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Q. नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में लागत समता प्राप्त करने के बावजूद, भारत को ग्रिड बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। 'अवरुद्ध क्षमता' (Stranded Capacity) पर चर्चा कीजिए और भारी भूमि अधिग्रहण के बिना स्मार्ट ग्रिड अनुकूलन तकनीकों के सुझाव दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

June 20, 2026

GS Paper IIIEconomy

प्रश्न की मुख्य माँग 

  • भारत में अवरुद्ध/अनुपयोगी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (Stranded Renewable Capacity) की अवधारणा को स्पष्ट करना।
  • इसके पीछे के कारणों जैसे ग्रिड बाधाएँ और संचरण सीमाएँ।
  • मौजूदा अवसंरचना के बेहतर उपयोग हेतु स्मार्ट ग्रिड अनुकूलन तकनीकें।

उत्तर

परिचय

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का तीव्र विस्तार हुआ है, जिसमें वर्ष 2025 में 45 GW से अधिक क्षमता जोड़ी गई है, जिससे इसकी लागत पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के लगभग समान (~₹3.5/kWh) हो गई है। हालाँकि, धीमी ट्रांसमिशन विस्तार, भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं तथा मौजूदा ग्रिड अवसंरचना के कम उपयोग के कारण 50 GW से अधिक स्वच्छ ऊर्जा क्षमता अभी भी अवरुद्ध बनी हुई है।

अवरुद्ध क्षमता

  • परिभाषा: अवरुद्ध क्षमता उन नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को संदर्भित करती है, जो संचालन के लिए तैयार होने के बावजूद ग्रिड तक विद्युत आपूर्ति नहीं कर पाती हैं।
  • कारण: ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण में 3–5 वर्ष लगते हैं, जबकि परियोजनाएँ 12–18 महीनों में चालू हो सकती हैं; ग्रिड बाधाएँ, बहु-एजेंसी अनुमोदन तथा भंडारण अवसंरचना की कमी उपयोगिता को कम करती है; मौजूदा लाइनों और सबस्टेशनों का अक्सर अल्प उपयोग होता है; सौर लाइनें केवल 25% समय ही कार्य करती हैं।
  • प्रभाव: हाल के राष्ट्रीय लोड आँकड़े बताते हैं कि दोपहर के समय सौर ऊर्जा उत्पादन के दौरान देश के कोयला संयंत्रों को उत्पादन तेजी से घटाना पड़ता है। हालाँकि, तापीय संयंत्र सुरक्षित रूप से अपनी न्यूनतम तकनीकी लोड (55%) से नीचे नहीं जा सकते, अन्यथा संरचनात्मक क्षति का जोखिम होता है।

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स्मार्ट ग्रिड अनुकूलन तकनीकें (बिना भारी भूमि अधिग्रहण के)

  • मुख्य नोड्स पर बैटरी भंडारण: दिन के समय सौर ऊर्जा को संगृहीत कर शाम के पीक समय में उपयोग किया जा सकता है, जिससे ग्रिड उपयोगिता 2–3 गुना बढ़ जाती है।
  • कोयला कॉरिडोर का उपयोग: कम उपयोग वाले कोयला संयंत्रों की ट्रांसमिशन लाइनों का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा के लिए किया जा सकता है, जब संयंत्र अपनी क्षमता से कम पर चलते हैं (लगभग 100 GW संभावित क्षमता)।
  • सबस्टेशन अनुकूलन: नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को मौजूदा सबस्टेशनों से जोड़कर तथा भंडारण के साथ संयोजित कर लगभग 100 GW अतिरिक्त क्षमता प्राप्त की जा सकती है।
  • उन्नत कंडक्टर: उच्च तापमान-सहनशील, कम झुकाव वाले तारों के उपयोग से मौजूदा टॉवरों पर ट्रांसमिशन क्षमता लगभग दोगुनी की जा सकती है।

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निष्कर्ष

अवरुद्ध क्षमता की समस्या के समाधान हेतु मौजूदा ग्रिड अवसंरचना का अनुकूलन आवश्यक है, जिसमें ऊर्जा भंडारण, रिकंडक्टिंग तथा कम उपयोग वाली लाइनों का रणनीतिक उपयोग शामिल है। ये उपाय बिना नए भूमि अधिग्रहण के लगभग 1,000 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को उपयोग में ला सकते हैं, जिससे भारत की कम लागत वाली स्वच्छ ऊर्जा का राष्ट्रीय ग्रिड में तीव्र एकीकरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

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Despite achieving cost parity in RE generation, India faces grid bottlenecks. Discuss ‘Stranded Capacity’ and suggest smart grid optimisation techniques without heavy land acquisition. in hindi

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