‘एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2026’

2 Apr 2026

संदर्भ

केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने देश के ऊर्जा क्षेत्र का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करते हुए अपना नवीनतम 33वाँ संस्करण एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2026′ जारी किया है।

संबंधित तथ्य 

  • इस वर्ष के संस्करण में कई नई विशेषताएँ शामिल हैं, जैसे ऊर्जा क्षेत्रों में ऋण प्रवाह पर डेटा, वैश्विक ऊर्जा सांख्यिकी, कोयले की खपत के विस्तृत पैटर्न, उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण के आधार पर उद्योगों में विद्युत की खपत और विमानन तथा समुद्री ईंधन की खपत पर डेटा।

एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2026’ के बारे में

  • यह कोयला, लिग्नाइट, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और नवीकरणीय ऊर्जा को कवर करने वाला एक एकीकृत डेटासेट प्रदान करता है। साथ ही ऊर्जा संतुलन सारिणी, सैंकी (Sankey) आरेख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत सतत् ऊर्जा संकेतक जैसे विश्लेषणात्मक उपकरण भी प्रदान करता है।

मुख्य निष्कर्ष

  • वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (Total Primary Energy Supply-TPES) 2.95% बढ़कर 9,32,816 किलो टन तेल के समतुल्य (KToE) तक पहुँच गई, जो आर्थिक विकास के साथ-साथ ऊर्जा की माँग में निरंतर विस्तार को दर्शाती है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता: नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तीव्र वृद्धि देखी गई है, जो 31 मार्च, 2025 तक 47,04,043 मेगावाट तक पहुँच गई है।
    • क्षेत्रवार विवरण: इस क्षेत्र में सौर ऊर्जा का प्रभुत्व है, जिसकी कुल क्षमता में हिस्सेदारी लगभग 71% है। इसके बाद पवन ऊर्जा और बड़ी पनविद्युत परियोजनाओं का स्थान है।
    • राज्यवार विवरण: इस क्षमता का 70% से अधिक हिस्सा छह राज्यों में केंद्रित है – राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश।
  • स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि: स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी महत्त्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2016 के 90,134 मेगावाट से बढ़कर 2025 में 2,29,346 मेगावाट हो गई है। इसने 10.93% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है।

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  • प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में वृद्धि: इस रिपोर्ट में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, जो वित्त वर्ष 2015-16 के 15,296 मेगाजूल प्रति व्यक्ति से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 18,096 मेगाजूल हो गई है।
    • इसी अवधि के दौरान, दक्षता में सुधार के कारण पारेषण और वितरण (T&D) घाटे को लगभग 22% से घटाकर 17% कर दिया गया है।
  • ऊर्जा का प्रमुख स्रोत: भारत में कोयला ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। इसकी आपूर्ति वित्त वर्ष 2015-16 के 3,87,761 KToE से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 5,52,315 KToE हो गई है।
    • कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस जैसे अन्य स्रोतों ने भी निरंतर वृद्धि दिखाई है।
  • कुल अंतिम खपत (Total Final Consumption): विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा की कुल अंतिम खपत इसी अवधि के दौरान 30% से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 6,08,578 KToE तक पहुँच गई, जो बढ़ती औद्योगिक और उपभोक्ता माँग का संकेत है।
  • ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में निवेश: ऊर्जा क्षेत्र में ऋण प्रवाह (credit flow) में भारी उछाल आया है, जो छह गुना से अधिक बढ़ गया है – वर्ष 2021 के ₹1,688 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹10,325 करोड़। यह ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में बढ़ते निवेश का संकेत देता है।

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  • विद्युत का उपयोग: पारेषण और वितरण घाटे में कमी के कारण पिछले कुछ वर्षों में विद्युत के उपयोग में काफी सुधार हुआ है।
    • पारेषण और वितरण के कारण होने वाला प्रतिशत नुकसान, जो वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान लगभग 22% था, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान घटकर लगभग 17% रह गया है।

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