Q. मानक प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) से विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (E-PMSMA) की ओर बढ़ना, मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में समय-समय पर होने वाली निगरानी से हटकर लगातार जोखिम प्रबंधन की ओर एक बदलाव है। भारत द्वारा SDG लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में हुई प्रगति के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

June 11, 2026

GS Paper IIGovernance

प्रश्न की मुख्य माँग

  • E-PMSMA): स्थिर निगरानी से सतत जोखिम प्रबंधन की ओर , स्पष्ट कीजिए।
  • E-PMSMA के कार्यान्वयन से संबंधित प्रमुख सीमाएँ एवं चुनौतियां 
  • आगे की राह  

उत्तर

परिचय

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) से विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (E-PMSMA) की ओर संक्रमण, भारत में गर्भावस्था की केवल आवधिक प्रसव-पूर्व जाँच से आगे बढ़कर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की सतत् निगरानी एवं जोखिम प्रबंधन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है। यह मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाते हुए मातृ मृत्यु दर में कमी से संबंधित सतत् विकास लक्ष्य (SDG 3.1) की प्राप्ति में भी सहायक है।

E-PMSMA: स्थिर निगरानी से सतत् जोखिम प्रबंधन की ओर 

  • निरंतर देखभाल: E-PMSMA केवल जोखिमों की पहचान तक सीमित न रहकर गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक निरंतर अनुवर्ती (फॉलो-अप) देखभाल सुनिश्चित करता है।
    • उदाहरण: प्रत्येक उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) को सुरक्षित प्रसव तक व्यक्तिगत रूप से ट्रैक किया जाता है।
  • अतिरिक्त अनुवर्ती जाँचें: सामान्य मासिक जाँचों के विपरीत, E-PMSMA उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) अनिवार्य करता है।
    • उदाहरण: लाभार्थियों एवं आशा कार्यकर्ताओं को तीन अतिरिक्त ANC विजिट्स तक के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • समयबद्ध हस्तक्षेप: यह पहल जटिलताओं की रोकथाम हेतु शीघ्र रेफरल एवं उपचार पर बल देती है।
    • उदाहरण: चिह्नित उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) मामलों को सुरक्षित प्रसव हेतु निकटतम फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) से जोड़ा जाता है।
  • डिजिटल ट्रैकिंग: प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करती है तथा महिलाओं के अनुवर्ती प्रक्रिया से छूट जाने की संभावना को कम करती है।
    • उदाहरण: उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) पंजीकरण एवं अनुवर्ती जाँचों के लिए गर्भवती महिलाओं तथा आशा कार्यकर्ताओं को SMS अलर्ट भेजे जाते हैं।
  • SDG के साथ सामंजस्य: जोखिम-आधारित मातृ देखभाल, मातृ मृत्यु दर में कमी से संबंधित SDG-3.1 की प्राप्ति में प्रत्यक्ष योगदान देती है।
    • उदाहरण: भारत की मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) वर्ष 2014–16 के 130 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति लाख जीवित जन्म हो गई है, जो SDG लक्ष्य 70 से कम की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।

सीमाएँ एवं चुनौतियाँ

  • क्षेत्रीय असमानताएँ: स्वास्थ्य अवसंरचना एवं संस्थागत क्षमता में अंतर के कारण राज्यों के बीच मातृ स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय असमानता बनी हुई है।
    • उदाहरण: नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) 2022–24 के अनुसार, असम का MMR 167 है, जो राष्ट्रीय औसत 87 से कहीं अधिक है।
  • विशेषज्ञों की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसूति विशेषज्ञों एवं अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करती है।
    • उदाहरण: PMSMA आंशिक रूप से “आई प्लेज फॉर 9” (I Pledge for 9) पहल के अंतर्गत निजी विशेषज्ञों की स्वैच्छिक भागीदारी पर निर्भर करता है।
  • कमजोर रेफरल व्यवस्था: कई जिलों में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों तक समय पर पहुँच सुनिश्चित नहीं हो पाती।
    • उदाहरण: ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2023–24 के अनुसार, आवश्यक फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRUs) में से केवल लगभग 55% ही कार्यरत थीं।
  • डिजिटल बहिष्करण: डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली मोबाइल कनेक्टिविटी तथा सटीक डेटा अभिलेखन पर निर्भर करती है।
    • उदाहरण: NFHS-5 के अनुसार, ग्रामीण भारत में केवल 54% महिलाओं ने कभी इंटरनेट का उपयोग किया था।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ: देर से पंजीकरण, जागरूकता की कमी तथा प्रसवपूर्व जाँचों (ANC) का अनियमित उपयोग कार्यक्रम की प्रभावशीलता को सीमित करता है।
    • उदाहरण: NFHS-5 के अनुसार, केवल 58.1% गर्भवती महिलाओं को प्रथम तिमाही में ANC सेवाएँ प्राप्त हुईं।

आगे की राह

  • फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRUs) को सुदृढ़ बनाना: आपातकालीन प्रसूति अवसंरचना तथा विशेषज्ञों की उपलब्धता को बढ़ाया जाए।
    • उदाहरण: सेवावंचित जिलों में व्यापक आपातकालीन प्रसूति एवं नवजात देखभाल (CEmONC) सेवाओं का विस्तार किया जाए।
  • स्वास्थ्य कार्यबल को सशक्त बनाना: मातृ स्वास्थ्य सेवाप्रदाताओं की तैनाती, प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन तंत्र को मजबूत किया जाए।
  • डिजिटल प्रणालियों का एकीकरण: मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की संपूर्ण प्रक्रिया में निर्बाध डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था विकसित की जाए।
    • उदाहरण: E-PMSMA निगरानी प्रणाली को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) से जोड़ा जाए।
  • सामुदायिक पहुँच को गहरा करना: प्रारंभिक ANC पंजीकरण तथा मातृ स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को जमीनी स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।
    • उदाहरण: ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSNDs), स्वयं सहायता समूह (SHGs) तथा जन आरोग्य समितियों का उपयोग मातृ स्वास्थ्य जागरूकता हेतु किया जाए।
  • अभिसरण को बढ़ावा देना: मातृ स्वास्थ्य हस्तक्षेपों को अन्य पूरक योजनाओं के साथ एकीकृत किया जाए।
    • उदाहरण: जननी सुरक्षा योजना (2005), जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (2011) तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (2017) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

निष्कर्ष 

E-PMSMA जोखिमों की केवल पहचान करने से आगे बढ़कर उनके सतत् प्रबंधन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। प्रभावी अनुवर्ती निगरानी, सुदृढ़ रेफरल प्रणाली, डिजिटल ट्रैकिंग तथा विभिन्न योजनाओं के बेहतर अभिसरण के माध्यम से भारत SDG-3.1 के लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी ला सकता है तथा प्रत्येक महिला के लिए सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित कर सकता है।

The shift from standard to Extended Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan (E-PMSMA) marks a transition from static periodic monitoring to continuous risk management in maternal health. Critically analyse the statement in light of India’s progress towards achieving SDG goals. in hindi

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