प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत-भूमध्यसागरीय दृष्टिकोण (Indo-Mediterranean Vision) का सामरिक महत्त्व
- आगे की राह।
|
उत्तर
परिचय
G-7 में भारत को बार-बार दिए जा रहे आमंत्रण वैश्विक शासन में एक महत्त्वपूर्ण हितधारक के रूप में उसके उभरते महत्त्व को दर्शाते हैं। वहीं, भारत-भूमध्यसागरीय दृष्टिकोण (Indo-Mediterranean Vision) क्षेत्रीय सीमाओं से परे आर्थिक एवं सामरिक कनेक्टिविटी को आकार देने में भारत की विकसित होती भूमिका का प्रतीक है।
भारत-भूमध्यसागरीय दृष्टिकोण का सामरिक महत्त्व
- कनेक्टिविटी सेतु: यह भारत को हिंद महासागर, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच प्रमुख कनेक्टिविटी सेतु के रूप में स्थापित करता है।
- उदाहरण: भारत की G-20 अध्यक्षता (2023) के दौरान भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (India-Middle East-Europe Economic Corridor – IMEC) का शुभारंभ किया गया, जिसमें भारत, यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।
- व्यापार विस्तार: यह व्यापार मार्गों में विविधता लाता है और भारत को यूरोपीय मूल्य शृंखलाओं से जोड़ता है।
- उदाहरण: भारत ने वर्ष 2024 में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ भारत–EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) संपन्न किया।
- प्रौद्योगिकी तक पहुँच: यह भारत की औद्योगिक महत्त्वाकांक्षाओं के लिए आवश्यक उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुँच को सुगम बनाता है।
- उदाहरण: भारत के सभी G-7 देशों के साथ सामरिक साझेदारी संबंध हैं, जो सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा: यह पश्चिम एशिया के माध्यम से विश्वसनीय ऊर्जा गलियारों तक भारत की पहुँच को सुदृढ़ करता है।
- उदाहरण: भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) के अंतर्गत भारत को खाड़ी और यूरोपीय भागीदारों से जोड़ने वाली विद्युत एवं क्लीन हाइड्रोजन कनेक्टिविटी व्यवस्था की परिकल्पना की गई है।
- ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: यह विकसित और विकासशील देशों के बीच सेतु के रूप में भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाता है।
- उदाहरण: भारत की G-20 अध्यक्षता (2023) के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाई गई, जिससे ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत हुई।
आगे की राह
- भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) का क्रियान्वयन: संस्थागत समन्वय के माध्यम से गलियारा अवसंरचना के कार्यान्वयन में तेजी लाई जाए।
- उदाहरण: IMEC समझौता ज्ञापन (MOU), 2023 के अंतर्गत किए गए वादों को शीघ्र क्रियान्वित किया जाए।
- FTA की गति बनाए रखना: यूरोप के साथ आर्थिक एकीकरण को गहरा करने हेतु लंबित व्यापार समझौतों को शीघ्र संपन्न किया जाए।
- उदाहरण: प्रस्तावित भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India–EU Free Trade Agreement) पर वार्ताओं में तेजी लाई जाए।
- प्रौद्योगिकी साझेदारियाँ: अग्रणी प्रौद्योगिकियों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग का विस्तार किया जाए।
- उदाहरण: भारत–यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (India–EU Trade and Technology Council), 2023 का उपयोग सेमीकंडक्टर और एआई सहयोग को बढ़ाने के लिए किया जाए।
- पश्चिम एशिया तक पहुँच: क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक सहभागिता को मजबूत किया जाए।
- उदाहरण: भारत, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका (I2U2) ढाँचे के अंतर्गत सामरिक समन्वय को और सुदृढ़ किया जाए।
- समुद्री क्षमता सुदृढ़ीकरण: इंडो-भूमध्यसागरीय गलियारे में समुद्री अवसंरचना और सुरक्षा को मजबूत किया जाए।
- उदाहरण: सागरमाला कार्यक्रम, 2015 भारत को एक लॉजिस्टिक्स एवं ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकता है।
निष्कर्ष
भारत-भूमध्यसागरीय दृष्टिकोण पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर भारत को उभरते आर्थिक एवं सामरिक नेटवर्कों के केंद्र में स्थापित करता है। इसका सफल क्रियान्वयन भारत को वैश्विक मामलों में केवल एक सहभागी से आगे बढ़ाकर उनके निर्माण और दिशा-निर्धारण में एक प्रमुख वास्तुकार के रूप में स्थापित कर सकता है।