संदर्भ
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ‘मॉन्स माउटन’ क्षेत्र में स्थित MM-4 को चंद्रयान-4 के लिए लैंडिंग स्थल के रूप में चुना है।
चयनित लैंडिंग स्थल: मॉन्स माउटन (MM-4) के बारे में
- मॉन्स माउटन (MM) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित है, जो संभावित जल-बर्फ और प्राचीन भू-वैज्ञानिक अभिलेखों के कारण उच्च वैज्ञानिक महत्त्व का क्षेत्र माना जाता है।
- वैज्ञानिक मूल्यांकन: चार संभावित स्थलों MM-1, MM-3, MM-4 और MM-5 का ऑर्बिटर हाई रेजॉल्यूशन कैमरा (OHRC) के ‘मल्टी-व्यू डेटा सेट’ का उपयोग करके भू-भाग की सुरक्षा और व्यवहार्यता के लिए विश्लेषण किया गया।
- सुरक्षा मानक: जोखिम मूल्यांकन के आधार पर MM-4 को चयनित किया गया, क्योंकि 1 किमी. × 1 किमी. क्षेत्र में जोखिम न्यूनतम है, औसत ढलान लगभग 5 डिग्री, औसत ऊँचाई 5,334 मीटर है तथा यहाँ सुरक्षित लैंडिंग ग्रिडों की उपलब्धता सबसे अधिक है।
चंद्रयान-4 मिशन के बारे में
- चंद्रयान-4 भारत का पहला चंद्र नमूना-वापसी मिशन है, जिसका उद्देश्य सॉफ्ट लैंडिंग करना, चंद्र नमूने एकत्र करना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।
- अपेक्षित प्रक्षेपण: यह मिशन अंतिम तैयारी और स्वीकृतियों के अधीन लगभग वर्ष 2028 में प्रक्षेपित किए जाने का लक्ष्य रखता है।
- मुख्य घटक: यह मिशन पाँच मॉड्यूलों से मिलकर बना है—
- प्रोपल्शन मॉड्यूल (PM)
- डिसेंडर मॉड्यूल (DM)
- असेंडर मॉड्यूल (AM)
- ट्रांसफर मॉड्यूल (TM) और
- री-एंट्री मॉड्यूल (RM)।
- मिशन का मुख्य उद्देश्य: यह मिशन चंद्र सतह पर सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग और नमूना संग्रह प्राप्त करने का प्रयास करता है।
- यह चंद्र लिफ्ट-ऑफ, कक्षीय डॉकिंग, नमूना हस्तांतरण और पृथ्वी पर सुरक्षित पुनः प्रवेश का प्रदर्शन करने का भी लक्ष्य रखता है।
चंद्रमा से सफल नमूना-वापसी मिशन
| मिशन |
एजेंसी |
मुख्य विवरण |
| अपोलो 11–17 (1969–1972) |
नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA), अमेरिका |
मानवयुक्त चंद्र मिशन, जिसके अंतर्गत लगभग 382 किलोग्राम चंद्रमा पर उपस्थित चट्टानों और मृदा के नमूनों को सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापस लाया गया। |
| लूना 16, 20 और 24 (1970–1976) |
सोवियत अंतरिक्ष एजेंसी (USSR) |
पहला रोबोटिक चंद्र नमूना-वापसी मिशन; जिसने चंद्र की मिट्टी को सफलतापूर्वक एकत्र कर पृथ्वी पर लौटाया। लूना 24 अंतिम सोवियत चंद्र नमूना-वापसी मिशन था और इसने चंद्रमा से गहरे कोर नमूने प्राप्त किए। |
| चांग’ई-5 (2020) |
चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (CNSA), चीन |
रोबोटिक मिशन, जो ओशियानस प्रोसेलारम से लगभग 1,731 ग्राम चंद्रमा संबंधी सामग्री एकत्र कर पृथ्वी पर वापस लाई गई। |
| चांग’ई-6 (2024) |
चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (CNSA), चीन |
चंद्रमा के दूरस्थ भाग (फार साइड) से नमूने वापस लाने वाला पहला मिशन, जिसने चंद्र अन्वेषण में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। |
निष्कर्ष
चंद्रयान-4 की सफलता भारत के लिए जटिल चंद्र नमूना-वापसी मिशनों के क्षेत्र में एक निर्णायक प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे उसकी अंतरिक्ष क्षमताएँ सुदृढ़ होंगी और दक्षिणी ध्रुव जैसे कम अन्वेषित क्षेत्रों से नए नमूनों के माध्यम से चंद्र अन्वेषण को बढ़ावा मिलेगा।