प्रश्न की मुख्य माँग
- आर्थिक पूरकता का उल्लेख कीजिए।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में गहन भू-राजनीतिक सामंजस्य की चर्चा कीजिए।
- सीमाओं/सावधानियों का वर्णन कीजिए।
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उत्तर
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) देखने में सामान्य लगे, क्योंकि न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था भारत की अर्थव्यवस्था का सोलहवाँ हिस्सा है और भारत के कुल व्यापार में उसका हिस्सा 1% से भी कम है। फिर भी, यह भारत की आपूर्ति शृंखला विविधीकरण, निर्यात विस्तार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ सामंजस्य बिठाने की व्यापक रणनीति के साथ सुसंगत है।
आर्थिक पूरकताएँ
- भारतीय निर्यात के लिए बाजार तक अधिक पहुँच: न्यूजीलैंड द्वारा टैरिफ समाप्त करने से भारतीय निर्यातकों को उसके बाजार में अधिक व्यापक और प्रतिस्पर्द्धी पहुँच मिलती है।
- उदाहरण: मुक्त व्यापार समझौता के तहत भारत के 100% निर्यात पर शुल्क समाप्त किया गया है, जिससे न्यूजीलैंड में 8,284 टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क पहुँच प्राप्त होती है।
- संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों का संरक्षण: भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को व्यापार के लिए खोलते हुए, किसानों और संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है।
- उदाहरण: भारत ने 70.03% टैरिफ लाइनों में बाजार पहुँच प्रदान की है।
- निवेश सुगमता: यह समझौता केवल टैरिफ में कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार को दीर्घकालिक निवेश सहयोग से भी जोड़ता है।
- उदाहरण: 15 वर्षों में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता।
- MSMEs, रोजगार और घरेलू विकास को समर्थन: शून्य शुल्क पहुँच से कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ होगा।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में गहन भू-राजनीतिक सामंजस्य
- आपूर्ति शृंखला का विविधीकरण: यह FTA वैश्विक व्यवधानों के बीच लचीली आपूर्ति शृंखला बनाने के भारत के प्रयास को दर्शाता है।
- चीन पर निर्भरता में कमी: व्यापार भागीदारों का विविधीकरण रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अभी भी आयात के लिए चीन पर काफी निर्भर है।
- उदाहरण: वाणिज्यिक आसूचना और सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024–25 की दूसरी तिमाही में चीन, भारत का सबसे बड़ा आयात साझेदार था, जो कुल आयात मूल्य का 16.59% था।
- निर्यात गंतव्यों का विविधीकरण: यह FTA भारत को कुछ सीमित निर्यात बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और ओशिनिया-प्रशांत क्षेत्रों में विस्तार करने में मदद करता है।
- हिंद-प्रशांत साझेदारियों को सुदृढ़ करना: यह FTA हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दो लोकतांत्रिक समुद्री साझेदारों के बीच व्यापक रणनीतिक अभिसरण का हिस्सा है।
सीमाएँ/सावधानियाँ

- सीमित व्यापार आधार: इस समझौते के रणनीतिक महत्त्व के बावजूद भारत-न्यूजीलैंड व्यापार का आर्थिक पैमाना अभी भी सीमित है।
- उदाहरण: वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार केवल 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, हालाँकि इसमें लगभग 49% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
- निवेश की प्रतिबद्धता का अर्थ स्वतः निवेश होना नहीं है: निवेश से संबंधित प्रावधान महत्त्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक निवेश प्रवाह, इसके क्रियान्वयन और निवेशकों के विश्वास पर निर्भर करेगा।
- क्रियान्वयन में विलंब: FTA के लाभ- समय पर अनुमोदन, प्रभाव में आने और दोनों देशों द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे। तब तक, टैरिफ लाभ और आपूर्ति शृंखला से जुड़े लाभ तत्काल के बजाय संभावित ही रहेंगे।
- घरेलू विनिर्माण क्षमता एक चुनौती: नीति आयोग के ट्रेड वॉच के अनुसार, भारत अधिकांश प्रमुख आयात बाजारों में प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में अभी भी कम प्रतिनिधित्व रखता है, जहाँ निर्यात हिस्सेदारी अक्सर 2% से कम रहती है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापारिक गणना तक सीमित नहीं है। यह बाजार पहुँच, क्षेत्रीय संरक्षण और निवेश सुगमता को भारत के व्यापक भू-राजनीतिक उद्देश्यों- आपूर्ति शृंखला का विविधीकरण, चीन पर निर्भरता में कमी और हिंद-प्रशांत साझेदारियों को सुदृढ़ करने के साथ समेकित करता है।