Q. सांस्कृतिक संरक्षण और कहानी कहने के माध्यम के रूप में भित्ति चित्रों के महत्व एवं पहचान और विरासत की भावना को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालिए। (15 अंक, 250 शब्द)

उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • प्रस्तावना: भित्तिचित्रों के बारे में संक्षेप में लिखिए।  
  • मुख्य विषयवस्तु:
    • सांस्कृतिक संरक्षण और कहानी कहने के माध्यम के रूप में भित्ति चित्रों के महत्व पर प्रकाश डालिए।
    • पहचान और विरासत को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  • निष्कर्ष: इस संबंध में उचित निष्कर्ष दीजिए।

 

प्रस्तावना:

भारत में भित्ति चित्र कलात्मक अभिव्यक्ति का एक जीवंत रूप है जो दीवारों और सतहों पर बड़े पैमाने पर, जटिल रूप से विस्तृत कलाकृतियों के माध्यम से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है। उदाहरण के लिए, अजंता गुफा चित्र, वारली कला (महाराष्ट्र की एक पारंपरिक कला है)।

मुख्य विषयवस्तु:

सांस्कृतिक संरक्षण और कहानी कहने के माध्यम के रूप में भित्ति चित्रों का महत्व

  • ऐतिहासिक विरासत: उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में अजंता की गुफाएँ बुद्ध के जीवन और प्राचीन भारत की अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाने वाली जटिल भित्तिचित्र प्रदर्शित करती हैं।
  • सांस्कृतिक पहचान: महाराष्ट्र में वारली जनजाति के भित्ति चित्र, जो अपनी सरल ज्यामितीय आकृतियों के लिए जाने जाते हैं, उनके रोजमर्रा के जीवन और आध्यात्मिक मान्यताओं को दर्शाते हैं।
  • दृश्य कथाएँ: मदुरै के मीनाक्षी मंदिर के भित्ति चित्र रामायण और महाभारत जैसे हिंदू महाकाव्यों के दृश्यों को चित्रित करते हैं।

8.2

  • कलात्मक उत्कृष्टता: तमिलनाडु में सित्तनवासल गुफा के भित्ति चित्र फ्रेस्को पेंटिंग(एक प्राचीन चित्रकला तकनीक) की महारत को प्रदर्शित करते हैं, जो नर्तकियों और संगीतकारों के दृश्यों को चित्रित करते हैं।
  • सामुदायिक सहभागिता: इसमें आपसी सहयोग व स्थानीय समुदाय के भीतर अपनेपन और गौरव की भावना को बढ़ावा देना शामिल है। उदाहरण- अजंता की गुफाओं का उत्कीर्णन वाकाटक राजाओं के संरक्षण में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा किया गया था।

पहचान और विरासत को बढ़ावा देने में भित्ति चित्रों की भूमिका:

  • सांस्कृतिक आख्यानों का संरक्षण: उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में अजंता और एलोरा की गुफाओं के भित्तिचित्र बौद्ध और हिंदू पौराणिक कथाओं के दृश्यों को दर्शाते हैं।
  • सार्वजनिक स्थानों को पुनर्जीवित करना: शिलांग, मेघालय की गलियों में सड़क कला, अद्वितीय खासी संस्कृति और लोककथाओं को प्रदर्शित करती है, जो अपनेपन की भावना पैदा करती है।
  • प्रेरक समकालीन कला: जतिन दास और अंजलि इला मेनन जैसे कलाकार भारतीय भित्तिचित्रों की समृद्ध विरासत से प्रेरणा लेते हैं, वे अपनी चित्रकला में पहचान और विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं।
  • सांस्कृतिक निरंतरता: यह पारंपरिक चित्रकला तकनीकों, रूपांकनों और शैलियों को संरक्षित करके सुनिश्चित किया जाता है।

निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, भारतीय भित्ति चित्र अमूल्य सांस्कृतिक खजाने हैं जो कहानियों, परंपराओं और कलात्मक उत्कृष्टता को संरक्षित करने और संप्रेषित करने के साधन के रूप में काम करते हैं, और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में अद्वितीय भूमिका प्रदान करते हैं।

 

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