संदर्भ
हाल ही में भारत ने इंडिया AI इंपैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 में भारत-प्रथम कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं को उन्नत करने हेतु तीन सॉवरन AI मॉडल (Sovereign AI Models) प्रस्तुत किए।
सॉवरन AI मॉडल के बारे में
- सॉवरन AI मॉडल से अभिप्राय ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्रों से है, जिन्हें किसी देश के अधिकार क्षेत्र के भीतर विकसित, प्रशिक्षित, तैनात और शासित किया जाता है, जिससे डेटा, अवसंरचना तथा नियामकीय ढाँचों पर राष्ट्रीय नियंत्रण सुनिश्चित होता है।
- इंडिया सॉवरन AI मॉडल: ये ₹10,000 करोड़ के इंडियाAI मिशन के अंतर्गत संचालित होते हैं, जिसे मार्च 2024 में स्वीकृत किया गया था ताकि घरेलू आधारभूत मॉडल, कंप्यूट अवसंरचना तथा सार्वजनिक AI अनुप्रयोगों का निर्माण किया जा सके।
- मुख्य विशेषताएँ
- घरेलू डेटा नियंत्रण: प्रशिक्षण डेटासेट राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर स्रोतित, संगृहीत और संसाधित किए जाते हैं।
- स्थानीय कंप्यूट अवसंरचना: संप्रभु क्लाउड सर्वरों तथा सरकार-समर्थित GPU क्लस्टरों का उपयोग।
- नियामकीय पर्यवेक्षण: राष्ट्रीय AI नीतियों, साइबर सुरक्षा मानकों तथा डेटा संरक्षण कानूनों के अंतर्गत शासित।
- रणनीतिक स्वायत्तता: विदेशी बिग टेक प्लेटफॉर्मों और बाह्य प्रौद्योगिकीय पारिस्थितिक तंत्रों पर निर्भरता में कमी।
| मॉडल |
मुख्य विशेषताएँ |
अनुप्रयोग |
| सर्वम् AI |
- दो ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs)
- एक 30-बिलियन-पैरामीटर मॉडल और एक 105-बिलियन-पैरामीटर मॉडल, दोनों भारत में शून्य से प्रशिक्षित।
- भारतीय भाषाओं और शासन आवश्यकताओं पर केंद्रित
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सार्वजनिक सेवा प्रदायगी, एंटरप्राइज AI,
सरकारी चैटबॉट, बहुभाषी डिजिटल प्लेटफॉर्म |
| Gnani.ai |
- वॉयस-फर्स्ट AI मॉडल
- वाक् पहचान और संवादात्मक AI;
- भारतीय उच्चारणों और बोलियों के लिए अनुकूलित।
- उच्च-सटीकता वाक्-से-पाठ (ASR) (<5% WER भारतीय भाषाओं में),
- रियल-टाइम वॉयस बायोमेट्रिक्स/एंटी-स्पूफिंग, शून्य-शॉट वॉयस क्लोनिंग, तथा मानव-इन-द-लूप एस्केलेशन
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ग्राहक समर्थन स्वचालन, बैंकिंग, दूरसंचार, ई-शासन वॉयस इंटरफेस |
| भारतजेन |
बहुभाषी जनरेटिव AI
- यह सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है, वर्तमान क्षमताएँ 15 से अधिक भाषाओं (हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु आदि सहित) में पाठ, वाक् और विजन के अंतर्गत उपलब्ध हैं।
- कंसोर्टियम-नेतृत्वित आधारभूत मॉडल
- भारतीय डेटासेट पर प्रशिक्षित
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शिक्षा, अनुसंधान, भाषा अनुवाद, समावेशी डिजिटल सेवाएँ |
सॉवरन AI मॉडलों का महत्त्व
- प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता: घरेलू आधारभूत मॉडलों और कंप्यूटिंग क्षमता के निर्माण के माध्यम से वैश्विक बिग टेक AI प्रणालियों पर निर्भरता को कम करता है।
- डेटा संप्रभुता एवं शासन: सुनिश्चित करता है कि AI प्रणालियाँ भारत के भीतर प्रशिक्षित, तैनात और विनियमित हों, जिससे वे राष्ट्रीय डेटा संरक्षण तथा रणनीतिक हितों के अनुरूप रहें।
- समावेशी डिजिटल विकास: भारत की विविध भाषायी और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप बहुभाषी तथा वॉयस-आधारित AI समाधान को प्रोत्साहित करता है।
इंडियाAI मिशन
नोडल मंत्रालय / कार्यान्वयन निकाय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रारंभ, इसका कार्यान्वयन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) के अंतर्गत इंडियाAI स्वतंत्र व्यवसाय प्रभाग द्वारा किया जाता है।
बजटीय प्रावधान: इस मिशन के लिए वर्ष 2024–2030 की अवधि हेतु लगभग ₹10,372 करोड़ का वित्तीय आवंटन निर्धारित है।
प्रमुख उद्देश्य
- AI कंप्यूट अवसंरचना: बड़े पैमाने पर GPU-आधारित कंप्यूट क्षमता का विकास तथा स्टार्ट-अप्स और शोधकर्ताओं को अनुदानित पहुँच प्रदान करना।
- स्वदेशी AI मॉडल एवं नवाचार: महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में संप्रभु आधारभूत और बहु-मोडल AI मॉडलों के विकास का समर्थन।
- डेटा एवं अनुप्रयोग पारिस्थितिकी तंत्र: AIKosh डेटासेट मंच का सृजन तथा स्वास्थ्य, कृषि, शासन और MSMEs में AI अनुप्रयोगों को प्रोत्साहन।
- कौशल विकास एवं उत्तरदायी AI: AI शिक्षा का विस्तार, टियर 2/3 शहरों में डेटा लैब्स की स्थापना, तथा सुरक्षित और विश्वसनीय AI रूपरेखाओं को प्रोत्साहित करना।
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