डीसैलिनेशन प्लांट्स

24 Mar 2026

संदर्भ

डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद, ईरान ने इस बात की चेतावनी दी है कि यदि उसके ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला किया जाता है, तो वह पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल की डिसैलिनेशन अवसंरचना को निशाना बनाएगा।

संबंधित तथ्य 

  • वर्ष 2018 में, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में 172 डिसैलिनेशन प्लांट्स थे, जिनमें ओमान (65) में सर्वाधिक थे, इसके बाद सऊदी अरब (44), संयुक्त अरब अमीरात (40), कतर (9), कुवैत (8), और बहरीन (6) का स्थान था।
  • वर्ष 2018 में, सऊदी अरब ने अल-खफजी डिसैलिनेशन प्लांट की शुरुआत की, जिसे विश्व की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा संचालित जल विलवणीकरण परियोजना कहा गया।

खाड़ी देशों को इतने अधिक डिसैलिनेशन प्लांट्स की आवश्यकता क्यों है?

  • कम वर्षा: खाड़ी देश, जो 2.67 मिलियन वर्ग किमी. क्षेत्र (भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 81%) को कवर करते हैं, बहुत कम वर्षा प्राप्त करते हैं, जो 4 से 30 सेमी. के बीच होती है।
    • उदाहरण के लिए, वर्ष 2018 में कुल वर्षा मात्र 281.91 बिलियन घन मीटर थी — जो भारत को एक वर्ष में प्राप्त होने वाली वर्षा (लगभग 4,000 बिलियन घन मीटर) का केवल 7% है।
  • नदियों की कमी: GCC देशों में नदियाँ नहीं हैं, बल्कि वादी (wadis) हैं, जिनमें केवल वर्षा के दौरान ही जल उपलब्ध होता है।
  • निरंतर शहरीकरण: GCC सांख्यिकीय केंद्र के अनुसार, वर्ष 2020 में छ: खाड़ी सहयोग परिषद देशों की कुल जनसंख्या लगभग 5.7 करोड़ थी, जिसमें सऊदी अरब अग्रणी था और बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण तथा आर्थिक विकास जल की बढ़ती माँग को निरंतर बढ़ा रहे हैं।

डिसैलिनेशन प्लांट्स के बारे में

  • डिसैलिनेशन प्लांट्स ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जो समुद्री जल या खारे जल से लवण और अशुद्धियों को हटाकर मानव उपभोग और औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त मीठा जल तैयार करते हैं।
  • प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ
    • तापीय विधियाँ: इनमें मल्टी-स्टेज फ्लैश (MSF) और मल्टी-इफेक्ट डिस्टिलेशन (MED) शामिल हैं, जिनका खाड़ी देशों में व्यापक स्तर पर उपयोग होता है।
    • झिल्ली विधियाँ/मेम्ब्रेन मेथड्स: रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) सबसे सामान्य और ऊर्जा-कुशल आधुनिक तकनीक है।

डिसैलिनेशन प्लांट्स की कार्य-प्रणाली

  • समुद्री जल का अंतर्ग्रहण: समुद्री जल को अंतर्ग्रहण पाइपों के माध्यम से समुद्र से खींचा जाता है तथा इन पाइपों में प्राय: बड़ी-बड़ी अशुद्धियों और समुद्री जीवों को हटाने के लिए जाल (स्क्रीन) लगे होते हैं।
  • पूर्व-उपचार: जल को रासायनिक और भौतिक फिल्टरों की सहायता से छाना जाता है ताकि निलंबित कण, तलछट और सूक्ष्मजीव हटाए जा सकें तथा झिल्ली या उपकरणों को क्षति से बचाया जा सके।
  • डिसैलिनेशन प्रक्रिया (मुख्य चरण)
    • रिवर्स ऑस्मोसिस (RO): उच्च दाब लागू कर समुद्री जल को अर्द्ध-पारगम्य झिल्लियों से गुजारा जाता है, जो लवण और अशुद्धियों को रोकती हैं तथा केवल मीठे जल को गुजरने देती हैं।
    • तापीय विधियाँ (MSF/MED): समुद्री जल को गर्म कर भाप बनाई जाती है, जिसे संघनित कर मीठा जल प्राप्त किया जाता है, जबकि लवण की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं।
  • पश्च-उपचार: प्राप्त मीठे जल में आवश्यक खनिज (जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम) मिलाए जाते हैं तथा इसे कीटाणुरहित बनाया जाता है, ताकि यह पीने और उपयोग के लिए उपयुक्त हो।
  • भंडारण और वितरण: उपचारित जल को टैंकों में संगृहीत किया जाता है और फिर पाइपलाइनों के माध्यम से घरों, उद्योगों और कृषि तक पहुँचाया जाता है।
  • ब्राइन निपटान: शेष सघन लवणीय घोल (ब्राइन) को आमतौर पर पतला करने के बाद समुद्र में पुनः छोड़ा जाता है, ताकि पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।

डिसैलिनेशन प्लांट्स या संयंत्रों की सीमाएँ

  • उच्च ऊर्जा खपत: डिसैलिनेशन, विशेषकर रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) और तापीय विधियों में, अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे यह महँगा हो जाता है और कई क्षेत्रों जैसे खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में जीवाश्म ईंधनों पर अत्यधिक निर्भर होता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव (ब्राइन निपटान): डिसैलिनेशन से अत्यधिक सघन लवणीय अपशिष्ट (ब्राइन) उत्पन्न होता है, जिसे समुद्र में छोड़ा जाता है।
    • यह स्थानीय लवणता स्तर को बढ़ाता है, घुलित ऑक्सीजन को कम करता है, और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जिसमें मछलियाँ और प्रवाल भित्तियाँ शामिल हैं, को नुकसान पहुँचाता है।
  • कार्बन उत्सर्जन: जब यह जीवाश्म ईंधनों से संचालित होता है, तो डिसैलिनेशन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है, जो जलवायु लक्ष्यों और सततता प्रतिबद्धताओं के विपरीत है।
  • उच्च पूँजी और रखरखाव लागत: डिसैलिनेशन संयंत्रों की स्थापना में अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और पाइपलाइनों पर भारी प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता होती है।
    • नियमित रखरखाव, झिल्ली प्रतिस्थापन और कुशल कार्यबल की आवश्यकता लागत को और बढ़ाती है।
  • भू-राजनीतिक और रणनीतिक संवेदनशीलता: डिसैलिनेशन संयंत्र, विशेषकर पश्चिम एशिया में, महत्त्वपूर्ण अवसंरचना हैं।
    •  इनका तटीय स्थान और महत्त्व इन्हें संघर्ष के दौरान संभावित लक्ष्य बनाता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ जाते हैं।

डिसैलिनेशन प्लांट्स/संयंत्रों के लाभ

  • जल सुरक्षा: डिसैलिनेशन प्लांट्स विशेषकर खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) जैसे शुष्क क्षेत्रों में, एक विश्वसनीय और जलवायु-स्वतंत्र मीठे जल का स्रोत प्रदान कर जल सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं।

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  • वर्षा पर निर्भरता में कमी: ये वर्षा और मानसून की अनिश्चितता पर निर्भरता को कम करते हैं, जिससे सूखे के दौरान भी स्थिर जल आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
  • प्रचुर संसाधनों का उपयोग: ये प्रचुर समुद्री जल का उपयोग करते हैं, जो लगभग असीमित है, जिससे डिसैलिनेशन एक दीर्घकालिक समाधान बनता है।
  • भूजल संरक्षण: डिसैलिनेशन भूजल के अत्यधिक दोहन को कम करता है, जिससे जलभृतों के क्षय को रोकने में सहायता मिलती है।
  • रणनीतिक महत्त्व: ये संघर्ष, आपातकाल और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, जिससे राष्ट्रीय सहनशीलता बढ़ती है।

रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) के बारे में

  • रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) एक जल शुद्धिकरण प्रक्रिया है, जिसमें खारे या अशुद्ध जल को अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली के माध्यम से दाब के साथ गुजारा जाता है, ताकि घुले हुए लवण, अशुद्धियाँ और प्रदूषक हटाए जा सकें।
  • सिद्धांत: यह परासरण दाब से अधिक दाब लगाने के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिससे जल अधिक विलेय सांद्रता (समुद्री जल) वाले क्षेत्र से कम विलेय सांद्रता (मीठा जल) वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित किया जाता है, जिससे रिवर्स ऑस्मोसिस की प्रक्रिया होती है।

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