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आणविक बादल

21 Mar 2026

संदर्भ

वैज्ञानिकों ने पहली बार सूक्ष्म आणविक बादलों L1604 और L121 के चारों ओर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन किया।

संबंधित तथ्य 

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के आर्यभट्ट अवलोकन विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES) द्वारा असम विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित अध्ययन।
  • कार्यप्रणाली: नैनीताल स्थित 104 सेंटीमीटर के ARIES टेलीस्कोप पर लगे ARIES इमेजिंग पोलारिमीटर (AIMPOL) का उपयोग करके R-बैंड पोलारिमेट्री।

मुख्य निष्कर्ष

  • चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता: दोनों बादल उप-क्रांतिक हैं, जिसका अर्थ है कि आवरण स्तर पर चुंबकीय ऊर्जा, विक्षोम और गुरुत्वाकर्षण पर प्रभावी होती है।

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  • सघन कोर: चारों तरफ चुंबकीय क्षेत्र की मौजूदगी के बावजूद, सघन कोर में गुरुत्वाकर्षण का प्रभुत्व हो सकता है, जिससे वे तारा निर्माण के लिए उपयुक्त क्षेत्र बन जाते हैं।
  • बादलों के बीच अंतर
    • L1604: विशाल और सघन, चुंबकीय क्षेत्र कम व्यवस्थित।
    • L121: कम सघन, चुंबकीय क्षेत्र प्रबल और व्यवस्थित, गुरुत्वाकर्षण में कमी से कम प्रभावित।
  • चुंबकीय क्षेत्र एक अदृश्य शक्ति के रूप में कार्य करते हैं, जो तारा निर्माण की प्रक्रिया को धीमा करते हैं और आकाशगंगा में गैस के तेजी से क्षय को रोकते हैं।

अध्ययन का महत्त्व

  • तारा निर्माण का नियमन: यह दर्शाता है कि चुंबकत्व आणविक बादलों में तारा निर्माण की गति को नियंत्रित करता है।
  • आकाशगंगा का विकास: यह सभी गैसों को एक साथ तारों में परिवर्तित होने से रोकता है, जिससे तारा निर्माण की दर स्थिर बनी रहती है।
  • अवलोकन संबंधी महत्त्वपूर्ण उपलब्धि: छोटे आणविक बादलों में चुंबकीय संरचना का पहला प्रत्यक्ष मानचित्रण।
  • भविष्य का शोध: तारा निर्माण में गुरुत्वाकर्षण, अशांति और चुंबकीय क्षेत्रों की परस्पर क्रिया को समझने में सहायक।

आणविक बादलों के प्रकार

  1. बोक ग्लोब्यूल्स (Bok Globules): ये छोटे, घने बादल होते हैं, जो अक्सर एकल तारे के निर्माण के स्थल होते हैं।
  2. गहन बादल (Dark Clouds): ये आकाश में काले धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं; इतने घने होते हैं कि तारों के प्रकाश को रोक देते हैं।
  3. विशाल आणविक बादल (GMC): ये हजारों सौर द्रव्यमान वाले विशाल बादल होते हैं, जो अक्सर तारा समूहों का निर्माण करते हैं।

आणविक बादलों के बारे में

  • आणविक बादल अंतरतारकीय गैस और धूल के ठंडे, सघन क्षेत्र होते हैं जहाँ अणु, विशेषकर आणविक हाइड्रोजन (H₂), बनते और बने रहते हैं।
  • इन्हें अक्सर ‘तारकीय नर्सरी’ (Stellar Nurseries) कहा जाता है क्योंकि ये आकाशगंगाओं में तारा निर्माण के प्राथमिक स्थल होते हैं।
  • उदाहरण के लिए
    • ओरियन मॉलिक्यूलर क्लाउड कॉम्प्लेक्स: पास स्थित तारा निर्माण क्षेत्र।
    • टॉरस मॉलिक्यूलर क्लाउड: कम द्रव्यमान वाले तारों के निर्माण से समृद्ध होता है।
    • L1604 और L121: छोटे आणविक बादल, जिनका हाल ही में चुंबकीय क्षेत्रों के लिए अध्ययन किया गया है।

L1604 और L121: आणविक बादल

बादल  स्थान  दूरी  द्रव्यमान और घनत्व चुंबकीय क्षेत्र की विशेषताएँ
L1604 आकाशगंगा का प्रतिकेंद्र लगभग 816 पारसेक उच्च घनत्व, विशाल चुंबकीय क्षेत्र कमजोर और कम व्यवस्थित होता है; सघन कोर में गुरुत्वाकर्षण का प्रभुत्व होता है।
L121 आकाशगंगा के केंद्र की ओर 124 पारसेक कम घनत्व, कम द्रव्यमान अधिक मजबूत और व्यवस्थित चुंबकीय क्षेत्र; गुरुत्वाकर्षण पतन का प्रतिरोध करता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • तापमान: बहुत ठंडा, आमतौर पर 10–30 K, जिससे अणु मौजूद रह सकते हैं।
  • घनत्व: अन्य अंतरतारकीय क्षेत्रों की तुलना में उच्च, आमतौर पर 100–1,000,000 कण प्रति सेंटीमीटर³।
  • संरचना: मुख्य रूप से आणविक हाइड्रोजन (H₂), हीलियम, CO और अन्य अणुओं की थोड़ी मात्रा; धूल के कण द्रव्यमान का 1% भाग हैं।
  • आकार: छोटे बोक ग्लोब्यूल्स (1–5 प्रकाश वर्ष) से ​​लेकर विशाल आणविक बादलों (GMCs, 10–100 प्रकाश वर्ष) तक।
  • द्रव्यमान: कुछ सौर द्रव्यमान (छोटे बादल) से लेकर लाखों सौर द्रव्यमान (GMCs) तक हो सकता है।

आणविक बादलों का महत्त्व

  • तारों का जन्मस्थान: आणविक बादल तारों के लिए नर्सरी का कार्य करते हैं, जहाँ घने क्षेत्रों के गुरुत्वाकर्षण संकुचन से तारों का निर्माण होता है।
    • ये आकाशगंगाओं, जैसे कि मिल्की वे, में नए तारों के निरंतर निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
  • ग्रहीय मंडल निर्माण में भूमिका: तारों का निर्माण करने वाले ये ही संकुचनशील कोर ‘प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क’ के निर्माण का कारण भी बनते हैं, जिनसे अंततः ग्रह और सौर मंडल बनते हैं।
  • तारा निर्माण का नियमन: आणविक बादल गुरुत्वाकर्षण, ऊष्मीय दाब, विक्षोम और चुंबकीय क्षेत्रों की परस्पर क्रिया के माध्यम से तारा निर्माण की दर को नियंत्रित करते हैं।
    • इससे आकाशगंगाओं के गैस भंडारों का तेजी से क्षय नहीं होता है।
  • आकाशगंगा विकास में योगदान: ये गैस और धूल के भंडार के रूप में कार्य करते हैं, जो समय के साथ आकाशगंगाओं की संरचना तथा विकास को प्रभावित करते हैं।
    • इन बादलों के भीतर तारा निर्माण आकाशगंगाओं की तारकीय संख्या और जीवनचक्र को निर्धारित करता है।
  • ब्रह्मांड का रासायनिक संवर्द्धन: आणविक बादलों में जटिल अणु (जैसे- CO, कार्बनिक यौगिक) होते हैं, जो ब्रह्मांड के रासायनिक विकास में योगदान करते हैं।
    • ये वे स्थान हैं, जहाँ पूर्व-जैविक अणुओं का निर्माण हो सकता है।
आणविक बादल

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