प्रश्न की मुख्य माँग
- घरेलू वित्तीय स्वास्थ्य का महत्त्व
- वर्तमान ढाँचे की कमियाँ
- आगे की राह।
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उत्तर
परिचय
वर्ल्ड बैंक ग्लोबल फिनडेक्स, 2026 के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में वयस्कों के बैंक खाता स्वामित्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह 56% से बढ़कर 89% हो गया है। तथापि, केवल बैंक खाता होना ही घरेलू वित्तीय स्थिरता, आकस्मिक संकटों से निपटने की क्षमता तथा दीर्घकालिक संपत्ति सृजन सुनिश्चित नहीं करता है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों द्वारा पेंशन एवं बचत साधनों का बढ़ता उपयोग इस बात को रेखांकित करता है कि अब केवल लेन-देन आधारित वित्तीय पहुँच से आगे बढ़कर समग्र वित्तीय स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।
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घरेलू वित्तीय स्वास्थ्य का महत्त्व
- आर्थिक झटकों के विरुद्ध लचीलापन: ऋण, बीमा एवं पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं तक पहुँच परिवारों को आय में कमी, प्राकृतिक आपदाओं तथा स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों का सामना करने में सक्षम बनाती है।
- उदाहरण: अटल पेंशन योजना (APY) से जुड़े असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अस्थिर रोजगार के बावजूद वृद्धावस्था में वित्तीय सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
- बचत एवं निवेश को प्रोत्साहन: यह संपत्ति सृजन तथा पीढ़ीगत वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
- उदाहरण: सैलरीसी (SalarySe) के माध्यम से मुंबई की नर्सें निवेश कर रही हैं तथा आपात स्थितियों के लिए वित्तीय योजना बना रही हैं।
- आर्थिक सशक्तीकरण: वित्तीय रूप से सुदृढ़ परिवार उपभोग, उद्यमिता एवं उत्पादकता में वृद्धि कर अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) खातों को ई-श्रम एवं पीएम-किसान भुगतान से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों की उपभोग क्षमता में वृद्धि होती है।
वर्तमान ढाँचे की कमियाँ
- सामाजिक सुरक्षा का सीमित एकीकरण: प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) के खाते मुख्यतः लेन-देन प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करते हैं, न कि व्यापक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाले केंद्रों के रूप में। लगभग 20% खाते निष्क्रिय बने हुए हैं तथा अनेक असंगठित श्रमिकों को बीमा, पेंशन एवं बचत जैसी समेकित वित्तीय सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।
- डिजिटल वित्तीय साक्षरता में असमानता: अनेक परिवार वित्तीय योजना बनाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एवं उभरते कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उपकरणों का प्रभावी उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं।
- वित्तीय आँकड़ों का विखंडन: घरेलू वित्तीय आँकड़ों के समेकित अभाव के कारण प्रभावी नीतियाँ तैयार करने तथा लक्षित हस्तक्षेप लागू करने में कठिनाई आती है।
आगे की राह
- एकीकृत वित्तीय मंच विकसित करना: प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) खातों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), पेंशन, बीमा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से पूर्णतः जोड़ा जाए।
- उदाहरण: पीएम-किसान, मनरेगा मजदूरी तथा अटल पेंशन योजना (APY) अंशदान के लिए एकीकृत खाता सुविधा विकसित की जाए।
- डिजिटल अवसंरचना का प्रभावी उपयोग: अकाउंट एग्रीगेटर, डिजिलॉकर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर वित्तीय साक्षरता तथा वित्तीय उत्पादों तक पहुँच को बढ़ाया जाए।
- उदाहरण: टेक्स्ट-आधारित ऐप्स से आगे बढ़कर वॉयस-DPI आधारित प्रणाली विकसित की जाए तथा भाषिणी (Bhashini) जनरेटिव एआई अनुवाद इंजन के माध्यम से स्थानीय बोलियों में रियल टाइम ऑडियो-आधारित वित्तीय योजना सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
- डेटा-आधारित नीति-निर्माण: सर्वेक्षणों, प्रशासनिक आँकड़ों एवं डिजिटल अभिलेखों का समेकन कर घरेलू वित्तीय स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए।
- उदाहरण: वित्तीय लचीलेपन के आकलन हेतु ग्लोबल फिनडेक्स जैसी समेकित सूचकांक प्रणाली का उपयोग किया जाए।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी: फिनटेक कंपनियों एवं नियोक्ताओं के सहयोग से वित्तीय उत्पादों के विस्तार तथा उपभोक्ता संरक्षण को सुदृढ़ किया जाए।
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निष्कर्ष
भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा को केवल बैंक खाता स्वामित्व तक सीमित न रहकर समग्र घरेलू वित्तीय स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ना होगा, जिसमें बचत, बीमा, पेंशन तथा डिजिटल वित्तीय साक्षरता को विशेष महत्व दिया जाए। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के एकीकरण, डिजिटल अवसंरचना के प्रभावी उपयोग तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत ऐसे वित्तीय रूप से सशक्त एवं लचीले परिवारों का निर्माण कर सकता है, जो भविष्य के आर्थिक एवं सामाजिक झटकों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए समावेशी कल्याण एवं सतत् संपत्ति सृजन को बढ़ावा दें।