प्रश्न की मुख्य माँग
- लोगों के साथ ‘प्रत्यक्ष राजनीतिक संपर्क’ का महत्व।
- यह सुनिश्चित करने में चुनौतियां हैं।
- आगे की राह।
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उत्तर
पॉलिटिकल पैराशूटिस्ट (Political Parachutist) वह व्यक्ति होता है जिसे पूर्व राजनीतिक अनुभव के बिना राजनीति या उच्च पद पर नियुक्त किया जाता है प्रायः नौकरशाही, व्यवसाय या विशेषज्ञता के क्षेत्र से। यद्यपि ऐसे लोग प्रशासनिक दक्षता लाते हैं, परंतु उनके पास वह जन-संपर्क और सामाजिक जुड़ाव नहीं होता जो लोकतांत्रिक वैधता का मूल आधार है। यह वैधता केवल दीर्घकालिक जनसंलग्नता और राजनीतिक सहभागिता से प्राप्त होती है।
जनता से ‘प्रत्यक्ष राजनीतिक जुड़ाव’ का महत्व
- जनता की आवश्यकताओं की समझ विकसित करता है: लंबे समय तक जनता से जुड़ाव रखने वाले नेता स्थानीय आकांक्षाओं और वास्तविकताओं को बेहतर समझते हैं, जिससे नीतियाँ अधिक सटीक बनती हैं।
- लोकतांत्रिक वैधता सुनिश्चित करता है: प्रत्यक्ष जनसंपर्क नेताओं को मतदाताओं के प्रति जवाबदेह बनाता है, जिससे प्रतिनिधित्व और भागीदारी दोनों मजबूत होते हैं।
- नीतियों की प्रभावशीलता बढ़ाता है: राजनीतिक अनुभव वाले नेता तकनीकी सुझावों को जन-आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल पाते हैं।
- उदाहरण: पैराशूटिस्ट कुशल नीति बना सकते हैं, लेकिन वे उसके सामाजिक या राजनीतिक प्रभाव को समझने में चूक जाते हैं।
- पार्टी लोकतंत्र को मजबूत करता है: जमीनी स्तर के नेता स्वतंत्र पहचान और आंतरिक निर्णय-निर्माण में योगदान देते हैं।
- चुनावी लोकतंत्र की भावना को बनाए रखता है: राजनीति केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधित्व है; अतः नेताओं को जनता के बीच से ही उभरना चाहिए।
प्रत्यक्ष राजनीतिक जुड़ाव सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ
- राजनीतिक अभिजात वर्ग का प्रभुत्व: पार्टी संरचनाओं में वंशवाद और उच्च नेतृत्व का नियंत्रण जमीनी नेताओं के उभार को सीमित करता है।
- पैराशूटिस्ट संस्कृति का उदय: नौकरशाह, कारोबारी और पेशेवर वर्ग का राजनीति में प्रवेश मैदान-आधारित अनुभव को कमजोर करता है।
- उदाहरण: कई पूर्व नौकरशाह चुनावों से पहले राजनीतिक दलों में शामिल होकर “ट्रॉफी उम्मीदवार” बन जाते हैं।
- राज्यसभा पर अत्यधिक निर्भरता: ऊपरी सदन के माध्यम से निरंतर प्रवेश जनता से प्रत्यक्ष जुड़ाव को कमजोर करता है।
- उदाहरण: पैराशूटिस्ट अक्सर राज्यसभा मार्ग चुनते हैं, जिससे वे जनमत की परीक्षा से बच जाते हैं।
- मीडिया-आधारित लोकप्रियता की राजनीति: मीडिया दृश्यता को जनसंपर्क का विकल्प बना लिया गया है, जिससे वास्तविक क्षेत्रीय कार्य गौण हो जाता है।
- शक्ति का केंद्रीकरण: पार्टी नेतृत्व के नियंत्रण के कारण स्वतंत्र जमीनी आवाजें दब जाती हैं।
- उदाहरण: पैराशूटिस्ट शीर्ष नेतृत्व के प्रति वफादार रहते हैं, जनता की आकांक्षाओं के प्रतिनिधि नहीं बनते।
आगे की राह
- क्षेत्रीय राजनीतिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहन: भविष्य के नेताओं विशेषकर पेशेवरों को राजनीति में आने से पहले स्थानीय स्तर पर कार्यानुभव प्राप्त करना चाहिए।
- उदाहरण: सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आने वाले व्यक्ति पहले स्थानीय समाजसेवा या संगठनात्मक कार्य करें।
- आंतरिक पार्टी लोकतंत्र को बढ़ावा: नियमित आंतरिक चुनाव से जमीनी कार्यकर्ताओं को ऊपर आने का अवसर मिलेगा, जिससे पैराशूटिंग की प्रवृत्ति घटेगी।
- राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया में सुधार: लगातार कार्यकालों पर सीमा तय की जाए और केवल उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाए जिनका सार्वजनिक जुड़ाव सिद्ध हो।
- विशेषज्ञों को सलाहकार के रूप में मान्यता: पेशेवर लोग नीति सलाहकार या विशेषज्ञ के रूप में योगदान दे सकते हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मार्ग नहीं बनाना चाहिए।
- सार्वजनिक जवाबदेही को सुदृढ़ करना: सिटिजन चार्टर, सोशल ऑडिट जैसे तंत्र यह सुनिश्चित करें कि नेता लगातार जन-अपेक्षाओं से जुड़े रहें।
निष्कर्ष
पॉलिटिकल पैराशूटिस्टों का उदय विशेषज्ञता और जनप्रतिनिधित्व के बीच की खाई को दर्शाता है। यद्यपि विशेषज्ञ प्रशासनिक मूल्य जोड़ते हैं, परंतु वास्तविक राजनीतिक वैधता केवल जनता के विश्वास से आती है। अतः भारत में लोकतंत्र को सशक्त और प्रामाणिक बनाए रखने के लिए जमीनी राजनीति और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र को सुदृढ़ करना अनिवार्य है।
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