Q. विशाल जनसांख्यिकीय लाभ और विश्व स्तरीय वैज्ञानिक प्रतिभा के बावजूद, भारत गहन प्रौद्योगिकी और मौलिक अनुसंधान में वैश्विक नेताओं से काफी पीछे है। इस कमी के लिए जिम्मेदार संरचनात्मक और संस्थागत बाधाओं का विश्लेषण कीजिए और योग्यता-आधारित वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के उपाय सुझाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)

May 1, 2026

GS Paper IIIScience & Tech

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत के गहन प्रौद्योगिकी घाटे के लिए उत्तरदायी संरचनात्मक बाधाओं की चर्चा कीजिए।
  • भारत के गहन प्रौद्योगिकी घाटे के लिए उत्तरदायी संस्थागत बाधाओं को स्पष्ट कीजिए।
  • योग्यता-आधारित वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के उपाय सुझाइए।

उत्तर

भारत विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक तैयार करता है और उसके पास युवा प्रतिभा का विशाल भंडार है, फिर भी गहन प्रौद्योगिकी और मौलिक अनुसंधान सीमित बना हुआ है। इसका कारण यह है कि संस्थागत प्रोत्साहन, नेतृत्व संरचनाएँ और अनुसंधान शासन अक्सर वास्तविक खोज के बजाय दृश्यता को प्राथमिकता देते हैं।

संरचनात्मक बाधाएँ 

  • माप आधारित संस्कृति: अनुसंधान की सफलता को दीर्घकालिक वैज्ञानिक प्रभाव के बजाय शोध-पत्रों की संख्या, पुरस्कारों और समितियों से आँका जाता है, जिससे उच्च-जोखिम नवाचार हतोत्साहित होता है।
    • उदाहरण: सेमीकंडक्टर, CCUS और उन्नत सामग्रियों जैसे क्षेत्रों में वास्तविक उपलब्धियों के बजाय मात्रा-आधारित मूल्यांकन पर जोर।
  • दिखावे को प्राथमिकता: प्रेस कॉन्फ्रेंस, औपचारिक उद्घाटन और सुर्खियाँ बटोरने वाले दावों को कठोर वैज्ञानिक सत्यापन से अधिक महत्त्व दिया जाता है।
  • कम जोखिम लेने की प्रवृत्ति: संस्थान अनिश्चित लेकिन परिवर्तनकारी अनुसंधान के बजाय सुरक्षित और अल्पकालिक परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हैं।
    • उदाहरण: प्रचुर प्रतिभा के बावजूद भारत गहन प्रौद्योगिकी विनिर्माण और ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अमेरिका और चीन से पीछे है।
  • वित्तीय अंतराल: अनुसंधान एवं विकास (R&D) में अपर्याप्त और खंडित निवेश मौलिक तथा अनुप्रयुक्त अनुसंधान की निरंतरता को कमजोर करता है।
    • उदाहरण: सकल घरेलू उत्पाद (डीएसटी अनुसंधान एवं विकास सांख्यिकी) का लगभग 0.64% ही भारत में अनुसंधान एवं विकास पर खर्च होता है, जो चीन जैसी प्रमुख नवाचार अर्थव्यवस्थाओं से काफी कम है।
  • प्रतिभा पलायन: प्रतिभाशाली भारतीय शोधकर्ता बेहतर अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और अवसंरचना के कारण विदेशों में योगदान देना पसंद करते हैं।

संस्थागत बाधाएँ

  • स्थिर नेतृत्व: नेतृत्व संरचनाएँ वर्षों तक अपरिवर्तित रहती हैं, जिससे नए विचारों और वैज्ञानिक गतिशीलता पर अंकुश लगता है।
    • उदाहरण: वैश्विक अनुभव रखने वाले युवा वैज्ञानिकों को संस्थागत नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते हैं।
  • नौकरशाही विलंब: जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएँ अनुमोदन, खरीद और परियोजना क्रियान्वयन को धीमा कर देती हैं।
  • पदानुक्रम आधारित संस्कृति: कठोर वरिष्ठता-आधारित व्यवस्था युवा शोधकर्ताओं की स्वतंत्रता को सीमित करती है और नवाचार क्षमता को घटाती है।
  • कमजोर जवाबदेही: अकादमिक तंत्र में ईमानदार आलोचना, पारदर्शिता और संस्थागत सुधार को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता।
    • उदाहरण: वैज्ञानिक पेशेवर परिणामों के डर से प्रणालीगत समस्याओं पर खुलकर चर्चा करने से बचते हैं।
  • कमजोर रूपांतरण: अकादमिक, उद्योग और नीति के बीच कमजोर समन्वय के कारण प्रयोगशाला में हुई खोजें बड़े पैमाने पर तकनीक में परिवर्तित नहीं हो पाती हैं।
    • उदाहरण: शोध-पत्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद भारत सेमीकंडक्टर और गहन प्रौद्योगिकी विनिर्माण के परिणामों में पीछे है।

योग्यता-आधारित वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के उपाय

  • प्रभाव-आधारित मूल्यांकन: शोध के आकलन को केवल प्रकाशनों की संख्या से हटाकर नवाचार की गुणवत्ता, पेटेंट, अनुप्रयोगीय परिणाम और सामाजिक प्रासंगिकता पर केंद्रित करना।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF), नई शिक्षा नीति 2020 के तहत, गुणवत्ता-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।
  • युवा नेतृत्व: सक्षम युवा वैज्ञानिकों को संस्थागत नेतृत्व में आगे लाना, ताकि नई सोच, ऊर्जा और उन्नत विशेषज्ञता को बढ़ावा मिले।
    • उदाहरण: होमी भाभा और विक्रम साराभाई ने दूरदर्शी युवा नेतृत्व के माध्यम से संस्थानों का निर्माण किया।
  • अधिक वित्तपोषण: अग्रणी विज्ञान, गहन प्रौद्योगिकी  प्रयोगशालाओं और उच्च-जोखिम मौलिक अनुसंधान में निरंतर सार्वजनिक निवेश बढ़ाना।
    • उदाहरण: अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) भारत के अनुसंधान वित्तपोषण तंत्र को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।
  • प्रशासनिक सुधार: अनुदान स्वीकृति, खरीद नियमों और नियुक्ति प्रक्रियाओं को सरल बनाकर नौकरशाही बाधाओं को कम करना।
    • उदाहरण: प्रधानमंत्री शोध फैलोशिप (PMRF) और इंस्पायर (INSPIRE) जैसी पहलें शोधकर्ताओं के लिए बेहतर समर्थन तंत्र विकसित करने का प्रयास करती हैं।
  • खुला शासन: पारदर्शी सहकर्मी समीक्षा, संस्थागत आत्म-मूल्यांकन और वैज्ञानिक–नीति समन्वय को प्रोत्साहित कर सुधारों को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

भारत की वैज्ञानिक प्रगति केवल प्रतिभा निर्माण पर नहीं, बल्कि संस्थागत सुधारों पर निर्भर करती है। एक पारदर्शी, योग्यता-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र, जो वास्तविक खोज को प्रोत्साहित करे, युवा नेतृत्व को सशक्त बनाए और जोखिम लेने की प्रवृत्ति को समर्थन दे, भारत की जनसांख्यिकीय क्षमता को वैश्विक वैज्ञानिक नेतृत्व में परिवर्तित कर सकता है।

Despite possessing a massive demographic advantage and world-class scientific talent, India lags significantly behind global leaders in deep-tech and fundamental research. Analyze the structural and institutional bottlenecks responsible for this deficit and suggest measures to create a merit-driven scientific ecosystem. in hindi

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