संदर्भ
सैपियन लैब्स द्वारा वैश्विक माइंड हेल्थ 2025 रिपोर्ट ने मानसिक कल्याण में तीव्र पीढ़ीगत गिरावट को रेखांकित किया है, जिसमें भारतीय युवा (18–34 वर्ष) 84 देशों में मानसिक स्वास्थ्य के मामले में वैश्विक स्तर पर 60वें स्थान पर हैं।
संबंधित तथ्य
- ये निष्कर्ष भारत में 78,093 इंटरनेट-सक्षम, साक्षर व्यक्तियों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं, जिनमें 18–34 आयु वर्ग के 29,594 तथा 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के 24,088 व्यक्ति शामिल हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के बारे में
- मानसिक स्वास्थ्य मानसिक कल्याण की वह अवस्था है, जो व्यक्तियों को जीवन के तनावों का सामना करने, अपनी क्षमताओं को पहचानने, प्रभावी ढंग से सीखने और कार्य करने तथा अपने समुदाय में योगदान देने में सक्षम बनाती है।
- यह स्वास्थ्य और कल्याण का एक अभिन्न घटक है, जो व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से निर्णय लेने, संबंध बनाने और जिस दुनिया में हम रहते हैं, उसे आकार देने की हमारी क्षमताओं का आधार है।
- मानसिक स्वास्थ्य एक मूलभूत मानव अधिकार है।
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माइंड हेल्थ क्वोशेंट (MHQ) के बारे में
- माइंड हेल्थ क्वोशेंट (MHQ) एक समग्र सूचकांक है, जिसे सैपियन लैब्स (एक गैर-लाभकारी संगठन) द्वारा उसके वैश्विक माइंड परियोजना के अंतर्गत किसी व्यक्ति के समग्र मानसिक कार्यकरण और कल्याण का आकलन करने हेतु विकसित किया गया है।
- शोधकर्ता मानसिक कार्यकरण के अनेक आयामों का मानचित्रण करते हैं, जो जीवन के प्रबंधन और प्रगति के लिए आवश्यक हैं:
- संज्ञानात्मक क्षमता
- एकाग्रता और ध्यान अवधि
- निर्णय लेने की क्षमता
- समस्या-समाधान कौशल।
- सामाजिक क्षमता
- संबंधों की गुणवत्ता
- अपनत्व की भावना
- सहानुभूति और सामाजिक सहभागिता।
- भावनात्मक क्षमता
- भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता
- तनाव के प्रति लचीलापन
- निरंतर चिंता या मनोदशा अस्थिरता से मुक्ति।
पीढ़ीगत मानसिक स्वास्थ्य गिरावट के कारण
- खाद्य पदार्थों में बढ़ते न्यूरोटॉक्सिन: शिशु आहार में विषैले योजकों और अत्यधिक प्रसंस्कृत अवयवों की बढ़ती उपस्थिति।
- इसका तंत्रिका तंत्र और भावनात्मक नियंत्रण पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है।
- प्रारंभिक स्मार्टफोन संपर्क: बचपन का विकास एल्गोरिदम-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्मों से बढ़ते प्रभाव के अधीन है।
- व्यस्त जीवनशैली के कारण अभिभावकीय संवाद में कमी।
घटते MHQ के आर्थिक और सामाजिक परिणाम
- उत्पादकता पर प्रभाव: MHQ का उत्पादकता से रैखिक संबंध है; घटते स्कोर आर्थिक उत्पादन और कार्यबल दक्षता को कम कर सकते हैं।
- हिंसक अपराध से संबंध: “सामाजिक स्व” उप-माप का हिंसक अपराध दरों के साथ नकारात्मक सहसंबंध पाया गया है।
- पीढ़ीगत गिरावट: युवा पीढ़ियों में सामाजिक स्व में तीव्र गिरावट वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा का संकेत दे सकती है।
- अंतरपीढ़ीगत चिंता: आर्थिक और सामाजिक प्रभावों से परे, यह प्रवृत्ति बच्चों के लिए निर्मित भविष्य के परिवेश को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करती है।
| आयु वर्ग |
एमएचक्यू स्कोर
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वैश्विक रैंक
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अवलोकन |
| 18–34 वर्ष |
33
|
60वाँ |
निम्न मानसिक कल्याण |
| 55 वर्ष से अधिक |
96
|
49वाँ
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कार्यात्मक मानकों के अधिक निकट। |
वैश्विक माइंड हेल्थ 2025 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
- वैश्विक कवरेज: यह अध्ययन एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के 84 देशों में दस लाख से अधिक उत्तरदाताओं के आँकड़ों पर आधारित है।
- शोधकर्ताओं का कहना है कि परिणाम अस्थायी महामारी-पश्चात् प्रभाव के बजाय एक संरचनात्मक, बहुवर्षीय पीढ़ीगत परिवर्तन को दर्शाते हैं।
- देश रैंकिंग हेतु प्रयुक्त व्यावहारिक कारक
- पारिवारिक संबंध: यह सामाजिक निकटता और स्थिरता तथा आध्यात्मिकता को दर्शाता है, जो अर्थ एवं जुड़ाव की भावना प्रदान करती है।
- अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का उपभोग: मस्तिष्क स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले आनंद-प्राप्ति व्यवहार और जीवन शैली पैटर्न का संकेतक।
- बचपन में स्मार्टफोन संपर्क: प्रारंभिक डिजिटल संपर्क तथा उससे संबंधित व्यावहारिक और संज्ञानात्मक परिवर्तनों को दर्शाता है।
| सूचकांक |
भारत की स्थिति / आँकड़े |
अवलोकन |
| पारिवारिक निकटता |
28वाँ स्थान (दोनों आयु वर्ग) |
अपेक्षाकृत मजबूत अंतरपीढ़ीगत सामाजिक संबंधों को दर्शाता है। |
| अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य उपभोग (18–34 वर्ष) |
44% |
युवाओं में उच्च उपभोग |
| अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य उपभोग (55+ वर्ष) |
11% |
वृद्ध आबादी में उल्लेखनीय रूप से कम |
| पहली बार स्मार्टफोन संपर्क |
71वाँ स्थान |
प्रारंभिक डिजिटल संपर्क की प्रवृत्ति को दर्शाता है। |
| स्मार्टफोन के प्रथम उपयोग की औसत आयु |
16.5 वर्ष |
युवा समूहों में आयु घट रही है। |
- उभरती वैश्विक युवा संवेदनशीलता के बीच संरक्षक सांस्कृतिक कारक
- भारत मजबूत पारिवारिक संबंधों के रूप में एक संरक्षक सांस्कृतिक कारक से लाभान्वित होता रहा है। तथापि, भारतीय युवा आधुनिक, इंटरनेट-संपन्न और साक्षर समाजों में सामान्य संरचनात्मक परिवर्तनों से प्रेरित वैश्विक प्रवृत्तियों के समान मानसिक स्वास्थ्य संवेदनशीलताओं का सामना कर रहे हैं।