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Q. हालिया वैश्विक संघर्ष पारंपरिक हथियार प्रणालियों से विनाशकारी/विघटनकारी मानव रहित हवाई प्रणालियों (ड्रोन) की ओर एक निश्चित बदलाव को उजागर करते हैं। इस संदर्भ में, 'ड्रोन क्रांति' का विश्लेषण कीजिए और भारत को विषम ड्रोन खतरों (Asymmetric Drone Threats) के खिलाफ अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 17, 2026

GS Paper IIIIndian Society
प्रश्न की मुख्य माँग

  • ड्रोन क्रांति 
  • असममित ड्रोन युद्ध (Asymmetric Drone Warfare) से भारत के समक्ष उत्पन्न खतरे  
  • ड्रोन खतरों से सीमाओं की सुरक्षा हेतु भारत द्वारा अपनाए जाने वाले उपाय।

परिचय

यूक्रेन, लेबनान और पश्चिम एशिया के हालिया संघर्षों ने प्रदर्शित किया है कि कम लागत वाले और बड़े पैमाने पर निर्मित ड्रोन युद्ध की प्रकृति को तेजी से परिवर्तित कर रहे हैं। आज सैन्य प्रभावशीलता का निर्धारण केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर मानवरहित प्रणालियों के निर्माण, तैनाती और उनके प्रभावी प्रतिरोध की क्षमता से भी होने लगा है।

ड्रोन क्रांति 

  • कम लागत वाला युद्ध: ड्रोन पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्मों की तुलना में बहुत कम लागत पर सटीक प्रहार की क्षमता प्रदान करते हैं।
    • उदाहरण: यूक्रेन ने युद्धक्षेत्र अभियानों में वाणिज्यिक ड्रोन का व्यापक रूप से अनुकूलन एवं उपयोग किया।
  • बड़े पैमाने पर उत्पादन: औद्योगिक स्तर पर उत्पादन सैन्य शक्ति का एक प्रमुख निर्धारक बन गया है।
    • उदाहरण: रूस और यूक्रेन अपने सैन्य अभियानों को बनाए रखने के लिए प्रतिमाह हजारों ड्रोन तैनात करते हैं।
  • असममित संतुलनकारी शक्ति: ड्रोन अपेक्षाकृत कमजोर पक्षों को तकनीकी रूप से अधिक उन्नत सेनाओं को चुनौती देने में सक्षम बनाते हैं।
    • उदाहरण: पश्चिम एशिया में कई गैर-राज्य समूहों ने उन्नत सैन्य शक्तियों के विरुद्ध ड्रोन का उपयोग किया है।
  • तीव्र अनुकूलन क्षमता: युद्धक्षेत्र में नवाचार और सॉफ्टवेयर उन्नयन के माध्यम से ड्रोन प्रौद्योगिकियाँ तेजी से विकसित होती रहती हैं।
  • बहुआयामी उपयोगिता: ड्रोन एक साथ निगरानी, खुफिया जानकारी संग्रहण, लॉजिस्टिक्स सहायता तथा सटीक हमलों जैसे अनेक कार्य कर सकते हैं।

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भारत के समक्ष खतरे

  • सीमापार तस्करी: ड्रोन के माध्यम से हथियारों, मादक पदार्थों और नकली मुद्रा की आपूर्ति की जा सकती है।
    • उदाहरण: BSF ने पंजाब सीमा पर ड्रोन के जरिए गिराई गई अवैध सामग्री को कई बार जब्त किया है।
  • आतंकवादी घुसपैठ: शत्रुतापूर्ण समूह टोही और हमलों के लिए ड्रोन का उपयोग कर सकते हैं।
    • उदाहरण: जम्मू वायुसेना स्टेशन (2021) पर ड्रोन हमला।
  • स्वार्म हमले: बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ हमला कर पारंपरिक वायु-रक्षा प्रणालियों को निष्प्रभावी कर सकते हैं।
  • निगरानी संबंधी जोखिम: शत्रु ड्रोन सैन्य प्रतिष्ठानों एवं संवेदनशील क्षेत्रों की वास्तविक समय खुफिया जानकारी एकत्रित कर सकते हैं।
  • महत्त्वपूर्ण अवसंरचना के लिए खतरा: विद्युत संयंत्र, हवाई अड्डे तथा रक्षा प्रतिष्ठान ड्रोन हमलों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय ड्रोन-रोधी दिशानिर्देश, 2024 में महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

भारत के लिए उपाय

  • काउंटर-ड्रोन प्रणालियाँ: संवेदनशील सीमाओं पर DRDO की एंटी-ड्रोन प्रणाली जैसी एकीकृत व्यवस्थाओं के माध्यम से जैमर, स्पूफर तथा निर्देशित-ऊर्जा हथियारों की तैनाती की जाए।
  • एकीकृत पहचान एवं निगरानी: व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) के अंतर्गत रडार, अकॉस्टिक (Acoustic) तथा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सर्विलांस नेटवर्क स्थापित किए जाएँ।
  • स्वदेशी विनिर्माण: रणनीतिक पहलों के माध्यम से घरेलू ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित किया जाए।
    • उदाहरण: ड्रोन नियम, 2021 तथा उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, 2020।
  • बहु-एजेंसी समन्वय: सशस्त्र बलों, BSF तथा पुलिस एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय ड्रोन-रोधी दिशा-निर्देश, 2019 भारतीय वायु सेना के नेतृत्व में मल्टी-एजेंसी काउंटर-ड्रोन ढाँचे की परिकल्पना करते हैं।
  • AI-आधारित रक्षा प्रणाली: ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और निष्प्रभावीकरण हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणालियों का विकास किया जाए।
    • उदाहरण: रक्षा मंत्रालय की रक्षा उत्कृष्टता हेतु नवाचार (iDEX) पहल ऐसी प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करती है।

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निष्कर्ष

जैसे-जैसे ड्रोन युद्ध की प्रकृति को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं, सीमा सुरक्षा को भी पारंपरिक रक्षा व्यवस्थाओं से आगे बढ़ना होगा। उभरते असममित खतरों से भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी, बहु-स्तरीय काउंटर-ड्रोन संरचना तथा एकीकृत खुफिया नेटवर्क का समन्वित विकास और प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

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The recent global conflicts highlight a definitive shift from conventional weapon systems to disruptive unmanned aerial systems. In this context, analyze the ‘Drone Revolution’ and suggest measures for India to secure its borders against asymmetric drone threats. In Hindi (15 Marks, 250 Words)

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