प्रश्न की मुख्य माँग
- ड्रग तस्करी और संगठित अवैध गतिविधियों के बीच संबंध।
- इनके विरुद्ध नीतिगत प्रतिक्रिया एवं उपाय।
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उत्तर
परिचय
भारत की भौगोलिक स्थिति उसे दो प्रमुख मादक पदार्थ उत्पादन क्षेत्रों—गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान–पाकिस्तान–ईरान) और गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार–लाओस–थाईलैंड)—के बीच स्थित करती है, जिससे इसकी सीमाएँ मादक पदार्थ तस्करी के सक्रिय गलियारों में परिवर्तित हो गई हैं। म्याँमार में अफीम की कृषि में वर्ष 2021–2023 के बीच 56% वृद्धि तथा पाकिस्तान से ड्रोन-आधारित तस्करी जैसी प्रवृत्तियाँ अंतरराष्ट्रीय मादक नेटवर्कों की बढ़ती जटिलता और तकनीकी परिष्करण को दर्शाती हैं।
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मादक पदार्थ तस्करी एवं अन्य अवैध गतिविधियों के मध्य संबंध
- मादक पदार्थ–हथियार तस्करी संबंध: ड्रग कार्टेल अक्सर मादक पदार्थों के बदले छोटे हथियार एवं हल्के शस्त्रों का आदान-प्रदान करते हैं। इससे उग्रवादी एवं आपराधिक नेटवर्कों को मजबूती मिलती है। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में मणिपुर–म्याँमार गलियारा ऐसे नेटवर्कों का प्रमुख मार्ग है, जहाँ उग्रवादी समूह ड्रग और हथियार दोनों के आवागमन में सहायक बनते हैं।
- मनी लॉण्ड्रिंग एवं आतंक वित्तपोषण: ड्रग से प्राप्त अवैध आय को हवाला नेटवर्क, शेल कंपनियों तथा क्रिप्टोकरेंसी चैनलों के माध्यम से वैध अर्थव्यवस्था में प्रवाहित किया जाता है। यह ट्रेड-बेस्ड मनी लॉण्ड्रिंग के जरिए औपचारिक आर्थिक प्रणाली में समाहित हो जाती है।
- उदाहरण: मिजोरम में वर्ष 2025 में 1,477 किग्रा मेथामफेटामाइन की बड़ी जब्ती से स्पष्ट होता है कि इसके पीछे व्यापक वित्तीय नेटवर्क सक्रिय हैं।
- मानव तस्करी के साथ अभिसरण: मादक पदार्थ, हथियार एवं मानव तस्करी के मार्ग अक्सर समान होते हैं। सीमा क्षेत्रों में कमजोर आबादी को कूरियर या जबरन श्रम के रूप में उपयोग किया जाता है, विशेषकर संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में।
- उदाहरण: म्याँमार सीमा क्षेत्र ऐसे बहु-तस्करी नेटवर्कों के प्रमुख केंद्र हैं।
- उन्नत लॉजिस्टिक्स एवं तकनीक का उपयोग: तस्करी नेटवर्क अब तकनीकी रूप से अधिक उन्नत हो गए हैं, जैसे- ड्रोन आधारित तस्करी।
- उदाहरण: पाकिस्तान सीमा से ड्रोन द्वारा तस्करी में वृद्धि दर्ज की गई है। एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट (जून 2026) के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में ड्रोन आधारित तस्करी में 100 गुना वृद्धि हुई है, जिसमें 305 हवाई उल्लंघनों से 468 किग्रा उच्च-शुद्धता नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिनमें से 298 घटनाएँ पंजाब में दर्ज हुईं।
जवाबी उपाय
- एकीकृत सीमा प्रबंधन: बीएसएफ (BSF), असम राइफल्स, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) तथा तटीय सुरक्षा एजेंसियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। साथ ही, ड्रोन, रडार एवं एआई-आधारित निगरानी तकनीकों का उपयोग कर संवेदनशील एवं पारगम्य सीमाओं पर निगरानी को सुदृढ़ किया जाए।
- वित्तीय पारिस्थितिकी को बाधित करना: हवाला नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी आधारित मनी लॉण्ड्रिंग चैनलों तथा शेल कंपनियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) एवं फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट – इंडिया (FIU-IND) के माध्यम से लक्षित किया जाए। मादक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS) अधिनियम के अंतर्गत संपत्ति जब्ती एवं जब्ती की प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाया जाए।
- अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय सहयोग: म्याँमार, आसियान एवं बिम्सटेक देशों के साथ खुफिया जानकारी साझा को मजबूत किया जाए तथा गोल्डन ट्रायंगल एवं गोल्डन क्रिसेंट नेटवर्क्स के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाए जाएँ।
- समुदाय-आधारित मादक विरोधी रणनीति: मणिपुर, मिजोरम एवं पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों में वैकल्पिक आजीविका कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए। युवाओं को लक्षित करते हुए नशामुक्ति एवं जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
- कानूनी एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण: NDPS मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक न्यायालय स्थापित कर दोषसिद्धि दर में वृद्धि की जाए। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की क्षमता को फोरेंसिक, साइबर एवं वित्तीय खुफिया उपकरणों के माध्यम से और मजबूत किया जाए।
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निष्कर्ष
भारत में मादक पदार्थ तस्करी अब केवल एक पृथक नशीले पदार्थों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बहु-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती बन चुकी है, जो हथियार तस्करी, वित्तीय अपराध तथा मानव शोषण जैसी अवैध गतिविधियों से गहराई से जुड़ी हुई है। इन परस्पर जुड़े अवैध नेटवर्कों को समाप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित, खुफिया-नेतृत्वित तथा क्षेत्रीय समन्वययुक्त समग्र प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है।