीं ले सकती।

निष्कर्ष

राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति भारत की संसदीय व्यवस्था में एक अस्थायी आपातकालीन तंत्र के रूप में निर्धारित है। न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक सुरक्षा उपाय यह सुनिश्चित करते हैं कि बिना विधायी विचार-विमर्श के बार-बार पुनःप्रख्यापन सामान्यतः स्वीकार्य न हो, जिससे विधायिका की सर्वोच्चता बनी रहती है और लोकतांत्रिक कानून निर्माण प्रक्रिया को कार्यपालिका द्वारा दरकिनार किए जाने से रोका जा सके।

Discuss the essential conditions for exercise of the legislative powers by the Governor. Discuss the legality of re-promulgation of ordinances by the Governor without placing them before the Legislature. in hindi

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.