Q. अंतर्देशीय मत्स्य पालन, विशेष रूप से जलाशय आधारित मत्स्य पालन, भारत के ब्लू इकॉनोमी परिवर्तन की कुंजी है। इस क्षेत्र में अंतर्निहित चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और बताइए कि क्लस्टर आधारित रणनीति और हालिया बजट पहलों का उद्देश्य इन्हें कैसे संबोधित करना है। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • ब्लू इकोनॉमी के लिए अंतर्देशीय मत्स्यपालन के महत्त्व को समझाइए।
  • अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र की चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
  • क्लस्टर-आधारित रणनीति और बजटीय हस्तक्षेप का उल्लेख कीजिए।

उत्तर

भारत की ब्लू इकोनॉमी की परिकल्पना में अंतर्देशीय मत्स्यपालन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। बढ़ते उत्पादन और जलाशय मत्स्यपालन जैसे नवाचारों के साथ यह क्षेत्र रोजगार, पोषण और निर्यात की महत्त्वपूर्ण संभावनाएँ प्रदान करता है, किंतु इसमें मौजूद संरचनात्मक चुनौतियाँ लक्षित नीतिगत तथा क्लस्टर-आधारित हस्तक्षेपों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

मुख्य भाग

ब्लू इकोनॉमी के लिए अंतर्देशीय मत्स्यपालन का महत्त्व 

  • आर्थिक प्रेरक: अंतर्देशीय मत्स्यपालन उत्पादन में प्रमुख हिस्सेदारी रखता है, जिससे यह विकास का केंद्रीय आधार बनता है।
    • उदाहरण: भारत के कुल मत्स्य उत्पादन का लगभग 75% अंतर्देशीय स्रोतों से आता है।
  • उत्पादन में वृद्धि: तेजी से बढ़ता उत्पादन इस क्षेत्र की गतिशीलता और विस्तार क्षमता को दर्शाता है।
    • उदाहरण: वर्ष 2013–14 से अब तक मत्स्य उत्पादन में 106% वृद्धि होकर यह 197.75 लाख टन तक पहुँच गया है।
  • जलाशयों की क्षमता: बड़े अप्रयुक्त जल संसाधन विस्तार की अपार संभावनाएँ प्रदान करते हैं।
    • उदाहरण: जलाशयों का क्षेत्रफल लगभग 31.5 लाख हेक्टेयर है, जिससे लगभग 18 लाख टन उत्पादन होता है।
  • आजीविका समर्थन: यह ग्रामीण समुदायों के लिए आय के विविध स्रोत प्रदान करता है।
    • उदाहरण: बजट 2026 में मछुआरों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
  • निर्यात क्षमता: यह भारत की वैश्विक मत्स्य क्षेत्र में स्थिति को मजबूत करता है।
    • उदाहरण: भारत, विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य और जलीय कृषि उत्पादक है।

अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र की चुनौतियाँ 

  • कम उत्पादकता: तकनीक के सीमित उपयोग के कारण जलाशयों की उत्पादकता संभावित स्तर से कम बनी हुई है।
    • उदाहरण: विशाल क्षेत्र होने के बावजूद उत्पादन केवल लगभग 18 लाख टन है।
  • विखंडित प्रशासन: विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी से समन्वय की कमी उत्पन्न होती है।
    • उदाहरण: अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र राज्य और स्थानीय स्तर के अधिकार क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • बाजार संबंधी कमी: कमजोर आपूर्ति शृंखला के कारण किसानों की लाभप्रदता प्रभावित होती है।
    • उदाहरण: बजट में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और सहकारी समितियों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
  • कौशल की कमी: तकनीकी ज्ञान की कमी से केज कल्चर (cage culture) जैसी उन्नत पद्धतियों को अपनाने में बाधा आती है।
  • अवसंरचना की कमी: कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव से मूल्य संवर्द्धन सीमित रहता है।

क्लस्टर-आधारित रणनीति एवं बजटीय हस्तक्षेप

  • क्लस्टर दृष्टिकोण: भौगोलिक रूप से समूहित क्षेत्रों में मत्स्यपालन का विकास कर संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना।
    • उदाहरण: बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास का प्रस्ताव।
  • प्रौद्योगिकी अपनाना: उत्पादकता बढ़ाने के लिए केज कल्चर और वैज्ञानिक मत्स्य पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • बाजार संपर्क: किसानों की संगठित बाजारों तक पहुँच को सुदृढ़ करना और बिचौलियों की भूमिका कम करना।
    • उदाहरण: मछुआरा उत्पादक संगठनों (FPOs) को समर्थन।
  • संस्थागत समर्थन: सहकारी समितियों और सामूहिक प्रयासों को मत्स्य विकास के प्रमुख साधन के रूप में प्रोत्साहित करना।
    • उदाहरण: बजट में सहकारी-आधारित मत्स्य मॉडल पर बल।
  • आय पर फोकस: एकीकृत मूल्य शृंखला विकास और उत्पादकता वृद्धि के माध्यम से मछुआरों की आय बढ़ाने को प्राथमिकता देना।
    • उदाहरण: बजट में मछुआरों की आय बढ़ाने का स्पष्ट लक्ष्य।

निष्कर्ष

जलाशय-आधारित मत्स्यपालन को क्लस्टर रणनीतियों और नीतिगत समर्थन के माध्यम से सशक्त बनाकर अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र की पूर्ण क्षमता को विकसित किया जा सकता है। संरचनात्मक बाधाओं का समाधान करना आवश्यक होगा, ताकि सतत् ब्लू इकोनॉमी विकास, आजीविका सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और भारत की वैश्विक प्रतिेस्पर्द्धात्मकता सुनिश्चित की जा सके।

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