दवा ट्रेडमार्क विवाद

28 Mar 2026

संदर्भ

नोवो नॉर्डिस्क और डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज (DRL) के मध्य ट्रेडमार्क विवाद, भारत में भ्रामक रूप से समान दवा नामों के विरुद्ध कड़े मानकों को रेखांकित करता है।

विवाद की पृष्ठभूमि

  • नोवो नॉर्डिस्क ने ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में मामला दायर किया।
  • विवाद DRL द्वारा प्रस्तावित ब्रांड नाम ओलिंविक (Olymviq) को लेकर उत्पन्न हुआ, जिसे वजन घटाने/मोटापे के लिए प्रयुक्त ओजेंपिक (Ozempic) के साथ ध्वन्यात्मक रूप से समान बताया गया।
  • DRL ने यथास्थिति बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की, जिसके तहत विवादित नाम के अंतर्गत आगे का निर्माण/विपणन रोक दिया गया।

वजन घटाने वाली दवाओं के बारे में

  • सेमाग्लूटाइड (Semaglutide)-आधारित उपचार: सेमाग्लूटाइड एक जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट है, जिसका उपयोग टाइप-2 मधुमेह के प्रबंधन और वजन घटाने के लिए किया जाता है।
    • इसे ओजेंपिक और वेगोवी जैसे ब्रांडों के तहत विश्व स्तर पर बेचा जाता है।
  • भारत में जेनेरिक दवा का प्रवेश: डीआरएल ने ‘ओबेदा‘ ब्रांड के तहत एक जेनेरिक सेमाग्लूटाइड फॉर्मूलेशन लॉन्च किया।
    • कंपनी ने अन्य ब्रांड नामों पर भी विचार किया, जिसके कारण ट्रेडमार्क विवाद उत्पन्न हुए।
  • पेटेंट समाप्ति और बाजार प्रभाव: सेमाग्लूटाइड के पेटेंट की समाप्ति से जेनेरिक निर्माताओं के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
    • इससे प्रतिस्पर्द्धा बढ़ने, कीमतों में कमी आने तथा मधुमेह-रोधी और वजन घटाने वाली दवाओं की उपलब्धता में सुधार की अपेक्षा है।

मामले में संभावित उल्लंघन

  • दवा नामों में भ्रामक समानता: ध्वन्यात्मक या दृश्य रूप से समान ट्रेडमार्क (जैसे, ‘ओलिंविक’ बनाम ‘ओजेंपिक’) का उपयोग उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है।
    • यह कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड बनाम कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड मामले में प्रतिपादित भ्रामक समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो दवाओं की कड़ी जाँच अनिवार्य करता है।
  • ट्रेडमार्क कानून (भारत) का उल्लंघन: ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 की धारा 11 भ्रम पैदा करने वाले चिह्नों के पंजीकरण पर रोक लगाती है।
    • जन स्वास्थ्य जोखिमों के कारण औषधीय उत्पादों में मामूली समानता को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय नामकरण मानकों (INN System) का उल्लंघन: अंतरराष्ट्रीय गैर-स्वामित्व नामों (INN) संबंधी दिशा-निर्देशों का अनुपालन न करना।
    • आईएनएन से व्युत्पन्न दवाओं के नाम स्पष्ट और भ्रामक न होने चाहिए ताकि उनका दुरुपयोग रोका जा सके।
    • ट्रेडमार्क अधिनियम की धारा 13 के अनुसार, दवा ट्रेडमार्क के लिए, सक्रिय औषधीय घटक की पहचान करने वाले अंतरराष्ट्रीय गैर-स्वामित्व नाम (INN) प्रकृति में गैर-स्वामित्व वाले होते हैं और उन पर एकाधिकार नहीं किया जा सकता है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम: भ्रामक दवा नाम गलत नुस्खों, वितरण त्रुटियों और प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणामों का कारण बन सकते हैं।
    • न्यायालय इस बात पर बल देते हैं कि “दवाएँ मिठाई नहीं, बल्कि विष हैं”, अतः अधिक नियामक सावधानी आवश्यक है।
  • नियामकीय और नैतिक अनुपालन का उल्लंघन: सुरक्षित औषधि अनुमोदन और लेबलिंग के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन जैसे निकायों के मानदंडों का उल्लंघन।
    • यह फार्मास्यूटिकल विपणन और ब्रांडिंग में नैतिक मानकों को भी कमजोर करता है।

अंतरराष्ट्रीय गैर-स्वामित्व नाम (INN) के बारे में

  • INN ऐसे विशिष्ट, वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त जेनेरिक नाम होते हैं, जो औषधीय पदार्थों या सक्रिय अवयवों को प्रदान किए जाते हैं।
  • उत्पत्ति: INN प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1950 में हुई और यह वर्ष 1953 में क्रियाशील बनी।
    • इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विकसित किया गया, ताकि विभिन्न देशों में दवाओं के लिए एक मानकीकृत तथा सार्वजनिक-क्षेत्र नामकरण प्रणाली स्थापित की जा सके।
  • विशेषताएँ
    • दवाओं के वर्ग को दर्शाने के लिए सामान्य प्रत्ययों (stems) का उपयोग किया जाता है (जैसे “-olol” बीटा-ब्लॉकर्स के लिए)।
    • यह गैर-स्वामित्व स्वरूप बनाए रखता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सुलभता सुनिश्चित होती है और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलता है।
  • भूमिका और महत्त्व
    • INN ब्रांड नामों के बजाय सक्रिय अवयव की पहचान करते हैं, जिससे सुरक्षित प्रिस्क्रिप्शन और दवा वितरण सुनिश्चित होता है।
    • इनका व्यापक उपयोग फार्माकोपिया, दवा लेबलिंग और वैज्ञानिक साहित्य में किया जाता है।
    • यह एक ही दवा के लिए अनेक ब्रांड नामों से उत्पन्न भ्रम को कम करने में सहायक होते हैं।

विवाद के निहितार्थ

  • नवाचार बनाम सुलभता: यह पेटेंट संरक्षण (नवाचार के प्रोत्साहन) और व्यापक जन-सुलभता के लिए किफायती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता के मध्य तनाव को उजागर करता है।
  • बढ़ती बाजार प्रतिस्पर्द्धा: यह पेटेंट समाप्ति और जेनेरिक कंपनियों के प्रवेश के बाद भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा को दर्शाता है।
  • ट्रेडमार्क सुदृढ़ीकरण: यह महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य उत्पादों में भ्रम को रोकने हेतु ट्रेड मार्क अधिनियम, 1999 के अंतर्गत सशक्त प्रवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा: यह चिकित्सकीय त्रुटियों से बचाव और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दवा नामकरण के कड़े विनियमन पर बल देता है।

निष्कर्ष

यह मामला भारत के सख्त फार्मास्यूटिकल ट्रेडमार्क ढाँचे को रेखांकित करता है, जो तीव्र गति से विकसित हो रहे दवा बाजार में रोगी सुरक्षा, जेनेरिक प्रतिस्पर्द्धा और बौद्धिक संपदा संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है।

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.