संदर्भ
केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और सिक्किम के ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पाँचवे वित्त आयोग (XV-FC) से संबंधित अनुदान जारी किए हैं।
संबंधित तथ्य
- इसने हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और त्रिपुरा को दी जाने वाली बंधित और गैर-बंधित अनुदानों के रोके गए हिस्सों को भी जारी कर दिया है।
15वें वित्त आयोग (XV-FC) के अनुदानों के बारे में
- ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) को केंद्रीय वित्त आयोग से बद्ध (Tied – 60%) और अबद्ध (Untied – 40%) अनुदान के रूप में वित्तीय हस्तांतरण प्राप्त होता है।
- उद्देश्य: विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करना, सेवा वितरण में सुधार करना और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में बढोतरी।
- संस्थागत ढाँचा: भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल और स्वच्छता विभाग) के माध्यम से, राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए XV-FC (15वें वित्त आयोग) अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है।
- कार्यकाल: धनराशि वार्षिक रूप से दो किस्तों में जारी की जाती है।
- अनुदान का उपयोग
- अबद्ध अनुदान (Untied Grants): इनका उपयोग पंचायती राज संस्थानों/ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की 11वीं अनुसूची में निहित 29 विषयों के तहत स्थानीय विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा। हालाँकि, इनका उपयोग वेतन और अन्य स्थापना लागतों के लिए नहीं किया जा सकता है।
- बद्ध अनुदान (Tied Grants): इनका उपयोग निम्नलिखित बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है:-
- स्वच्छता और ‘ओडीएफ’ (ODF) स्थिति का रखरखाव; इसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार तथा विशेष रूप से मानव मल और कीचड़ (Fecal sludge) प्रबंधन शामिल होना चाहिए।
- पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण (Water recycling)।
बद्ध और अबद्ध अनुदान के बारे में
- बद्ध अनुदान (Tied Grants): ये अनुदान विशिष्ट उद्देश्यों या क्षेत्रों के लिए दिए जाते हैं और इनका उपयोग सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल निर्धारित गतिविधियों के लिए ही किया जाना चाहिए।
- अबद्ध अनुदान (Untied Grants): ये अनुदान खर्च पर बिना किसी विशिष्ट प्रतिबंध के प्रदान किए जाते हैं, जिससे स्थानीय निकायों को अपनी स्थानीय प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं (वेतन जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर) के आधार पर इनका उपयोग करने की अनुमति मिलती है।
| श्रेणी |
क्षेत्र |
कार्य/गतिविधियाँ |
| बद्ध अनुदान |
पेयजल आपूर्ति |
वर्षा जल संचयन, जल निकायों का पुनरुद्धार, जल का पुन: उपयोग। |
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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन |
स्वच्छता (ठोस और अपशिष्ट जल प्रबंधन), स्टार रेटिंग प्राप्त करना (MoHUA मानदंड)। |
| अबद्ध (बुनियादी) अनुदान |
जलापूर्ति |
घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोग |
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स्वच्छता |
सेप्टेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन |
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जलनिकास |
भूमिगत जल निकासी व्यवस्था |
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परिवहन बुनियादी सुविधाएँ |
सड़कें, पुल, पैदल रास्ते |
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‘स्टॉर्म वाटर’ |
‘स्टॉर्म वाटर’ निकासी प्रणालियाँ |
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ऊर्जा एवं प्रकाश |
स्ट्रीटलाइट्स, ऊर्जा बचत कार्यक्रम |
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हरित क्षेत्र |
पार्क, उद्यान, खेल के मैदान का विकास |
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नागरिक सुविधाएँ |
कब्रिस्तान, श्मशान/विद्युत श्मशान |
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सार्वजनिक उपयोगिताएँ |
बस स्टैंड, पार्किंग स्थल, सार्वजनिक शौचालय |
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पर्यावरण |
शहरी वानिकी, पर्यावरण संरक्षण, सूचना एवं संचार पर्यावरण संरक्षण गतिविधियाँ। |
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सामाजिक अवसंरचना |
आंगनवाड़ी केंद्र की इमारतें (जलापूर्ति और शौचालय सहित)। |
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शहरी विकास |
झुग्गी बस्ती का विकास और पुनर्वास |
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गरीबी उन्मूलन |
शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम |
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योजना |
शहरी एवं नगर नियोजन |
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विकास योजनाएँ |
वित्तीय एवं सामाजिक विकास योजनाएँ। |