संदर्भ
IIT खड़गपुर के एक अध्ययन के आधार पर, सरकार ने PMGKAY और संबद्ध योजनाओं के तहत ‘राइस फोर्टिफिकेशन’ को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है, जब तक कि सघन प्रभावी पोषक तत्व वितरण तंत्र विकसित नहीं हो जाता।
संबंधित तथ्य
- खाद्यान्न फोर्टिफिकेशन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से बंद करने के इस निर्णय से खाद्यान्न पात्रता में कोई कमी नहीं आएगी और इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) या मध्याह्न भोजन योजना के तहत संचालन प्रभावित नहीं होगा।
अध्ययन के मुख्य बिंदु
- IIT खड़गपुर द्वारा किए गए अध्ययन में विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में वास्तविक भंडारण स्थितियों के तहत फोर्टिफाइड चावल के दानों (FRK) और फोर्टिफाइड चावल (FR) की शेल्फ लाइफ का आकलन किया गया।
- मुख्य निष्कर्ष
- स्थिरता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक: नमी की मात्रा, भंडारण की स्थिति, तापमान, सापेक्ष आर्द्रता और पैकेजिंग।
- पोषक तत्त्वों पर प्रभाव: लंबे समय तक भंडारण और नियमित रूप से सँभालने से सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की मात्रा कम हो जाती है, जिससे प्रभावी शेल्फ लाइफ में भी गिरावट हो जाती है।
- पोषण संबंधी परिणाम प्रभावित: शेल्फ लाइफ कम होने से फोर्टिफाइड चावल के इच्छित लाभ सीमित हो जाते हैं।
‘राइस फोर्टिफिकेशन’ के बारे में
- ‘राइस फोर्टिफिकेशन’ एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें चावल को आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12, जिंक और विटामिन A, B1, B2, B3 और B6 जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से समृद्ध किया जाता है ताकि इसके पोषण मूल्य में सुधार हो सके।
- प्रक्रिया
- चावल को कोटिंग, डस्टिंग और एक्सट्रूजन जैसी विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके पोषक तत्त्वों से प्रचुर बनाया जाता है।
- एक्सट्रूजन प्रक्रिया में सूखे चावल के आटे को सूक्ष्म पोषक तत्त्वों के मिश्रण के साथ मिलाकर पोषक तत्त्वों से भरपूर चावल के दाने (FRK) तैयार किए जाते हैं। फिर इस मिश्रण को एक्सट्रूडर से गुजारकर सामान्य चावल जैसे दाने बनाए जाते हैं।
- पोषक तत्त्वों से युक्त चावल को सामान्य चावल के साथ मिलाया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि 1 किलोग्राम सामान्य चावल में 10 ग्राम FRK मिलाया गया है।
भारत में ‘राइस फोर्टिफिकेशन’ योजना
- प्रकार: केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित योजना, जिसका 100% खर्च केंद्र सरकार वहन करती है।
- PMGKAY के तहत एक एकीकृत संस्थागत तंत्र के साथ कार्यान्वित।
- उद्देश्य: जनसंख्या स्तर पर एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी से निपटना।
- वितरण: फोर्टिफाइड चावल सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रमुख कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से निःशुल्क वितरित किया जाता है, जैसे:-
- लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS)
- एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS)
- पीएम पोषण (मध्य-दिन भोजन योजना)।
फोर्टिफाइड चावल के लाभ
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी की रोकथाम: यह आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12 और जिंक की कमी से लड़ने में सहायता करता है।
- उदाहरण: महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की व्यापकता को कम करता है।
- मातृ स्वास्थ्य में सुधार: यह गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान आवश्यक पोषक तत्त्व प्रदान करता है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम होती है।
- उदाहरण: फोलिक एसिड युक्त चावल मानव शरीर में तंत्रिका नलिका संबंधी नुकसान के जोखिम को कम करता है।
- बाल स्वास्थ्य और विकास में सुधार: यह बच्चों के संज्ञानात्मक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक विकास में सहायक होता है।
- उदाहरण: आयरन और विटामिन A युक्त चावल बच्चों के बौनेपन को कम करता है और स्कूली प्रदर्शन में सुधार करता है।
- जन कल्याण कार्यक्रमों को समर्थन: यह PMGKAY, ICDS और मध्याह्न भोजन योजनाओं जैसी सरकारी खाद्य योजनाओं में पोषण को एकीकृत करता है।
- उदाहरण: मध्याह्न भोजन में फोर्टिफाइड चावल स्कूली बच्चों के सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की मात्रा में सुधार करता है।
‘राइस फोर्टिफिकेशन’ की चुनौतियाँ
- शेल्फ लाइफ और स्थिरता संबंधी मुद्दे: फोर्टिफाइड चावल के दानों (FRK) में मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्त्व भंडारण, रखरखाव और परिवहन के दौरान क्षरित हो सकते हैं।
- क्योंकि ये नमी, तापमान, आर्द्रता और पैकेजिंग के प्रति संवेदनशील होते हैं।
- बाहरी प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता पर निर्भरता: फोर्टिफिकेशन के लिए विशेष मशीनरी, तकनीकी जानकारी और गुणवत्ता प्रमाणन की आवश्यकता होती है।
- छोटी मिलों में सीमित स्वदेशी क्षमता बड़े पैमाने पर उत्पादन में बाधा बन सकती है।
- लागत और वित्तीय स्थिरता: फोर्टिफिकेशन से उत्पादन लागत में थोड़ी वृद्धि होती है, जिसके लिए बजट आवंटन की आवश्यकता होती है।
- लाखों लाभार्थियों के लिए फोर्टिफिकेशन को बड़े पैमाने पर लागू करना संसाधनों की अधिक खपत वाला कार्य है।
- गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण: बड़े पैमाने पर उत्पादन में पोषक तत्त्वों की एकरूपता सुनिश्चित करना कठिन है।
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- इसके लिए अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाओं, निगरानी और प्रमाणन प्रणालियों की आवश्यकता होती है।
आगे की राह
- पोषक तत्त्वों के प्रभावी वितरण तंत्र विकसित करना: भंडारण और खाना पकाने के दौरान पोषक तत्त्वों की हानि को रोकने के लिए आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 को कैप्सूल में बंद करके उपयोग करना।
- गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण बढ़ाना: सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए ICDS केंद्रों, मध्याह्न भोजन रसोई और केंद्रीय पूलों में नियमित परीक्षण लागू करना।
- राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रमों के साथ एकीकृत करना: अधिकतम पहुँच सुनिश्चित करने के लिए PMGKAY, ICDS और मध्याह्न भोजन योजना के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल वितरित करना।