संदर्भ
सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से अनुरोध किया कि वह खुदरा महंगाई को 4% पर लक्ष्यित करे, जिसमें दोनों ओर ±2% की सीमा हो, और यह लक्ष्य अगले पाँच वर्षों तक, मार्च 2031 तक, लागू रहे।
संबंधित तथ्य
- सूचना के अनुसार, महंगाई लक्ष्य 4% है, जिसमें ऊपरी सह्य सीमा (Upper Tolerance Band) 6% और निचली सह्य सीमा (Lower Tolerance Band) 2% है।
- भारत ने महंगाई-लक्ष्य निर्धारण ढाँचा को अपनाया और वर्ष 2016 में केंद्रीय बैंक को औपचारिक रूप से इसका कार्य सौंपा।
लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण (FIT) के बारे में
- लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण (FIT) एक मौद्रिक नीति ढाँचा है जिसमें केंद्रीय बैंक महंगाई को निर्धारित लक्ष्य सीमा के भीतर बनाए रखने का प्रयास करता है, साथ ही आर्थिक विकास और रोजगार को भी ध्यान में रखा जाता है।
- मानक: यह ढाँचा हेडलाइन् कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) (आधार वर्ष 2024) को मुख्य मानक के रूप में उपयोग करता है ताकि अर्थव्यवस्था में महंगाई को मापा और ट्रैक किया जा सके।
- कानूनी ढाँचा: संशोधित RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-ZA के अनुसार, मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है, जबकि आर्थिक वृद्धि के उद्देश्य को भी ध्यान में रखा जाता है।
- वैश्विक संदर्भ: इसे सबसे पहले न्यूजीलैंड ने वर्ष 1990 में अपनाया। अब कई देशों द्वारा इसे मौद्रिक नीति के मुख्य दृष्टिकोण के रूप में अपनाया जाता है।
- मौद्रिक नीति समिति : MPC साल में कम-से-कम चार बार बैठक करती है ताकि रेपो दर का निर्धारण किया जा सके।
- रेपो दर वह दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उधार देता है, ताकि महंगाई नियंत्रित की जा सके।
- भारत में अपनाना: वर्ष 2015 में, RBI और भारत सरकार ने ऐसा नीति ढाँचा अपनाने पर सहमति व्यक्त की जो मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देता है और विकास को भी ध्यान में रखता है।
- लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य (FIT) ढाँचा को औपचारिक रूप से वर्ष 2016 में अपनाया गया। RBI अधिनियम, 1934 में संशोधन किया गया ताकि इसे कानूनी समर्थन प्राप्त हो सके।
- लक्ष्य निर्धारण: RBI अधिनियम के तहत, भारत सरकार RBI की परामर्श से प्रत्येक पाँच वर्ष में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आधार पर महँगाई लक्ष्य निर्धारित करती है।
- वर्तमान CPI महँगाई लक्ष्य: 4% ± 2% (2% से 6% की सीमा), जो मार्च 2026 तक मान्य है।
मुख्य बिंदु
- स्पष्ट मुद्रास्फीति लक्ष्य: FIT के तहत, केंद्रीय बैंक स्पष्ट रूप से परिभाषित मुद्रास्फीति लक्ष्य के साथ कार्य करता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए नाममात्र आधार (Nominal Anchor) प्रदान करता है। भारत में, लक्ष्य 4% है, जिसमें ±2% टाॅलरेंस बैंड है।
- उदाहरण: जब वर्ष 2022–23 में महँगाई 6% के स्तर से अधिक हो गयी, तो यह ऊपरी सीमा को पार कर गई, जिससे नीति सख्ती के साथ लागू किया गया।
- मौद्रिक नीति उपकरणों का उपयोग: केंद्रीय बैंक महँगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, और ओपन मार्केट ऑपरेशन्स जैसे उपकरणों का उपयोग करता है।
- उदाहरण: भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2022–23 में बढ़ती महँगाई को रोकने के लिए रेपो दर को 4% से 6.5% तक बढ़ाया।
- लचीला दृष्टिकोण: FIT महँगाई लक्ष्य से अल्पकालिक विचलन उत्पन्न होता है ताकि संकट के दौरान वृद्धि और स्थिरता को बनाया जा सके।
- उदाहरण: COVID-19 के दौरान, RBI ने आर्थिक पुनर्प्राप्ति के लिए मुद्रास्फीति जोखिम के बावजूद ब्याज दरें कम रखीं।
- मध्यम अवधि का दृष्टिकोण: यह ढाँचा अल्पकालिक अवरोधों या संकट की स्थिति के बजाय मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति नियंत्रण पर केंद्रित है।
- उदाहरण: RBI प्राय: तात्कालिक नीति लागू करने के स्थान पर अल्पकालिक खाद्य मूल्य वृद्धि (जैसे प्याज की कीमतों में उछाल) को नजरअंदाज करता है।