प्रश्न की मुख्य माँग
- चीन पर निर्भरता किस प्रकार उसकी घरेलू जवाबदेही को कम करती है।
- अमेरिका पर निर्भरता किस प्रकार उसकी घरेलू जवाबदेही को नष्ट कर देती है।
|
उत्तर
वर्तमान में पाकिस्तान की विदेश और आर्थिक नीति का केंद्रबिंदु चीन और अमेरिका के बीच संतुलन बनाना है। जहाँ चीन दीर्घकालिक निवेश जैसे CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) के माध्यम से आर्थिक उपस्थिति बनाए हुए है, वहीं अमेरिका अल्पकालिक वित्तीय व कूटनीतिक राहत प्रदान करता है। इस बाहरी निर्भरता ने घरेलू जवाबदेही को कमजोर किया है, क्योंकि नीति-निर्णय अब सैन्य और अभिजात वर्ग द्वारा संचालित होते हैं, न कि संवैधानिक या संस्थागत निगरानी द्वारा।
चीन पर निर्भरता से घरेलू जवाबदेही का क्षरण
- अपारदर्शी आर्थिक समझौते: CPEC से जुड़े समझौते कार्यपालिका और सेना द्वारा किए जाते हैं, जिनमें संसद या जनता की कोई पारदर्शिता नहीं होती।
- उदाहरण: 70 अरब डॉलर से अधिक के CPEC निवेश की ऋण शर्तें और पुनर्भुगतान संरचना अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
- विकृत आर्थिक प्राथमिकताएँ: चीन के ऋण बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हैं, जबकि राजकोषीय सुधार या औद्योगिक पुनरुद्धार को नज़रअंदाज़ किया जाता है।
- उदाहरण: ग्वादर पोर्ट और ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश से ऋण तो बढ़ा, परंतु स्थानीय उत्पादकता में सुधार नहीं हुआ।
- ऋण निर्भरता से संप्रभुता का क्षरण: चीन से अत्यधिक ऋण लेने के कारण पाकिस्तान की वित्तीय स्वतंत्रता सीमित हो गई है।
- उदाहरण: बीजिंग की ऋण शर्तों ने इस्लामाबाद के बजटीय निर्णयों और भुगतान प्राथमिकताओं को प्रभावित किया है।
- संसदीय निगरानी में कमी: CPEC के निर्णयों पर सेना का वर्चस्व है, जिससे नागरिक मंत्रालयों की भूमिका सीमित हो गई है।
- उदाहरण: परियोजना कार्यान्वयन और मॉनिटरिंग में नागरिक प्रशासन की भूमिका लगभग प्रतीकात्मक रह गई है।
- रणनीतिक संरेखण बनाम आर्थिक स्वायत्तता: आर्थिक नीति कई बार चीन की भू-राजनीतिक रणनीति से प्रेरित होती है।
- उदाहरण: पाकिस्तान द्वारा मॉस्को फॉर्मेट डिक्लेरेशन का समर्थन बीजिंग की अमेरिका-विरोधी नीति के अनुरूप था।
अमेरिका पर निर्भरता से घरेलू जवाबदेही का क्षरण
- लेन-देन आधारित विदेश नीति: अमेरिका से सहायता या निवेश के बदले अल्पकालिक राहत को प्राथमिकता दी जाती है, न कि दीर्घकालिक सुधारों को।
- उदाहरण: पासनी पोर्ट में अमेरिकी निवेश प्रस्ताव त्वरित पूँजी प्रवाह के लिए था, न कि सतत विकास के लिए।
- नीति अस्थिरता और बाहरी दबाव: अमेरिका और IMF के दबाव में पाकिस्तान की राजकोषीय नीतियाँ तय होती हैं।
- उदाहरण: IMF की शर्तों (जैसे कर एवं सब्सिडी सुधार) पर अमेरिकी प्रभाव देखा गया।
- संस्थागत विश्वसनीयता में गिरावट: सेना द्वारा प्रमुख वार्ताओं का नेतृत्व लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को कमजोर करता है।
- किराया-आधारित शासन की प्रवृत्ति: विदेशी सहायता पर निर्भरता घरेलू राजस्व सुधार की प्रेरणा को घटाती है।
- उदाहरण: लगातार सरकारें IMF ऋणों पर निर्भर रहीं, बजाय कर सुधार के।
- आंतरिक वैधता का संकट: अमेरिका-विरोधी भाषणों और अमेरिका समर्थक नीतियों के बीच द्वंद्व नीति में भ्रम उत्पन्न करता है।
- उदाहरण: पाकिस्तान ने जहाँ एक ओर मॉस्को घोषणा का समर्थन किया, वहीं वॉशिंगटन से आर्थिक सहायता भी माँगी — यह नीति असंगति दर्शाता है।
निष्कर्ष
चीन की संरचनात्मक वित्तीय निर्भरता और अमेरिका की लेन-देन आधारित सहायता पर पाकिस्तान की दोहरी निर्भरता कमज़ोर शासन और अभिजात वर्ग-प्रधान नीति-निर्माण को प्रतिबिंबित करती है।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
Latest Comments