Q. पेरिस में भारतीय पर्यटकों द्वारा नारे लगाने की हालिया घटना सांस्कृतिक गौरव और नागरिक उत्तरदायित्व के बीच संवेदनशील संतुलन को रेखांकित करती है। एक वैश्वीकृत दुनिया में नागरिक भावना किस प्रकार नैतिक व्यवहार को आकार देती है, इसका विश्लेषण कीजिए और जिम्मेदार सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • वैश्वीकृत दुनिया में नैतिक व्यवहार को आकार देने में नागरिक भावना की भूमिका
  • उत्तरदायी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उपाय।

उत्तर

पेरिस में क्षेत्रीय और राजनीतिक नारे लगाने वाले भारतीय पर्यटकों का व्यवहार, सांस्कृतिक गौरव और नागरिक उत्तरदायित्व के बीच संयमित समन्वय को उजागर करती है। वैश्वीकृत दुनिया में, पहचान की अभिव्यक्ति एक मौलिक अधिकार है, लेकिन जब यह स्थानीय मानदंडों और व्यक्तिगत सीमाओं की उपेक्षा करता है, तो यह साझा “ग्लोबल कॉमन्स” का उल्लंघन करने तथा नकारात्मक रूढ़िवादिता को मजबूत करने का जोखिम उत्पन्न करता है।

वैश्वीकृत दुनिया में नैतिक व्यवहार को आकार देने में नागरिक भावना की भूमिका

  • साझा स्थानों का सम्मान करना: नागरिक बोध यह निर्देशित करता है कि सार्वजनिक क्षेत्र साझा ‘ग्लोबल कॉमन्स’ हैं, जहाँ व्यक्तिगत अभिव्यक्ति को दूसरों की सुख-सुविधाओं का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: पेरिस में वायरल हुए वीडियो में पर्यटकों को एक मूक कलाकार के बार-बार रुकने के इशारों को नजरअंदाज करते हुए दिखाया गया है, जो सार्वजनिक प्रदर्शन की पवित्रता का सम्मान करने में विफलता को दर्शाता है।
  • व्यक्तिगत सीमाओं को बनाए रखना: नैतिक व्यवहार में दूसरों के भौतिक और भावनात्मकता को पहचानना शामिल है, विशेषकर अपरिचित व्यक्तियों या सेवा प्रदाताओं के साथ बातचीत करते समय यह आवश्यक है। 
    • उदाहरण के लिए: इस घटना के आलोचकों ने कहा कि जोर से चिल्लाना और बिना सहमति के सड़क पर प्रदर्शन करने वाले कलाकार के चारों ओर हाथ रखकर घेरा बनाना व्यक्तिगत स्थान और सहमति का उल्लंघन है।
  • स्थानीय मानदंडों का पालन: वैश्वीकृत दुनिया में, नैतिक आचरण के लिए “स्थान की भावना” (जीनियस लोकी) को अपनाने की आवश्यकता होती है, जो विभिन्न संस्कृतियों में महत्त्वपूर्ण रूप से भिन्न होती है। 
    • उदाहरण के लिए: जबकि भारतीय राजनीतिक रैलियों में जोर से नारे लगाना सामान्यीकृत माना जा सकता है, इसे अक्सर यूरोपीय शहरी परिदृश्य में आक्रामक या विघटनकारी माना जाता है।
  • डिजिटल नैतिकता और “रील” संस्कृति: वायरल सामग्री बनाने की चाहत, अक्सर “लाइक्स (likes) ” के लिए सहानुभूति तथा सामाजिक मर्यादा के नैतिक विचारों को दरकिनार कर देती है। 
    • उदाहरण के लिए: विद्वानों का तर्क है कि ऐसी कई घटनाएँ सोशल मीडिया रील्स बनाने के आग्रह से प्रेरित होती हैं, जिससे स्थानीय शांति की कीमत पर प्रदर्शनात्मक राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिलता है।
  • वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देना: नागरिक बोध वाले व्यक्ति अनौपचारिक “ब्रांड एंबेसडर” के रूप में कार्य करते हैं, जहाँ उनका व्यवहार सीधे उनके देश की अंतरराष्ट्रीय धारणा को प्रभावित करता है।
  • संदर्भ के प्रति संवेदनशीलता: वैश्विक दुनिया में नैतिक आचरण के लिए यह समझने की आवश्यकता है कि राजनीतिक या क्षेत्रीय नारे अर्थहीन हो सकते हैं अथवा मेजबान राष्ट्र के लोगों द्वारा इनकी गलत संदर्भ में व्याख्या की जा सकती है।
  • पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता: नागरिक भावना का अर्थ है कूड़ा न फैलाना या अत्यधिक शोर न करना, यह सुनिश्चित करना कि किसी व्यक्ति का ‘पर्यटक पदचिह्न’ सकारात्मक और गैर-बाधाकारी बना रहे।

जिम्मेदार सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उपाय

  • प्रस्थान-पूर्व सांस्कृतिक अभिविन्यास: ट्रैवल एजेंसियों और पर्यटन मंत्रालय को गंतव्य-विशिष्ट शिष्टाचार और सामाजिक मानदंडों पर “सॉफ्ट स्किल्स” डोजियर प्रदान करना चाहिए। 
    • उदाहरण के लिए: जिम्मेदार पर्यटन मंच प्रस्थान से पूर्व यात्रियों को जानकारी देने के लिए यात्रा प्रचालक अनुबंध में “सांस्कृतिक संवेदनशीलता” खंड शामिल करने का सुझाव देते हैं।
  • सोशल मीडिया संवेदनशीलता: प्रभावशाली लोगों और डिजिटल मंचों को ‘एथिकल व्लॉगिंग’ की अवधारणा को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे वायरल जुड़ाव के लिए विघटनकारी व्यवहार को हतोत्साहित किया जा सके। 
    • उदाहरण के लिए: रिस्पॉन्सिबलट्रैवल (#ResponsibleTravel) जैसे हैशटैग को प्रोत्साहित करने से पर्यटकों के ध्यान को प्रदर्शनात्मक कृत्यों से सम्मानजनक पर्यटन की तरफ स्थानांतरित किया जा सकता है।
  • पाठ्यचर्या एकीकरण: कम आयु से ही सहानुभूति और शिष्टाचार के मूल्यों को स्थापित करने के लिए नागरिक बोध और ‘वैश्विक नागरिक शिक्षा’ (Global Citizenship Education) को स्कूल पाठ्यक्रम में एकीकृत किया जाना चाहिए।
  • सलाहकारी सूचनाएँ: विदेश मंत्रालय (MEA) “क्या करें और क्या न करें” संबंधित सलाह जारी कर सकता है, जो स्थानीय कानूनों और सामाजिक शिष्टाचार का सम्मान करने के लिए नागरिकों को जागरूक करते हो।
  • समुदाय-आधारित सहकर्मी विनियमन: प्रवासी संगठन और यात्रा समूह सहकर्मी नियामकों के रूप में कार्य कर सकते हैं, जो अपने दायरे में असभ्य व्यवहार को दूर कर सकते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: पेरिस घटना के खिलाफ भारतीय प्रवासियों की ऑनलाइन प्रतिक्रिया से पता चलता है कि कैसे ‘डिजिटल सहकर्मी दबाव’ सामाजिक अनुशासन को लागू कर सकता है।
  • उत्तरदायी पर्यटन को प्रोत्साहित करना: एयरलाइंस या लॉयल्टी प्रोग्राम उन यात्रियों को पुरस्कार या ‘नागरिक क्रेडिट’ प्रदान कर सकते हैं जो अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार पर ऑनलाइन मॉड्यूल पूरा करते हैं।
  • ‘सिविक बांड’ का कार्यान्वयन: कुछ विशेषज्ञ समूह यात्रियों के लिए वापसी योग्य ‘सामाजिक अनुशासन शुल्क’ का सुझाव देते हैं, जो कोई स्थानीय शिकायत दर्ज नहीं होने पर वापस कर दिया जाता है।

निष्कर्ष

नागरिक बोध वह क्षमता है, जो एक पर्यटक को अतिथि में बदल देती है। जैसा कि भारत विश्व स्तर पर अपनी सांस्कृतिक सॉफ्ट पॉवर का दावा करना चाहता है, उसके नागरिकों को अपनी संस्कृति थोपने के बजाय सहानुभूति के साथ उसकी अभिव्यक्ति करना चाहिए। नागरिक बोध के साथ राष्ट्र-राज्यों के लगाव को संतुलित करके, “भारतीय यात्री यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनका सांस्कृतिक गौरव शर्मिंदगी के बजाय प्रशंसा का स्रोत बना रहे, जो वास्तव में समावेशी और सम्मानजनक वैश्विक समाज को बढ़ावा दे।

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