प्रश्न की मुख्य माँग
- द्विपक्षीय सहयोग और नेतृत्व की भूमिका।
|
उत्तर
विखंडित वैश्विक व्यवस्था में, ग्लोबल साउथ के साथ भारत का जुड़ाव वैचारिक एकजुटता से आगे बढ़कर “व्यावहारिक नेतृत्व” में परिवर्तित हो गया है। अफ्रीकी संघ को G20 में शामिल कराने का समर्थन करने और दक्षिण (DAKSHIN) जैसी पहलों की शुरुआत करके, नई दिल्ली औद्योगीकृत उत्तर और विकासशील दक्षिण के बीच एक विश्वसनीय सेतु के रूप में स्वयं को स्थापित कर रही है।
द्विपक्षीय सहभागिताएँ एवं नेतृत्वकारी भूमिका
- अफ्रीका के साथ संपर्क (इथियोपिया/नाइजीरिया): भारत उच्चस्तरीय दौरों के माध्यम से डिजिटल शासन और सुरक्षा पर केंद्रित सहयोग के जरिए “अफ्रीका की नब्ज” के साथ संबंध सुदृढ़ कर रहा है।
- उदाहरण: वर्ष 2025 के उत्तरार्द्ध में प्रधानमंत्री मोदी की इथियोपिया यात्रा में अफ्रीकी संघ की G-20 सदस्यता और ऋण स्थिरता ढाँचों के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- कैरेबियाई कूटनीति (गुयाना): भारत कैरिकॉम देशों के साथ ऊर्जा सुरक्षा और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के लिए जलवायु सहनशीलता पर ध्यान देते हुए संबंधों को पुनर्जीवित कर रहा है।
- उदाहरण: वर्ष 2024 की राजकीय यात्रा के दौरान भारत ने गुयाना के साथ हाइड्रोकार्बन, स्वास्थ्य और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर 10 समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
- पश्चिम एशिया आर्थिक एकीकरण: रणनीतिक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौतों के माध्यम से आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करते हुए भारत मध्य-पूर्वी देशों के लिए विकासात्मक साझेदार की भूमिका निभा रहा है।
- उदाहरण: दिसंबर 2025 में भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर हस्ताक्षर, उर्वरक एवं ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ आयुष निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि रहा।
- दक्षिण पहल का क्रियान्वयन: ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से भारत अपने इंडिया स्टैक (UPI, कोविन) साझा कर डिजिटल विभाजन को कम कर रहा है।
- संघर्षों में रणनीतिक स्वायत्तता: रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की “तटस्थ-सकारात्मक” नीति गुटीय राजनीति से ऊपर उठकर ग्लोबल साउथ की खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा का पक्ष लेती है।
- मानवीय सेतु-निर्माण: क्षेत्रीय संकटों में भारत की “प्रथम प्रत्युत्तरदाता” छवि विकासशील देशों के बीच उसकी नैतिक विश्वसनीयता को सुदृढ़ करती है।
- उदाहरण: चक्रवात दित्वाह के बाद श्रीलंका को 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों का चक्रीय प्रबंधन: भारत आपूर्ति शृंखला के दुरुपयोग को रोककर वैश्विक दक्षिण के लिए “हरित परिवर्तन” सुनिश्चित करने की दिशा में एक नई पहल का नेतृत्व कर रहा है।
- उदाहरण: भारत ने विकासशील देशों को पुनर्चक्रण और शहरी खनन में सहायता प्रदान करने के लिए वर्ष 2025 में G20 महत्त्वपूर्ण खनिजों के चक्रीय प्रबंधन की पहल का प्रस्ताव रखा।
- बिम्सटेक क्षेत्रीय आधार: वर्ष 2025 के बिम्सटेक शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर भारत निष्क्रिय हो चुके सार्क के विकल्प के रूप में बंगाल की खाड़ी संपर्क पर केंद्रित एक स्थिर प्लेटफार्म प्रदान कर रहा है।
- उदाहरण: वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की थाईलैंड यात्रा के दौरान बिम्सटेक सदस्यों के लिए एकीकृत समुद्री सुरक्षा ढाँचे पर बल दिया गया।
निष्कर्ष
भारत की “बहु-संरेखित” कूटनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा हितों और ग्लोबल साउथ के नैतिक प्रतिनिधि के रूप में उसकी भूमिका के बीच संतुलन स्थापित करती है। कम-लागत, विस्तार योग्य तकनीकी समाधान प्रस्तुत करते हुए और वैश्विक संघर्षों में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए, भारत एक अपरिहार्य “वैश्विक निर्णायक राज्य” के रूप में उभरा है, जो प्रतिस्पर्द्धी विश्व व्यवस्थाओं के बीच मध्यस्थता कर सकता है।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
Latest Comments